पिप्पलाद उवाच
महाभाग! न ते प्रश्न: केवलं दीपयत्यहो।
अध्यात्मतत्वज्ञानस्य सारतथ्यात्युतापि तु ॥२१॥
लोककल्याणकृच्चापि, श्रीष्यज्येनं तु ये जना:।
सत्यं ज्ञास्यन्ति यास्यन्ति श्रेयो मार्गेऽविपत्तया ॥२२॥
भवन्त: सर्व एतस्या: समस्यायास्तु कारणम्।
समाधानं च शृण्वन्तु सावधानेन चेतसा ॥२३॥
टीका- हे महाभाग! आपका प्रश्न न केवल अध्यात्म तत्वज्ञान के सार तथ्यों पर प्रकाश डालता है, वरन् लोक कल्याणकारी भी है। जो इस शंका समाधान को सुनेंगे, वे सभी सत्य को समझेंगे, विपत्ति से बचेंगे और श्रेय-पथ पर चल सकने में समर्थ होंगे। आप सब लोग इस समस्या का कारण और समाधान ध्यानपूर्वक सुनें ॥२१-२३॥
व्याख्या- महाप्राज्ञ पिप्पलाद प्रश्न की गम्भीरता को अनुभव करते हुए कहते हैं कि ऐसी जिज्ञासा का समाधान हर सुनने वाले को सत्य का बोध कराता है। वस्तुत: सुनते तो अनेक हैं पर वे अन्दर तक उसमें प्रवेश कर उसे जीवन में कहाँ उतार पाते हैं। सुनने वाले जिज्ञासु साधक वृत्ति के हों, जन कल्याण ही जिनका उद्देश्य हो, वे कथा श्रवण कर उसे सार्थक कर देते हैं।
.... क्रमशः जारी
✍🏻 श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 प्रज्ञा पुराण (भाग १) पृष्ठ 41
महाभाग! न ते प्रश्न: केवलं दीपयत्यहो।
अध्यात्मतत्वज्ञानस्य सारतथ्यात्युतापि तु ॥२१॥
लोककल्याणकृच्चापि, श्रीष्यज्येनं तु ये जना:।
सत्यं ज्ञास्यन्ति यास्यन्ति श्रेयो मार्गेऽविपत्तया ॥२२॥
भवन्त: सर्व एतस्या: समस्यायास्तु कारणम्।
समाधानं च शृण्वन्तु सावधानेन चेतसा ॥२३॥
टीका- हे महाभाग! आपका प्रश्न न केवल अध्यात्म तत्वज्ञान के सार तथ्यों पर प्रकाश डालता है, वरन् लोक कल्याणकारी भी है। जो इस शंका समाधान को सुनेंगे, वे सभी सत्य को समझेंगे, विपत्ति से बचेंगे और श्रेय-पथ पर चल सकने में समर्थ होंगे। आप सब लोग इस समस्या का कारण और समाधान ध्यानपूर्वक सुनें ॥२१-२३॥
व्याख्या- महाप्राज्ञ पिप्पलाद प्रश्न की गम्भीरता को अनुभव करते हुए कहते हैं कि ऐसी जिज्ञासा का समाधान हर सुनने वाले को सत्य का बोध कराता है। वस्तुत: सुनते तो अनेक हैं पर वे अन्दर तक उसमें प्रवेश कर उसे जीवन में कहाँ उतार पाते हैं। सुनने वाले जिज्ञासु साधक वृत्ति के हों, जन कल्याण ही जिनका उद्देश्य हो, वे कथा श्रवण कर उसे सार्थक कर देते हैं।
.... क्रमशः जारी
✍🏻 श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 प्रज्ञा पुराण (भाग १) पृष्ठ 41



















