शुक्रवार, 19 मई 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 20 May

🔴 हम युगान्तर प्रस्तुत करने वाली चेतना का ज्ञान गंगा का अवतरण करने के लिए भागीरथ प्रयत्न कर रहे हैं। हमारा ज्ञानयज्ञ सतयुग की कामना को साकार करने वाले नवयुग को धरती पर उतारने के लिए है। हम मनुष्य में देवत्व का उदय देखना चाहते हैं और इन्हीं सपनों को साकार करने के लिए समुद्र को पाटकर अपने अण्डे पुनः प्राप्त करने के लिए चोंच में बालू भर डालने में निरत टिटहरी की तरह उत्कट संकल्प लेकर जुटे हैं। इन प्रयत्नों का केन्द्र छोटा-सा आश्रम शांतिकुंज गायत्री तीर्थ है।

🔵 शांतिकुंज परिसर में हम अपना सूक्ष्म षरीर और अद्रश्य अस्तित्व बनाये रहेंगे। यहाँ आने वाले और रहने वाले अनुभव करेंगे कि उनसे अद्रश्य किन्तु समर्थ प्राण-प्रत्यावर्तन और मिलन, आदान-प्रदान भी हो रहा है। इस प्रक्रिया का लाभ अनवरत रूप से जारी रहेगा। हमारा प्राण अनुदान निरन्तर इस तपःस्थली में वितरित होता रहेगा। आवश्यकता मात्र स्वयं को यहाँ गायत्री तीर्थ से जोड़े रखने की है।              
                                                   
🔴 नालन्दा विश्वविद्यालय के तरीके से हमने शांतिकुंज में नेता बनाने का एक विद्यालय बनाया है। आप नेता हो जायेंगे। सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू, जार्ज वाशिंटन और अब्राहम लिंकन बन जायेंगे। नेता बनना जिनको पसन्द होवे, वे आगे आएँ और हमारे कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर चलें। साथ नहीं चलेंगे, तो योग्य आदमी कैसे बनेंगे?  

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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