गुरुवार, 26 अक्तूबर 2017

👉 अपने ब्राह्मण एवं संत को जिन्दा कीजिए (भाग 4)

🔴 एक प्रयोग वाणी के संयम का हम सुनाते हैं आपको। हम चाहते थे कि हम मौन धारण कर लें तथा बैखरी वाणी का प्रयोग कम करें। हमने जितना व्याख्यान दिया है, दुनिया में शायद ही किसी व्यक्ति ने व्याख्यान दिये होंगे। हमारे व्याख्यानों में लोगों के कायाकल्प हो गये जैसे रामकृष्ण परमहंस के व्याख्यान से हुआ था। लेकिन जो लोग रीछ का तमाशा, रीछ का व्याख्यान सुनने आये, उनको कोई फायदा नहीं हुआ। जिन लोगों को हम व्याख्यान देते हैं, उसे सूँघकर जब देखते हैं, चखकर के देखते हैं कि आदमी कैसा है? घटिया है या वजनदार? तो वे हमें छोटे-छोटे आदमी घटिया आदमी दिखाई पड़ते हैं। हमें वजनदार आदमी दिखाई नहीं पड़ते हैं। वजनदार आदमी माने सिद्धान्तों के आदमी। सिद्धान्तों को सुनने वाले, मानने वाले, उस पर चलने वाले, सिद्धान्तों को जीवन में उतारने वाले कोई नहीं दिखाई पड़ते हैं।
      
🔵 लोगों पर गुस्सा न करके अपने पर गुस्सा न करूँ तो क्या करूँ? आपको मालूम है, जब आदमी मरने को होता है तो बहुत-से आदमी मिलने आते हैं। बहुत-सी शक्ति खर्च होती है। कोई कहता है ताऊ जी अच्छे हैं, कोई कहता है कि हमें आशीर्वाद दे दीजिये। इससे बातें करने में बहुत शक्ति खर्च होती है। इसमें भीतरी शक्ति बेहद खर्च होती है इसलिए हमने विचार किया है हम मिलना बन्द कर देंगे। हम अपनी वैखरी वाणी को दूसरे काम में खर्च करेंगे। वैखरी वाणी कम हो जाएगी, तब पश्यन्ति वाणी, मध्यमा वाणी का उपयोग करेंगे ताकि हम ज्यादा काम कर सकें? बिना बातचीत किये ही ज्यादा काम कर सकते हैं तथा वातावरण को गर्म कर सकते हैं। बेटे! अरविन्द घोष ने, महर्षि रमण ने इस प्रकार का प्रयोग किया था और सारा हिन्दुस्तान गर्म हो गया था।

🔴 बैखरी वाणी के माध्यम से अनावश्यक शक्तियाँ खर्च होती चली जाती हैं। इसलिए मैंने विचार किया कि अब इसका खर्च कम करेंगे। भगवान की शक्ति बहुत है, अबकी बार मैंने प्रयोग किया। अब बोलने की बात कम करता जाऊँगा। इस काम में समय को कम खर्च करता जाऊँगा और लोगों से बातें कम करता जाऊँगा। कारण, अधिकांश लोग अपनी राम कहानी लेकर आते हैं। अनावश्यक भीड़ आ जाती है और कहती है कि हमारा मन नहीं लगता, ध्यान नहीं लगता। बेकार की बातें लोग करते हैं, यह नहीं कि मतलब की बातें करें। बेकार की बातें करने में अब हम समय खर्च नहीं करेंगे। वाणी से बात नहीं होगी तो क्या आप निष्ठुर हो जाएँगे। नहीं बेटे, हमने ब्राह्मण के बाद सन्त के रूप में कदम बढ़ाया है। सन्त उसे कहते हैं, जिसका मन करुणा से लबालब भरा हुआ होता है। जो दाढ़ी बढ़ा लेता है, रँगा हुआ कपड़ा पहन लेता है, ध्यान कर लेता है, उसे सन्त नहीं कहते हैं। करुणा से भरा हुआ व्यक्ति ही सन्त कहलाता है। जब तक हम हैं तब तक हम समाज के लिए काम करते रहेंगे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)

👉 Don’t run away from problems: Face them

🔶 Very often it is observed that people try to avoid or run away from pressing problems, instead of finding solutions to them. The amount of time that we waste in searching the modes and methods of escaping from a problem is much more than what is required in finding a solution to it. In fact, we should cultivate foresight in anticipating problems, big or small, relating to our home or job and should also search for and keep handy possible solutions. When a problem does crop up, we should develop courage to face it. If your inner-self says ‘I can overcome this problem’, you have already won half the battle.

🔷 Every person feels that his / her problem is far more severe than that of others whereas this may not be true. People are often seized by the negative thought ‘What sins have I committed that I am not getting rid of my problems?’ Thus they waste all their time in blaming circumstances or fate for their problems. Have you ever calmly thought: what could be the real cause of these problems? Accept it or not, all your problems have been generated by your own unorganized actions, lack of farsightedness in planning, dearth of practicality and wrong assessment of your own strengths.

🔶 Always remember that once you firmly resolve to find a solution to the impending problem, the whole scenario and the concerned people would change. The circumstances or God do not help a person who runs away from the problems instead of facing them boldly and wisely. Therefore, don’t run away from problems; face them.

🌹 Poojya Gurudev Pandit Sriram Sharma Acharya

👉 चालीस दिन की गायत्री साधना (भाग 1)

🔷 गायत्री मंत्र के द्वारा जीवन की प्रत्येक दशा में आश्चर्यजनक मनोवाञ्छा फल किस प्रकार प्राप्त हुए हैं और होते हैं। यह मंत्र अपनी आश्चर्यजनक शक्तियों के कारण ही हिन्दू धर्म जैसे वैज्ञानिक धर्म में प्रमुख स्थान प्राप्त कर सका है। गंगा, गीता , गौ, गायत्री, गोविन्द, यह पाँच हिन्दू धर्म के केन्द्र हैं। गुरु शिष्य की वैदिक दीक्षा गायत्री मंत्र द्वारा ही होती है।
  
🔶 नित्य प्रति की साधारण साधना और सवालक्ष अनुष्ठान की विधियाँ पिछले अंकों में पाठक पढ़ चुके हैं। इस अंक में चालीस दिन की एक तीसरी साधना उपस्थित की जा रही है। शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से इस साधना को आरम्भ करना चाहिये। साधक को निम्न नियमों का पालन करना उचित है (1) ब्रह्मचर्य से रहे (2) शय्या पर न शयन करे (3) अन्न का आहार केवल एक समय करें (4) सेंधा नमक और कालीमिर्च के अतिरिक्त अन्य सब मसाले त्याग दें (5) लकड़ी के खड़ाऊ या चट्टी पहने, बिना बिछाये हुए, जमीन पर न बैठे। इन पाँच नियमों का पालन करते हुए गायत्री की उपासना करनी चाहिये।

🔷 प्रातःकाल सूर्योदय से कम से कम एक घंटा पूर्व उठकर शौच स्नान से निवृत्त होकर पूर्वाभिमुख होकर कुश आसन पर किसी स्वच्छ एकान्त स्थान में जप के लिये बैठना चाहिये। जल का भरा हुआ पात्र पास में रखा रहे। घी का दीपक तथा धूप बत्ती जलाकर दाहिनी ओर रख लेनी चाहिए। प्राणायाम तथा ध्यान उसी प्रकार करना चाहिये जैसा कि अक्टूबर के अंक में सवालक्ष अनुष्ठान के संबंध में बताया गया है। इसके बाद तुलसी की माला से जप आरम्भ करना चाहिए। एक सौ आठ मन्त्रों की माला अट्ठाईस बार नित्य जपनी चाहिये। इस प्रकार प्रतिदिन 3024 मंत्र होते हैं। एक मंत्र आरंभ में और एक अन्त में दो मंत्र नियत मालाओं के अतिरिक्त अधिक जपने चाहिये। इस प्रकार 40 दिन में सवालाख मंत्र पूरे हो जाते हैं।

🔶 गायत्री मंत्र में ऐसा उल्लेख है कि ब्राह्मण को तीन प्रणव युक्त, क्षत्रिय को दो प्रणव युक्त, वैश्य को एक प्रणव युक्त मंत्र जपना चाहिए। गायत्री में सब से प्रथम अक्षर है उसे ब्राह्मण तीन बार क्षत्रिय दो बार और वैश्य एक बार उच्चारण करें। तदुपरान्त ‘भूर्भुवः स्वः तत्सवितु... “ आगे का मन्त्र पढ़ें। इस रीति से मन्त्र की शक्ति और भी अधिक बढ़ जाती है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 अखण्ड ज्योति- दिसम्बर 1944 पृष्ठ 14
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1944/December/v1.14

👉 आज का सद्चिंतन 26 Oct 2017


👉 प्रेरणादायक प्रसंग 26 Oct 2017

👉 यह भी नहीं रहने वाला 🙏🌹

एक साधु देश में यात्रा के लिए पैदल निकला हुआ था। एक बार रात हो जाने पर वह एक गाँव में आनंद नाम के व्यक्ति के दरवाजे पर रुका। आनंद ने साध...