गुरुवार, 14 जून 2018

👉 शिखा और सूत्र

🔶 मित्रो ! पुलिस का सिपाही अपना सिम्बाल पहने रहता है, उसके कमर में एक पेटी बँधी रहती है और उसके ऊपर लगा रहता है एक पीतल का बिल्ला। उस पीतल के बिल्ले पर क्या लिखा रहता है? यू.पी.पी. लिखा रहता है। पहले अँग्रेजी में लिखा रहता था और अब हिन्दी में लिखा रहता है। उत्तर प्रदेश पुलिस- उ.प्र.पु.। मध्यप्रदेश में- म.प्र.पु. लिखा रहता है। पीतल का बिल्ला न हो किसी के पास तो समझ लीजिए कि वह सिपाही नहीं है और कमर में पेटी बँधी हुई न हो तो समझ लीजिए कि वह पुलिस का सिपाही नहीं है। सिपाही को कमर में पेटी बाँधनी चाहिए।

🔷 जब कभी किसी का फौज में कोर्टमार्शल होता है तो सबसे पहला यह काम किया जाता है कि उसकी पेटी उतार ली जाती है, उसका बिल्ला उतार लिया जाता है उसको क्रिमिनल मान लिया जाता है तथा उसको लाइन में खड़ा किया जाता है फिर उसका कोर्टमार्शल किया जाता है और यह कहा जाता है तुम हमारी इज्जत मत खराब करो। पेटी की इज्जत-राष्ट की इज्जत है। तुमने ऐसे खराब काम किए हैं, इसलिए सबसे पहले तुमको यह सजा दी जाएगी कि तुम्हारी पेटी और तुम्हारा बिल्ला हम जब्त कर लेते है। पुलिस में भी यही होता है और फौज में भी यही होता है।

🔶 हमारा बिल्ला जब्त किया या नहीं किया, हम पुलिस के सिपाही हैं कि नहीं, हम फौज के सिपाही हैं कि नहीं, हम हिन्दू धर्म के सिपाही हैं कि नहीं, हम हिन्दू धर्म के दीक्षित हैं कि नहीं, इसकी पहचान आपके शिखा और सूत्र (जनेऊ) से होती है। अगर आप हिन्दु धर्म में दीक्षित हैं तो लाइए वह निशान आपके कंधे पर 'यू.पी.पी. लिखा हुआ है कि नहीं और कमर में पेटी बँधी हुई हैं कि नहीं और अगर आपकी पेटी छीन ली किसी ने तो आपको यह कहना पड़ेगा कि पुलिस में से हमें बर्खास्त कर दिया गया-फौज में से बर्खास्त कर दिया गया और हमारा कोर्टमार्शल किया गया। अगर आप का बिल्ला छीन लिया गया, पेटी छीन ली गई हो तो फिर इसका मतलब यह होगा कि आपको हिन्दू धर्म में से बर्खास्त कर दिया गया। हिन्दू धर्म से कोई और धर्म होगा आपका।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 वांङमय-68-पृष्ठ 2.118

👉 प्रेरणादायक प्रसंग 14 June 2018


👉 आज का सद्चिंतन 14 June 2018


👉 आत्म-मैत्री की स्थापना

🔷 आत्म-मैत्री का भाव स्थापित करने के लिये मनुष्य को पुनः शिक्षा की आवश्यकता होती है। पहले तो अपनी महानता का भाव छोड़ना पड़ता है। समाज में बड़े कहे जाने की इच्छा सरलता से नष्ट नहीं होती। बहुत से व्यक्ति बड़े ही विनीत और नम्र बनते हैं। वे अपने आपको सब की पदधूल कहते हैं। ऐसे व्यक्ति बड़े अभिमानी होते हैं और उनका नम्र बनने का दिखावा ढोंग मात्र होता है। दूसरे को इस प्रकार अपने वश में किया जाता है और उसके ऊपर अपना प्रभुत्व स्थापित किया जाता है। सच्चे मन से महत्वाकाँक्षा का त्याग वही करता है जो सब प्रकार की असाधारणता अपने जीवन से निकाल डालता है।

🔶 जो व्यक्ति अपने आपको सामान्य व्यक्ति मानने लगता है वह नैतिकता में नीचे दिखाई देने वाले व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति का भाव रखता है। वह उनकी भूलों को क्षम्य समझता है। वह जब बाहरी जगत् में प्रकाशित अनेक भावों को क्षम्य मानने लगता है तो वह अपने दलित भावों को भी उदार दृष्टि से देखने लगता है। दूसरों के दोषों से घृणा का भाव हट जाने से अपने दोषों से भी घृणा का भाव हट जाता है। फिर उसके मन के भीतर के दलित भाव चेतना के समक्ष आने लगते हैं, और जैसे-जैसे उसका बाहरी जगत से साम्य स्थापित होता जाता है, उसके आन्तरिक मन से भी साम्य स्थापित हो जाता है। वह अपने भीतरी मन से मित्रता स्थापित करने में समर्थ होता है।

🔷 आंतरिक समता अथवा एकत्व और बाह्य समता एक दूसरे के सापेक्ष हैं, मनुष्य अपने आपको सुधार कर अपना समाज से सम्बन्ध सुधार सकता है और समाज से सम्बन्ध सुधारने से अपने आप से सम्बन्ध सुधार सकता है। वास्तव में वाह्य और आन्तरिक जगत एक ही पदार्थ के दो रूप हैं। मन और संसार एक दूसरे के सापेक्ष हैं। जैसा मनुष्य का मन होता है उसका संसार भी वैसा ही होता है।

🔶 हमारी नादानी ही हमें अपना तथा संसार का शत्रु बनाती है और विचार की कुशलता दोनों प्रकार की कहानियों का अन्त कर देती है।

📖 अखण्ड ज्योति फरवरी 1956 पृष्ठ 12
http://literature.awgp.org/hindi/akhandjyoti/1956/February/v1.12

👉 उपकार किस पर करे?

🔷 जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर। देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे तभी शेर शेरनी आये बकरी को देख लाल पीले होकर हमला करता उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते।

🔶 अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो। अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी।

🔷 यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है। चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करता हूँ चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार।

🔶 चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी चूहों के बच्चों ने उसके पंख कुतर डाले थे। चील ने यह घटना बकरी को सुनाई तुमने भी उपकार किया और मैंने भी फिर यह फल अलग क्यों?

🔷 बकरी हंसी फिर गंभीरता से कहा

🔶 उपकार भी शेर जैसो पर किया जाए चूहों पर नही। चूहों  (कायर) हमेशा उपकार को स्मरण नही रखेंगे वो तो भूलना बहादुरी समझते है और शेर(बहादुर )उपकार कभी नही भूलेंगे।

👉 बुरी आदत:-

एक अमीर आदमी अपने बेटे की किसी बुरी आदत से बहुत परेशान था। वह जब भी बेटे से आदत छोड़ने को कहते तो एक ही जवाब मिलता, “अभी मैं इतना छोटा ह...