बुधवार, 16 मार्च 2022

👉 आत्मचिंतन के क्षण 16 March 2022

ओजस्वी ऐसे ही व्यक्ति कहे जाते हैं, जिन्हें पराक्रम प्रदर्शित करने में संतोष और गौरव अनुभव होता है, जिन्हें आलसी रहने में लज्जा का अनुभव होता है, जिन्हें अपाहिज, अकर्मण्यों की तरह सुस्ती में पड़े रहना अत्यन्त कष्टकारक लगता है, सक्रियता अपनाये रहने में, कर्मनिष्ष्ठा के प्रति तत्परता बनाये रहने में जिन्हें आनन्द आता है।

अनीति को देखते हुए भी चुप बैठे रहना, उपेक्षा करना, आँखों पर पर्दा डाल देना, जीवित मृतक का चिह्न है। जो उसका समर्थन करते हैं, वे प्रकारान्तर से स्वयं ही दुष्कर्मकर्त्ता हैं। स्वयं न करना, किन्तु दूसरों के दुष्ट कर्मों में सहायता, समर्थन, प्रोत्साहन, पथ-प्रदर्शन करना एक प्रकार से पाप करना ही है। इन दोनों ही तरीकों से दुष्टता का अभिवर्धन होता है।

घड़ी पास में होने पर भी जो समय के प्रति लापरवाही करते हैं, समयबद्ध जीवनक्रम नहीं अपनाते, उन्हें विकसित व्यक्तित्व का स्वामी नहीं कहा जा सकता। घड़ी कोई गहना नहीं है। उसे पहनकर भी जीवन में उसका कोई  प्रभाव  परिलक्षित नहीं होने दिया जाता तो यह गर्व की नहीं, शर्म की बात है। समय की अवज्ञा वैसे भी हेय है, फिर समय-निष्ठा का प्रतीक चिह्न (घड़ी) धारण करने के बाद यह अवज्ञा तो एक अपराध ही है।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

शांतिकुंज की गतिविधियों से जुड़ने के लिए 
Shantikunj WhatsApp 8439014110 

👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 24 Aug 2026

शांतिकुंज हरिद्वार के आधिकारिक डिजिटल परिवार से जुड़े रहें। आध्यात्मिक चिंतन, प्रेरणादायी संदेश, आधिकारिक सूचनाएँ एवं नवीनतम अपडेट प्राप्त...