रविवार, 9 जुलाई 2017

👉 Lose Not Your Heart Day 9

🌹  Courtesy, Simplicity, Empathy, Compassion

🔵 It is your responsibility to cultivate courtesy, simplicity, empathy, and compassion. Before looking for and criticizing faults in others,
address the glaring flaws in yourself. If you are unable to control your speech, use it against yourself instead of others.

🔴 First, discipline yourself. Without discipline, you cannot experience your true nature. Courtesy, simplicity, empathy, and compassion are all manifestations of this true nature.

🔵 Disregard how others treat you and stay focused on your own growth. If you can grasp this, you have understood a great secret.

🌹 ~Pt. Shriram Sharma Acharya

👉 हमारा युग निर्माण सत्संकल्प (भाग 24)

🌹  मर्यादाओं को पालेंगे, वर्जनाओं से बचेंगे, नागरिक कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाजनिष्ठ बने रहेंगे।

🔴 आत्म प्रताडऩा सबसे बड़ी मानसिक व्याधि है। जिसका मन अपने दुष्कर्मों के लिए अपने आपको धिक्कारता रहेगा, वह कभी आंतरिक दृष्टि से सशक्त न रह सकेगा। उसे अनेक मानसिक दोष दुर्गुण घेरेंगे और धीरे-धीरे अनेक मनोविकारों से ग्रस्त हो जाएगा।

🔵 मर्यादाओं का उल्लंघन करके लोग तात्कालिक थोड़ा लाभ उठाते देखे जाते हैं। दूरगामी परिणामों को न सोचकर लोग तुरंत के लाभ को देखते हैं। बेईमानी से धन कमाने, दंभ से अहंकार बढ़ाने और अनुपयुक्त भोगों के भोगने से जो क्षणिक सुख मिलता है, वह परिणाम में भारी विपत्ति बनकर सामने आता है। मानसिक स्वास्थ्य को नष्ट कर डालने और आध्यात्मिक महत्ता एवं विशेषताओं को समाप्त करने में सबसे बड़ा कारण आत्म प्रताडऩा है। ओले पड़ने से जिस प्रकार फसल नष्ट हो जाती है, उसी प्रकार आत्म प्रताडऩा की चोटें पड़ते रहने से मन और अंतःकरण के सभी श्रेष्ठ तत्त्व नष्ट हो जाते हैं और ऐसा मनुष्य प्रेत-पिशाचों जैसी श्मशान मनोभूमि लेकर निरंतर विक्षुब्ध विचरता रहता है।

🔴 धर्म कर्तव्यों की मर्यादा को तोड़ने वाले उच्छृंखल, कुमार्गगामी मनुष्यों को गतिविधियों को रोकने के लिए, उन्हें दंड देने के लिए समाज और शासन की ओर से जो प्रतिरोधात्मक व्यवस्था हुई है, उससे सर्वथा बचे रहना संभव नहीं। धूर्तता के बल पर आज कितने ही अपराधी प्रवृत्ति के लोग सामाजिक भर्त्सना से और कानून दंड से बच निकलने में सफल होते रहते हैं, पर यही चाल सदा सफल होती रहेगी, ऐसी बात नहीं है। असत्य का आवरण अंततः छँटना ही है। जन-मानस में व्याप्त घृणा का सूक्ष्म प्रभाव उस मनुष्य पर अदृश्य रूप से पड़ता है। जिसके अहित परिणाम ही सामने आते हैं।

🔵 राजदंड से बचे रहने के लिए ऐसे लोग रिश्वत में बहुत खर्च करते हैं, निरंतर डरे और दबे रहते हैं, उनका कोई सच्चा मित्र नहीं रहता। जो लोग उनसे लाभ उठाते हैं, वे भी भीतर ही भीतर घृणा करते हैं और समय आने पर शत्रु बन जाते हैं। जिनकी आत्मा धिक्कारेगी उनके लिए देर-सबेर में सभी कोई धिक्कारने वाले बन जाएँगे। ऐसी धिक्कार एकत्रित करके यदि मनुष्य जीवित रहा हो उसका जीवन न जीने के बराबर है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://literature.awgp.org/book/ikkeesaveen_sadee_ka_sanvidhan/v1.36

http://literature.awgp.org/book/ikkeesaveen_sadee_ka_sanvidhan/v2.6