आत्मिक मार्ग की विभूतियाँ महान् हैं। शरीर को सुख देने वाले भौतिक लाभ उन आत्मिक लाभों की तुलना में अत्यन्त ही तुच्छ और अस्थिर हैं। पर आत्मिक लाभों की महानता और श्रेष्ठता की परख केवल विवेक की कसौटी पर हो सकती हैं। अविवेक पूर्ण स्थूल दृष्टि में तो वह घाटे का मैदा ही प्रतीत होता हैं। क्योंकि मौज मजा छोड़ कर, स्वार्थ और कमाई को घटाकर इसमें तप, त्याग, संयम की प्रक्रिया करके मनोनिग्रह का रूखा मार्ग अपनाना पड़ता हैं। ऐसे नीरस देखने वाले और हानिकर लगने वाले मार्ग पर मोटी बुद्धि के लोग चलने को तैयार नहीं होते। यही कारण हैं कि इस संसार के अधिकांश मनुष्य भौतिक दृष्टिकोण के होते हैं। शरीर को, शरीर के लाभों को ही वे सब कुछ समझते है। आत्मा उनके लिए एक उपेक्षित वस्तु हैं। उसके लिए भी कुछ करना चाहिए ऐसा कभी कभी कुछ सोचते तो हैं, कुछ करने की इच्छा भी करते हैं, पर बन कुछ नहीं पड़ता। क्योंकि लक्ष शरीर सुख जो हैं। तृष्णा और वासना की पूर्ति में ही अपनी हित दिखता हैं। ऐसी दशा में शारीरिक प्रवृत्तियों के घेरे में अपनी सारी विचारधारा और कार्य पद्धति भ्रमण करती रहे तो उसमें आश्चर्य को क्या बात हैं?
वस्तुस्थिति इससे सर्वथा भिन्न हैं। आत्मिक क्षेत्र में जो लाभ, सुख एवं आनन्द हैं उसका मूल्य और मूल्य, वासना एवं तृष्णा के थोड़े, अनिश्चित, अस्थिर तथा जीवन को निस्तेज, निष्प्रभ, निरर्थक बना देने वाले तुच्छ सुखों की अपेक्षा अत्यधिक हैं। पर उसका मूल्यांकन करने के लिए थोड़ी उच्चकोटि की दूरदर्शिता पूर्ण विवेक बुद्धि की आवश्यकता होती हैं। यदि उसका अभाव रहा तो घटिया दृष्टि से सोचने और घटिया काम करने की बार क्रोध में हो बहुमूल्य जाहन की समाप्ति होगी। पर यदि विवेकशीलता जागृत हो गई और सारी वस्तु स्थिति पर विचार करके जीवन यापन जैसे महत्त्वपूर्ण विषय पर कुछ सारगर्भित निर्णय करने की आकांक्षा जगी तो वह विचारधारा धीरे धीरे हमें वहीं पहुँचा देगी जहाँ संसार के सभी महापुरुष पहुँचे हैं।
जब हमारा बच्चा खेलकूद में मस्त रहकर पढ़ना लिखना छोड़ने लगता हैं तब हम उसे डाँटते और रोकते हैं। उसे पढ़ाई के लाभ और मनोरंजन की व्यर्थता समझाते हैं। पर खेद की बात है कि हम अपने ऊपर उस सिद्धान्त को लागू नहीं करते। वासना और तृष्णा ही हमारे लिए सब कुछ बनी हुई हैं। आत्मा की प्रगति से उपलब्ध होने वाले लाभों की हमें चिन्ता ही नहीं हैं। क्या यह उपेक्षा उस बालक की मूर्खता से कम हैं जो खेलकूद के लिए पढ़ाई छोड़ बैठता है?
✍️ परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति नवम्बर 1961
शांतिकुंज हरिद्वार के आधिकारिक डिजिटल परिवार से जुड़े रहें।
आध्यात्मिक चिंतन, प्रेरणादायी संदेश, आधिकारिक सूचनाएँ एवं नवीनतम अपडेट प्राप्त करने हेतु नीचे दिए गए आधिकारिक माध्यमों से जुड़ें।
Shantikunj Haridwar के आधिकारिक प्लेटफ़ॉर्म (Official Platforms):
👇👇👇👇
▶️ Official YouTube Channel
Shantikunj Rishi Chintan – AWGP
📢 Official WhatsApp Channel
📱 Official WhatsApp Number
8439014110
📸 Official Instagram
𝕏 Official X (Twitter)
✈️ Official Telegram
Shivir Permission:
Online Donation Link:
धन्यवाद 🙏
आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो।
Please 👍 Like | 🔄 Share | 🔔 Subscribe










