शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

👉 समाधि के सोपान (भाग 2) (In The Hours Of Meditation)


🔴  भयभीत न होओ! सभी भौतिक वस्तुएँ छाया के समान हैं। दृश्य जगत में मिथ्या का ही प्राधान्य है। तुम ही सत्य हो जिसमें कोई परिवर्तन नहीं। यह जान लो कि तुम अटल हो। प्रकति जैसा चाहे वैसा खेल तुम्हारे साथ करे। तुम्हारा रूप स्वप्नमात्र है। इसें जानो और संतुष्ट रहो। तुम्हारी आत्मा निराकार ईश्वर में ही अवस्थित है। मन को टिमटिमाते प्रकाश का अनुसरण करने दो। इच्छायें शासन करती हैं। सीमाओं का अस्तित्व है। तुम मन नहीं हो। इच्छायें तुम्हारा स्पर्श नहीं कर सकती।

🔵  तुम सर्वज्ञता एवं सर्वशक्तिमत्ता के अंतर्गत समाविष्ट हो। स्मरण रखो! जीवन एक खेल मात्र है। अपनी भूमिका निभाओ। अवश्य निभाओ। यही नियम है। किन्तु साथ ही तुम न तो खिलाडी हो, न खेल हो और न ही नियम। स्वयं जीवन भी तुम्हें सीमित नहीं कर सकता। क्या तुम असीम नहीं हो? जीवन तो स्वप्न के पदार्थ से बना है। तुम स्वप्न नहीं देखते। असत्य के स्पर्श और दोष से परे तुम स्वप्नरहित सत्ता हो। इसे अनुभव करो! अनुभव करो और मुक्त। हो जाओ! मुक्त!

🔴  शांति! शांति! मूक शाति।! श्रवणीय शांति! वह शांति जिसमें ईश्वर के शब्द सुने जाते हें। शांति और मौन! तब ईश्वरीय ध्वनि आती है। श्रवणीय मौन के भीतर श्रवणीय।

🔵  मैं तुम्हारे साथ हूँ! सदैव, सदैव के लिए। तुम मुझसे दूर कभी नहीं रहे और न ही कभी दूर हो सकते हो। मैं ही तुम्हारी आत्मा हूँ। ब्रह्माण्ड सै परे, सभी स्वप्नों से परे आप्तकाम हो अनंतता के मध्य मैं विराजमान हूँ। और तुम भी वही हो। क्योंकि मैं ही तुम हो और तुम ही मैं' हूँ। सभी स्वप्नों का त्याग कर मेरे पास आओ। मैं तुम्हें अज्ञान अंधकार के समुद्रं के उस पार प्रकाश और शाश्वत जीवन में ले जाऊँगा। क्योंकि मैं यह सब हूँ और तुम और मैं एक हैं। तू मैं हूँ और मैं तू हैं। जब मौन और शांति के क्षण पुन: आयेंगे तब तुम मेरी आवाज सुनोगे। ईश्वर की ध्वनि! ईश्वरीय ध्वनि!!

🌹 एफ. जे. अलेक्जेन्डर

👉 उपासना, साधना व आराधना (अन्तिम भाग)


🔵 हमारे दूसरे आध्यात्मिक गुरु, जो हिमालयवासी हैं और जो सूक्ष्म-शरीरधारी हैं, उन्होंने हमारे घर में प्रकाश के रूप में आकर दीक्षा दी। उन्होंने हमें पूर्व जन्म की बातें दिखलाईं। उसके बाद उन्होंने हमें गायत्री मंत्र की दीक्षा दी। हमने कहा कि गायत्री मंत्र की दीक्षा तो हम पहले से लिए हुए हैं, फिर दोबारा देने का क्या अर्थ है? उन्होंने कहा कि आपके पहले गुरु ने यह कहा था कि यह ब्राह्मणों की गायत्री है। अब हम यह बतलाते हैं कि बोओ और काटो। इस मंत्र के अनुसार हमने अपने पिता की सम्पत्ति को भी लोकमंगल में लगा दिया। हमने बोया और पाया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसके अलावा अन्य चार चीजों को भगवान् के खेत में लगाना चाहिए। समय, श्रम, बुद्धि-जो भगवान् से मिली है। धन वह है, जो संसार में कमाया जाता है। ये चारों चीजें हमने समाज में लगा दीं। इसके द्वारा हमारी पूजा, उपासना एवं साधना हो गयी। हमारे ब्राह्मण-जीवन का यही चमत्कार है। यही मेरी पूजा है।

🔴 समय के बारे में आप देखना चाहें, तो इन पचहत्तर वर्षों में हमने क्या किया है, कितना किया है, वह आप देख सकते हैं। हमने भगवान् यानी जो अच्छाइयों का समुच्चय है, उसे समर्पण करके यह सब किया है। हमारी उपासना और साधना ऐसी है कि हमने सारी जिन्दगी भर धोबी के तरीके से अपने जीवन को धोया है और अपनी कमियों को चुन-चुनकर निकालने का प्रयत्न किया है। आराधना हमने समाज को ऊँचा उठाने के लिए की है। आप यहाँ आइये और देखिये, अपने मुख से अपने बारे में कहना ठीक बात नहीं है। आप यहाँ आइये और दूसरों के मुख से सुनिये। हम सामान्य व्यक्ति नहीं हैं, असामान्य व्यक्ति हैं। यह हमें उपासना, साधना और आराधना के द्वारा मिला है। आप अगर इन तीनों चीजों का समन्वय अपने जीवन में करेंगे, तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपको साधना से सिद्धि अवश्य मिलेगी।

🔵 हमारे जो भी सहयोगी, सखा, सहचर एवं मित्र हैं, उनसे हम यही कहना चाहते हैं कि आप केवल अपने तथा अपने परिवार के लिए ही खर्च मत कीजिए, वरन् कुछ हिस्सा भगवान् के लिए भी खर्च कीजिए। साथ ही हम यह भी कहते हैं कि बोइये और काटिये। फिर देखिये कि जीवन में क्या-क्या चमत्कार होते हैं। आप जनहित में, लोकमंगल में, पिछड़ों को ऊँचा उठाने में अपना श्रम, समय, साधन लगाएँ। अगर आप इतना करेंगे, तो विश्वास रखिये आपको साधना से सिद्धि मिल सकती है। हमने इसी आधार पर पाया है और आप भी पा सकेंगे, परन्तु आपको सही रूप से इन तीनों को पूरा करना होगा। आपकी साधना तब तक सफल नहीं होगी, जब तक आप हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चलेंगे। यदि आप हमारे कंधे से कंधा मिलाकर और कदम से कदम मिलाकर चल सकें, तो हम आपको यकीन दिलाते हैं कि आपका जीवन धन्य हो जाएगा, पीढ़ियाँ आपको श्रद्धापूर्वक याद रखेंगी।

🌹 आज की बात समाप्त। ॐ शान्तिः
🌹 पूज्य पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Lectures/112.2

👉 आत्मचिंतन के क्षण 29 July 2016


🔴  दुष्कर्म करना हो तो उसे करते हुए कितनी बार विचारों और उसे आज की अपेक्षा कल-परसों पर छोड़ों, किन्तु यदि कुछ शुभ करना हो तो पहले ही भावना तरंग को कार्यान्वित होने दो। कल वाले काम को आज ही निपटाने का प्रयत्न करो। पाप तो रोज ही अपना जाल लेकर हमारी घात में फिरता रहता है, पर पुण्य का तो कभी-कभी उदय होता है, उसे निराश लौटा दिया तो न जाने फिर कब आवे।

🔵  दूसरों को सुधारना कठिन हो सकता है, पर अपना मन अपनी बात न माने यह कैसे हो सकता है। हम अपने आपको तो सुधार ही सकते हैं-अपने को सन्मार्ग पर चला ही सकते हैं। इसमें दूसरा कोई क्या बाधा डाले? हम ऊँचे उठना भी चाहते हैं और उसका साधन भी हमारे हाथ में है तो आत्म-सुधार के लिए, आत्म-निर्माण के लिए और आत्म-विकास के लिए क्यों कटिबद्ध न हों?

🔴  पाप की अवहेलना न करो। वह थोड़ा दिखते हुए भी बड़ा अनिष्ट कर डालता है। जैसे आग की छोटी सी चिनगारी भी मूल्यवान् वस्तुओं के ढेर को जलाकर राख कर देती है। पला हुआ साँप कभी भी डस सकता है। उसी प्रकार मन में छिपा हुआ पाप कभी भी हमारे उज्ज्वल जीवन का नाश कर सकता है।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

👉 अपने आपकी समालोचना करो


🔵 जो कुछ हो, होने दो। तुम्हारे बारे में जो कहा जाए उसे कहने दो। तुम्हें ये सब बातें मृगतृष्णा के जल के समान असार लगनी चाहिए। यदि तुमने संसार का सच्चा त्याग किया है तो इन बातों से तुम्हें कैसे कष्ट पहुँच सकता है। अपने आपकी समालोचना में कुछ भी कसर मत रखना तभी वास्तविक उन्नति होगी।

🔴 प्रत्येक क्षण और अवसर का लाभ उठाओ। मार्ग लंबा है। समय वेग से निकला जा रहा है। अपने संपूर्ण आत्मबल के साथ कार्य में लग जाओ, लक्ष्य तक पहुँचोगे।

🔵 किसी बात के लिए भी अपने को क्षुब्ध न करो। मनुष्य में नहीं, ईश्वर में विश्वास करो। वह तुम्हें रास्ता दिखाएगा और सन्मार्ग सुझाएगा।

🌹 पं. श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 Introspect

🔵 Whatever happens, let it happen. Whatever is said about you, let it be said. You should consider these things as illusory as a mirage. If you have really detached yourself from the world, then why should such things affect you? Focus on inspecting yourself thoroughly for weaknesses. Only then can you begin the process of growth.

🔴  Take advantage of every moment and every opportunity. Your path is very long, and time is very short. Concentrate your inner strength on reaching your goal.

🔵 Do not despair in any situation. Have faith not in the capacity of man, but in the capacity of God. God will show you the right path.

🌹 Pt. Shriram Sharma Aacharya

👉 आत्मचिंतन के क्षण 16 Dec 2018

ऐसा कोई नियम नहीं है कि आप सफलता की आशा रखे बिना, अभिलाषा किये बिना, उसके लिए दृढ़ प्रयत्न किये बिना ही सफलता प्राप्त कर सको। प्रत्ये...