मंगलवार, 17 मई 2016

🌞 शिष्य संजीवनी (भाग 51) :-- सदगुरु से संवाद की स्थिति कैसे बनें

🔵 भावानुभूतियों के इस क्रम में अपने सद्गुरु के साथ बिताए क्षणों का सुयोग भी है। उनके दर्शन की प्यारी झलक, उनके श्री चरणों का सुकोमल स्पर्श अथवा फिर उनकी कही हुई बातें। इस सबका अवसर जीवन में कम आया हो, तो स्वप्र भी झरोखे बन सकते हैं। स्वप्रों में भी दिव्यता उतरती है। धन्य होते हैं, वे पल जब स्वप्र में सद्गुरु की झलक मिलती है। स्वप्र में जब उनके स्पर्श का अहसास मिला- तब यह सब विशेष हो जाता है। क्योंकि ऐसे क्षणों में हमारी अन्तर्चेतना सद्गुरु के साथ लयबद्ध स्थिति में होती है।
   
🔴 इन क्षणों का यदि बारम्बार स्मरण हो सके तो सद्गुरु से संवाद सम्भव बन पड़ता है। ईसाइयों की पुरातन कथाओं में प्रायः ईसेन सम्प्रदाय का जिक्र होता है। कहते हैं कि इसी सम्प्रदाय में ईसा मसीह को दीक्षा मिली थी। इस सम्प्रदाय में साधना की कई अनूठी बातों की चर्चा मिलती है। शोध की जिज्ञासा हो तो यहाँ अध्यात्म की अनेकों खास तकनीकें ढूँढी जा सकती हैं। इन सभी में ध्यान का विशेष महत्त्व है। वैसे भी कहते हैं कि यह सम्पूर्ण सम्प्रदाय ध्यान पर ही टिका हुआ था।
  
🔵 इसके पुरातन आचार्यों का कहना था कि यदि तुम्हारे जीवन में अगर कभी कोई ऐसा क्षण घटा हो, जिस क्षण में विचार न रहे हों और तुम आनन्द से भर गए हो, तो उस क्षण को तुम पुनः पुनः स्मरण करो। उन क्षणों को अपने ध्यान का विषय बनाओ। वह क्षण कोई भी रहा हो, उसी को बार- बार स्मरण करके उस पर ध्यान करो, क्योंकि उस क्षण में तुम अपनी श्रेष्ठतम ऊँचाई पर थे। अब उन्हीं क्षणों में, उसी स्थान में मेहनत करने की आवश्यकता है।

🔴 ऐसे क्षण हम सभी के जीवन में आते हैं। बस हम इन्हें सम्हाल कर नहीं रख पाते। इन्हें सम्हालने की जरूरत है। क्योंकि नीरवता में घुले, आनन्द से भरे इन्हीं क्षणों में हमारी भावचेतना शिखर पर होती है। इन्हीं में सद्गुरु से संवाद की स्थिति बनती है परम चेतना के संकेतों को पाने का सौभाग्य जगता है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 डॉ. प्रणव पण्डया
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Books_Articles/Devo/sadgu

👉 क्षुद्र हम, क्षुद्रतम हमारी इच्छाएँ (भाग 5)


👉 भगवान् आए धरती पर
🔴 इसी उद्देश्य से भगवान् पृथ्वी पर आने की तैयारियाँ करने लगे। लक्ष्मी जी ने कहा ‘अरे! आप तो बेकार परेशान हो रहे हैं। मनुष्य तो आपके काम का रहा नहीं। मनुष्य बड़ा चालाक हो गया है और मनुष्य बहुत छोटा हो गया है, बड़ा संकीर्ण हो गया है। उसके पास जाने से आपको कोई फायदा नहीं।’ भगवान् ने कहा- ‘‘नहीं, मनुष्य तो हमारा बच्चा है। हम तो जायेंगे और मनुष्य के पास रहेंगे और उसको रास्ता बतायेंगे और कर्तव्य बताएँगे।’’ भगवान् जी बैकुण्ठलोक से रवाना हो गये और पृथ्वी पर आये। पृथ्वी पर निवास करने लगे। लोगों से कहा- ‘‘मनुष्यो! हमने तुमको बनाया है और एक काम के लिए बनाया है। उस काम के लिए हम आपको शिक्षा देंगे और आपके दुःखों को दूर करेंगे। शान्ति के लिए आगे बढ़ाएँगे।’’ भगवान् ने मनुष्यों से यह बात कही। मनुष्य आये और भगवान् के पास घूमने लगे, चक्कर काटने लगे। भगवान् उनको ज्ञान की बातें बताने लगे, शिक्षा की बात बताने लगे। आत्मकल्याण की बात बताने लगे। परोपकार की बात बताने लगे। सेवा की बात बताने लगे। लेकिन मनुष्यों ने उसको सुनने से इंकार कर दिया।

👉 मनोकामनाओं की लिस्ट
🔵 मनुष्यों ने कहा- ‘‘भगवान् जी! इन बातों की हमको जरूरत नहीं है।’’ तो फिर किस बात की जरूरत है? उन्होंने कहा कि महाराज जी! आप तो बतायें कि हमको खाँसी आ जाती है। हमको बुखार आ जाता है। आप हमारा बुखार अच्छा कर दीजिए। किसी ने कहा कि महाराज जी! हमारे ऊपर मुकदमा चल रहा है और आप मुकदमा ठीक करा दीजिए। किसी ने कहा कि महाराज जी! हमारा ब्याह नहीं हुआ है और हमारी इतनी उमर हो गयी और हमको अच्छी से अच्छी लड़की नहीं मिलती। किसी ने कहा कि महाराज जी! हमारी कन्या बाईस साल की हो गयी है। हम उसके लिए लड़का ढूँढ़ते हैं, मिलता नहीं। लोग ज्यादा से ज्यादा दहेज माँगते हैं। किसी ने कहा कि महाराज जी! हमारा ये काम करा दीजिये, वो काम करा दीजिये। भगवान् ने कहा- ‘‘लोगो! यह तुम्हारा काम है। हमारा काम नहीं है’’ लोगों ने कहा कि महाराज जी! यही आपके काम हैं और आप ही यह काम किया कीजिए।

🔴 भगवान् को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने कहा कि हम ज्ञान देने के लिए आये थे, मनुष्य जीवन का उद्देश्य बताने के लिए आये थे और शान्ति देने के लिए आये थे और आगे बढ़ाने के लिए आये थे। और ये कमबख्त ऐसे बेवकूफ हैं कि अपने दैनिक जीवन की जो छोटी- मोटी सी आवश्यकताएँ हैं, समस्याएँ हैं, जिनको कि आदमी अपनी अकल को सही रख करके आसानी से पूरी कर सकता है, समस्याएँ हल कर सकता है, उसको हमसे माँगता है। ये आदमी बड़े खराब हैं। भगवान् नाराज हो गये और उन्होंने अपना बिस्तर उठाया, अपना सामान उठाया, अटैची उठायी और चलने लगे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/guru3/shudrahumshurdtamhum.2

👉 आत्मचिंतन के क्षण 17 May 2016



🔵 स्वयं उन्नति करना, सदाचारी होना काफी नहीं, दूसरों को भी ऐसी ही सुविधा मिले इसके लिए प्रयत्नशील रहना भी आवश्यक है। जो इस ओर से उदासीन है, वे वस्तुतः अपराधी न दीखते हुए भी अपराधी है।

🔴 हम ऊपरी आडम्बर देखकर किसी गलत व्यक्ति को आदर देकर दुष्प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करने के दोषी बन जाते हैं। इसके विपरीत यदि हमारी आदर बुद्धि विवेकपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करे तो कुमार्ग पर चलने वाले कितने ही कदमों को रोक कर उन्हें नई दिशा दी जा सकती है और इस प्रकार समाज के अवाँछनीय प्रवाह को बहुत कुछ रोका जा सकता है।

🔵 जिसने अनीति के मार्ग पर चलकर धन कमाया, उनकी वह कमाई चोरी, बीमारी, विलासिता, मुकदमा, नशा, रिश्वत, व्यभिचार आदि बुरे मार्गों में खर्च होती देखी गई है। जैसी आई थी, वैसे ही चली जाती है। पश्चाताप, पाप और निन्दा का ऐसा उपहार अंततः वह छोड़ जाती है, जिसे देखकर वह कुमार्गगामी अपनी नासमझी पर दुःख ही अनुभव करता रहता है।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य


👉 जानवर भी सिखाते है प्यार की भाषा



हर व्यक्ति के जीवन मे, उसके रिश्तो मे कभी न कभी उतार-चढाव अवश्य आते है। कुछ लोग अपने प्रेम, धैर्य व समझदारी से हर रिश्ते को आसानी से संजो लेते हैँ, वही कुछ लोग रिश्तोँ व प्यार मे खरे उतरने मे नाकाम हो जाते है। अगर आप भी रिश्तो को सम्भालने मे असमर्थ महसूस करते है तो एक बार अपने पालतू जानवर की ओर नजर घुमाकर देखिए। वह भी आपको प्यार का पाठ पढाएंगे। जरूरी नही है कि आप प्यार की भाषा सीखने के लिए किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ के कमरे मे घंटो बिताएँ। आप चाहे तो इन पालतू जानवरो से भी बहुत कुछ सीख सकते है !

🔴 शर्तो मे रिश्ता नही

🔵 प्रेम व रिश्ते कभी भी शर्तो के आधार पर नही बनते। जिन रिश्तो मे शर्ते होती है, उनका लम्बे समय तक टिकना बेहद ही मुश्किल होता है। आपके पालतू जानवर भी जब आपको प्रेम देते है या आपके लिए कोई कार्य करते है तो उसके पीछे उनका कोई मकसद या शर्त नही होती। इतना ही नही, वह अपने फायदे के लिए न तो आपको धोखा देते है और न ही झूठ बोलते है। एक बार सोच कर देखिए कि यदि आपके रिश्ते भी इतने ही पाक हो तो वह आपको कितना सुकून पहुंचाएंगे।

🔴 सीखे माफ करना

🔵 दुनिया मे ऐसे बहुत कम मनुष्य ही है जो आसानी से दूसरो को माफ कर पाते है। गलतियाँ सभी से होती है, इसलिए उन्हे माफ करना भी सीखेँ। जिस मनुष्य मे क्षमा करने का गुण नही है तो वह दूसरो का नही बल्कि खुद का जीवन ही बेहद कठिन बना लेता है। लेकिन जानवर ऐसे नही होते। अगर आप कभी अपने पालतू जानवर को डांट भी दे तो भी वह आपसे गुस्सा नही होते बल्कि वह लौटकर आपके पास आते है और आपको बेशुमार प्यार करते हैँ।

🔴 समय से सीचे प्रेम

🔵 आपने कभी नोटिस किया है कि जब भी आप घर पर होते है तो आपके प्यारे पालतू आपको एक पल के लिए भी अकेला नही छोडते। किचन से लेकर ड्राइंग रूम यहाँ तक कि बेडरूम मे भी अक्सर वह आपके साथ खेल रहे होते है। चाहे आप परेशान हो या खुश, वह आपके साथ हर फीलिंग शेयर करते है। इतना ही नही, उनके साथ समय बिताकर आप अपनी परेशानी भूलकर एकदम फ्रेश हो जाते है। लेकिन रिश्तो को समय देने के लिए आपके पास वक्त नही होता। एक बात गांठ बान्ध ले कि जब तक आप अपने रिश्ते रूपी पौधे को समय व प्रेम की खाद से नही सीचेंगे तो वह कभी भी मजबूत पेड नही बनेगा।

🔴 रहे रियल

🔵 मनुष्य अपना जीवन कई मुखौटो के साथ जीता है, फिर चाहे बात घर की हो या बाहर की। हर जगह के लिए हमारे पास एक मुखौटा है। मुखौटो के साथ जीवन जीते हुए हम अपने वास्तविक चेहरे को ही नही पहचान पाते। लेकिन जानवर हमेशा रियल ही होते हैँ। वह जगह, लोग और अपनी सुविधा के अनुसार अपना व्यक्तित्व व व्यवहार नही बदलते। एक बार आप भी अपने रिलेशनशिप मे रियल होकर देखिए। यकीनन आपको प्यार की एक नई परिभाषा देखने को मिलेगी और आप पहले से काफी खुश रहना सीख जाएंगे।

प्रभु से प्रार्थना (Kavita)

प्रभु जीवन ज्योति जगादे! घट घट बासी! सभी घटों में, निर्मल गंगाजल हो। हे बलशाही! तन तन में, प्रतिभापित तेरा बल हो।। अहे सच्चिदानन्द! बह...