शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

👉 गुरु बिन सत्पथ कौन दिखाय।

🔷 गुरु बिन ज्ञान नहीं मिल पाता।
भला बुरा कुछ  समझ न आता ।
माटी  कंचन की कीमत  भी ।
गुरु बिन समझ न आय।
गुरु बिन सत्पथ कौन दिखाय ।  

🔶 दोष दुर्गुणों ने जकड़ा है।
पाप ताप ने भी पकड़ा है।
दया धरम सब भुल चुके है।
नेक करम न सुभाय।
गुरु बिन सत्पथ कौन दिखाय ।

🔷 मनुज विकल हो तडप रहा है।
अगणित कष्ट भी सबने  सहा है।
दुष्ट दनुज का दंभ मिटाने ,
तुम बिन कौन  सहाय ।
गुरु बिन सत्पथ कौन दिखाय ।  

🔶 हे प्रभू पथ से भटक चुके है।
मंजिल तक ना पहुच सके  है।
पर पीडा मे रमे सभी  है।
आचरण हुए दुःखदाय।
गुरु बिन सत्पथ कौन दिखाय ।

🔷 कथनी करनी भिन्न हुआ  है।
पाखंड से मन खिन्न हुआ है।
आचरण हमारे ठीक नही है।
सद्बुद्धि सबमे आए।
गुरु बिन सत्पथ कौन दिखाय ।

🔶 दरश दो प्रभू राह दिखाओ।
कष्ट हरो अब मार्ग बताओ ।
तिमिर निशा से त्राण  दिलाओ।
सही राह  चल पाए।
गुरु बिन सत्पथ कौन दिखाय ।

👉 इतनी शक्ति हमे दो गुरुवर

🔷 इतनी शक्ति हमे दो गुरुवर, अनुरुप तेरे हो  जायें।
समय आज है गुरु पर्व का,आओ यही  संकल्प जगाये।

🔶 गहन अन्धेरा छाया जग मे,चहुँ दिशि हाहाकार है।
राह नहीं कहीं भी दिखता,लगे की अपनी  हार है।
ज्ञान प्रकाश फैलाओ प्रभू जी ,सत्पथ पर  हम चल पायें ।
इतनी शक्ति हमे दो गुरुवर,अनुरुप तेरे हो  जायें।

🔷 तुम्ही हो ब्रह्मा विष्णु तुम्ही हो,जग के पालनहार हो।
डूबती जग के नैया के प्रभू,तुम ही खेवन हार हो।
बीच भॅवर  से पार निकालो,नहीं कहीं कोई डूब जाए।
इतनी शक्ति हमे दो गुरुवर,अनुरुप तेरे हो  जायें।

🔶 शिष्यों को शक्ति देकर ही,जग मे बहाई ज्ञान की धारा।
हर युग मे ही तुने उबारा,नयी दिशा दे जग को सुधारा।
दया दरश तुम करो प्रभू अब,पुनः  नया संसार बनाएं।
इतनी  शक्ति हमे दो गुरुवर,अनुरुप तेरे हो  जायें।

🔷 जब जब धर्म की हानि हुई है,मानवता को कष्ट हुआ है।
तब तब गुरु ने ज्ञान शक्ति से,नयी सृष्टि का सृजन  किया है।
अबकी बार उबारो प्रभू जी,सुखी सारा संसार हो जाये।
इतनी शक्ति हमे दो गुरुवर,अनुरुप तेरे हो  जायें।

👉 बुरी आदत:-

एक अमीर आदमी अपने बेटे की किसी बुरी आदत से बहुत परेशान था। वह जब भी बेटे से आदत छोड़ने को कहते तो एक ही जवाब मिलता, “अभी मैं इतना छोटा ह...