बुधवार, 1 मई 2019

👉 ईश्वर या संसार

संसार में लोग सत्य भी बोलते हैं, और झूठ भी। सामान्य रूप से लोग सत्य बोलते हैं। परंतु जब कोई आपत्ति दिखाई दे, कहीं मान अपमान का प्रश्न हो, कहीं कोई स्वार्थ हो , कोई लोभ, कोई क्रोध हो आदि आदि, ऐसे कारण उपस्थित होने पर प्रायः लोग झूठ बोलते हैं। वे समझते हैं कि यदि मैंने इस अवसर पर सत्य बोल दिया, तो मेरा काम बिगड़ जाएगा। सामने वाला व्यक्ति मुझसे नाराज हो जाएगा। उससे मुझे जो लाभ मिल रहा है, वह नष्ट हो जाएगा।

परंतु सब लोग एक जैसे नहीं होते। कुछ लोग यह सोचते हैं, कि हानि लाभ तो जीवन में होता ही रहता है। यह संसार है, इसमें सुख और दुख दोनों आते ही रहते हैं। मैं झूठ बोलकर ईश्वर को नाराज क्यों करूं? ऐसा करने पर ईश्वर मुझे दंड देगा। और जो लाभ मुझे ईश्वर से मिल रहा है, या भविष्य में मिलने वाला है, वह मेरा लाभ नष्ट हो जाएगा।
इसलिए ऐसे लोग ईश्वर को सामने रख कर सत्य ही बोलते हैं। तब जो उन्हें सांसारिक लोगों से हानि होती है, उसे वे सहन कर लेते हैं।

ऐसे अवसर पर उनको सहन करने की शक्ति, ईश्वर ही देता है। अतः संसार के लोग भले ही कुछ नाराज हो जाएँ, आप ईश्वर को नाराज न करें। यदि ईश्वर नाराज हो गया, तो आपको उससे अधिक हानि उठानी पड़ेगी। संसार के लोग आपकी कम हानि कर पाएंगे। ईश्वर तो आगे पशु पक्षी घोड़ा साँप बिच्छू आदि पता नहीं क्या-क्या बना देगा। इसलिए सावधान रहें।

👉 अपना अपना भाग्‍य

एक राजा के तीन पुत्रियाँ थीं और तीनों बडी ही समझदार थी। वे तीनो राजमहल मे बडे आराम से रहती थी। एक दिन राजा अपनी तीनों पुत्रियों सहित भोज...