मंगलवार, 24 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 82)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

🔴 13. पवित्र धर्मानुष्ठान का यज्ञीय वातावरण रहे:- मांस, मदिरा, रण्डी भाड़ नचकैये, अश्लील गीत, गन्दे मजाक, आदि के हेय असुर कृत्यों से इस धर्म संस्कार की पवित्रता नष्ट न होने दी जाय।

🔵 विवाह एक श्रेष्ठ यज्ञ है। उसमें देवताओं का आह्वान वेद पाठ एवं दो आत्माओं को जोड़ने वाला महान धर्मानुष्ठान सम्पन्न होता है। ऐसे शुभ समय में उपरोक्त बुराइयों के समावेश का कोई तुक नहीं। जहां इन बातों का रिवाज चल पड़ा है, वहां उसे बन्द किया जाय। गन्दे रिकार्ड भी लाउडस्पीकर में विवाह में न बजें।

🔴 14. विवाह संस्कार प्रभावशाली ढंग से हों:- विवाह मण्डप की बढ़िया सजावट, हवन की सुव्यवस्था दोनों पक्ष के नर-नारियों के बैठने योग्य समुचित स्थान, कोलाहल, धुंआ आदि से बचाव, विद्वान पण्डित जो विवाह विधान को व्याख्यापूर्वक समझा सके—इन सब बातों का प्रबन्ध विशेष ध्यान देकर किया जाय।

🔵 विवाह संस्कार जैसी दो आत्माओं के आत्म समर्पण की धर्म प्रक्रिया का अत्यन्त महत्व है। उसी के उपलक्ष्य में ही इतना सारा आडम्बर रचा जाता है। खेद है कि संस्कार कराने वाले पण्डितों के अनाड़ीपन तथा घर वालों की उपेक्षा के कारण संस्कार की विधि व्यवस्था भार रूप चिह्न पूजा मात्र रह जाती है जिससे हर कोई जल्दी से जल्दी पिंड छुड़ाना चाहता है। आदर्श विवाहों में यह रूप बदला जाना चाहिये, और सुयोग्य पण्डितों के द्वारा शास्त्रोक्त विधि विधान के साथ ऐसे सुन्दर ढंग से विवाह कराने का प्रबन्ध किया जाय जिसे देखने में सबका मन लगे। मन्त्र की व्याख्या भी ऐसे प्रभावशाली ढंग से हो कि वर-वधू ही नहीं उपस्थित समस्त नर-नारी भी अपने विवाहित जीवन का उद्देश्य और कर्तव्य समझ सकें। इसके लिए आवश्यक प्रबन्ध पहले से ही कर रक्खा जाय।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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