गुरुवार, 7 सितंबर 2017

👉 23 साल की उम्र में जान देकर बचाई थीं 360 जिंदगियां, ऐसी थी 'ब्रेव डॉटर ऑफ इंडिया'

🔵 ये है, नीरजा भनोट। 5 सितंबर को इन्हें आतंकियों ने गोलियों से छलनी कर दिया था। इस बहादुर बेटी ने भारत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'अशोक चक्र' से नवाजा तो पाक ने तमगा-ए-इन्सानियत से। भारत सरकार ने नीरजा के नाम पर डाक टिकट भी जारी किया था। मोगा के गांव घलकलां के देशभगत पार्क में उसका एकमात्र स्टेच्यू स्थापित किया गया है। वहीं पर 16 फुट लंबा जहाज बनाया गया है।

🔴 चंडीगढ़ में आज के दिन 7 सितंबर 1964 को जन्मी नीरजा भनोट को उसके जन्मदिन से दो दिन पहले 5 सितंबर 1986 के दिन आतंकियों ने गोली मार दी थी, लेकिन दम तोड़ने से पहले इस बेटी ने 360 लोगों की जानें बचाई थी। 17 घंटे तक वह आतंकियों से जूझती रही। 5 सितंबर 1986 को पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट पर Pan Am 73 एयरलाइंस का प्लेन  हथियार बंद 4 आतंकवादियों हाईजैक कर लिया था।

🔵 आतंकवादी प्लेन को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे। लेकिन प्लेन में मौजूद फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट ने ऐसा नहीं होने दिया। उसने हिम्मत दिखाते हुए लोगों को बचा लिया, पर अपनी जान गंवा दी। नीरजा का बचपन मुम्बई में बीता। स्कूली शिक्षा बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से हुई और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली।

🔴 नीरजा को बचपन से ही प्लेन में बैठने और आकाश में उड़ने की इच्छा थी। नीरजा भनोट की शादी 1985 में हो गई थी, लेकिन दहेज के दबाव के कारण उनके रिश्तों में खटास आ गई। वे शादी के दो महीने बाद ही मुम्बई लौट आई थीं। 1986 में मॉडल के रूप में उन्होंने कई TV और प्रिंट ऐड करना शुरू कर दिए थे। शौक को पूरा करने के मकसद से नीरजा ने बाद में एयरलाइंस ज्वाइन कर ली।

🔵 नीरजा ने इसकी विशेष ट्रेनिंग ली कि हाईजैक के दौरान क्या करना चाहिए? तब मां ने जो कहा, उसे भी नहीं माना था नीरजा ने, ब‌ल्कि जवाब दिया था। नीरजा के इरादे स्पष्ट थे। 5 सितंबर को अमेरिकी एयरवेज का विमान पैन एम73, करीब  380 यात्री लेकर पाकिस्तान के करांची हवाई अड्डे पर पायलट का इंतजार कर रहा था। अचानक उसमें चार हथियारबंद आतंकवादी घुस गए और सभी यात्रियों को गन प्वांइट पर ले लिया।

🔴 आतंकियों ने पाक सरकार से पायलट भेजने की मांग की, ताकि वो विमान को अपने मन मुताबिक जगह पर ले जा सकें, पाक सरकार ने मना कर दिया। इससे भन्नाए आतंकियों ने विमान में बैठे अमेरिकी यात्रियों को मारने का फैसला कर लिया। वो अमेरिका के जरिए पाक सरकार पर दबाव बनाने की ताक में थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था इसी विमान की 23 साल की अकेली पतली-दुबली फ्लाइट अटेंडेंट उन पर भारी पड़ जाएगी।

🔵 आतंकियों ने गलती से उसी भारतीय लड़की को बुला लिया और विमान में बैठे सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठा करने को कहा। ताकि वो अमेरिकी नागरिकों को चुन-चुन कर मार सकें। लेकिन भारतीय वीरांगना ने दिन में आतंकियों की आंखों में धूल झोंक दिया। विमान में अमेरिकी यात्री बैठे हुए थे, पर एक भी आतंकियों के हवाले नहीं हुए। लड़की ने सबके पासपोर्ट छुपा लिए। यह जानकर आतंकी तिलमिला उठे।

🔴 तब आतंकी एक अंग्रेज को खींचकर विमान के गेट पर ले आए और गोली मारने की तैयारी करने लगे। लेकिन यहां भी लड़की ने अपने कार्यकुशलता का परिचय दिया और आतंकियों का ऐसा ‌दिमाग घूमाया कि उन्होंने उस ब्रिटिश को छोड़ दिया। आतंकी और पाक सरकार में लगातार खींचातानी चलती रही। इधर 380 डरे हुए लोगों में एक अकेली भारतीय लड़की डटी रही। लड़की ने 16 घंटे हिम्मत बांधे रखी।

अचानक उसे खयाल आया कि अब विमान का ईंधन खत्म होने वाला है। ऐसा हुआ तो विमान में अंधेरा छा जाएगा और ‌भागदौड़ मच जाएगी। जिसमें बेतहाशा खून बहेगा। लड़की ने फिर अपने भारतीय होने की पहचान दी। उसने तत्काल आतंकियों को खाने का पैकेट दिया और यात्रियों को आपातकालीन खिड़कियों के बारे में तेजी समझाया। तभी विमान का ईंधन खत्म हो गया। चारों तरफ अंधेरा छा गया।

🔴 इस बीच नीरजा ने मौका पाकर विमान के दरवाजे खोल दिए और यात्रियों ने प्लेन से नीचे कूदाना शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच दहशतगर्दों ने गोलियां दागना शुरू कर दी। मौका देखकर पाक कमांडो भी विमान के पास पहुंच गए। फिर दोनों तरफ से धुआंधार गोलीबारी के बीच लोग भागने लगे थे और नीरजा आतंकियों को छकाने में लगी थी। नीरजा ने आतंकियों को उलझाए रखा ताकि वो किसी को नुकसान न पहुंचा सकें और वो इसमें कामयाब भी रही।

सबके निकल जाने के बाद आखिर में जब वो विमान से निकलने लगी, तो अचानक उसे कुछ बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी। नीरजा ने रोते हुए बच्चों को छोड़कर भागना ठीक नहीं समझा। वो वापिस गई और बच्चों को ढूंढ निकाला। जैसे ही वह उन्हें लेकर एक आपातकालीन खिड़की ओर बढ़ी एक आतंकी उसके सामने आ खड़ा हुआ। नीरजा ने बच्चों को नीचे धकेल दिया और आतंकी ने नीरजा को गोलियों से छलनी कर दिया।

🔴 17 घंटे तक चले इस खून खराबे में अंततः 20 लोगों की जान चली गई और वो भारतीय वीरांगना भी शहीद हो गई। पाक की धरती पर ही दुनिया भर के 360 लोगों की जान बचाने वाली बहादुर बेटी नीरजा ​को पाकिस्तान भी सेल्यूट करता है। घटना के दो दिन बाद वो अपना 23वां जन्मदिन मनाने वाली थी। लेकिन सपने अधूरे रह गए। 2004 में इस बात का पता चला कि 5 सितंबर, 1986 में हुई उस भयावह घटना के पीछे लीबिया के चरमपंथियों का हाथ था।

बहादुर बेटी नीरजा भनोट के बलिदान को सलाम करते हुए बॉलीवुड में एक मूवी 'नीरजा' बनाई गई। इसमें नीरजा भनोट का किरदार सोनम कपूर ने निभाया। इंडस्ट्री के कई बड़े नामों समेत 200 कलाकारों ने फिल्म बनाने में सहयोग किया। मूवी को हाल ही में आईफा 2017 में बेस्ट मूवी का अवार्ड दिया गया। साथ ही मूवी को नेशनल अवार्ड से भी नवाजा गया था। नीरजा भनोट के नाम पर हर साल एक अवार्ड भी दिया जाता है।

👉 एक गणित का सूत्र

🔴 राजा ने एक सुंदर सा महल बनाया। और महल के मुख्य द्वार पर एक गणित का सूत्र  लिखवाया और घोषणा की इस सूत्र से यह द्वार खुल जाएगा और जो भी सूत्र को हल कर के द्वार खोलेगा में उसे अपना उत्तराधीकारी घोषित कर दूंगा.....

🔵 राज्य के बड़े बड़े गणितज्ञ आये और सूत्र देखकर लोट गए किसी को कुछ समझ नहीं आया.... आख़री तारीख आ चुकी।

🔴 उस दिन 3 लोग आये और कहने लगे हम इस सूत्र को हल कर देंगे उसमे 2 तो दूसरे राज्य के बड़े गणितज्ञ अपने साथ बहुत से पुराने गणित के सूत्रो की किताबो सहित आये लेकिन एक व्यक्ति जो साधक की तरह नजर आ रहा था सीधा साधा कुछ भी साथ नहीं लाया उसने कहा में बेठा हु यही पास में ध्यान कर रहा हु अगर पहले ये दोनों महाशय कोशिश कर के द्वार खोल दे तो मुझे कोई परेशानी नहीं।

🔵 पहले इन्हें मोका दिया जाए दोनों गहराई से सूत्र हल करने में लग गए लेकिन नहीं कर पाये और हार मान ली।

🔴 अंत में उस साधक को ध्यान से जगाया गया और कहा की आप सूत्र हल करिये आप का समय शुरू हो चुका हे साधक ने आँख खोली और सहज मुस्कान के साथ द्वार की और चला द्वार को धकेला और यह क्या द्वार खुल गया।

🔵 राजा ने साधक से पूछा आप ने  ऐसा  क्या किया साधक ने कहा जब में ध्यान में बेठा तो सबसे पहले अंतर्मन से आवाज आई की पहले चेक कर ले की सूत्र हे भी या नहीं
इसके बाद इसे हल करने की सोचना और मेने वही किया।

🔴 ऐसे ही कई बार जिंदगी में समस्या होती ही नहीं और हम विचारो में उसे इतनी बड़ी बना लेते हे की वह समस्या कभी हल न होने वाली है।

🔵 लेकिन हर समस्या का उचित इलाज आत्मा की आवाज है।

👉 प्रेरणादायक प्रसंग 7 Sep 2017


👉 आज का सद्चिंतन 7 Sep 2017


👉 जीवन के उतार-चढावों पर उद्विग्न न हों। (भाग 3)

🔵 अपनी वर्तमान स्थिति से विगत स्थिति की तुलना करने से क्या लाभ। अतीत काल की वह स्थिति जो वैभवपूर्ण थी, आज लौट कर नहीं आ सकती। हाँ उसकी तरह की स्थिति वर्तमान में बनाई अवश्य जा सकती है। किन्तु यह सम्भव तभी होगा, जब अतीत का रोना छोड़कर वर्तमान के अनुरूप साधनों का सहारा लेकर परिश्रम और पुरुषार्थ किया जाये। केवल अतीत को याद कर−करके दुःखी होने से कोई काम न बनेगा।

🔵 जब मनुष्य अपने वैभवपूर्ण अतीत का चिन्तन करके इस प्रकार सोचता रहता है तो उसके हृदय में एक हूक उठती रहती है—एक समय ऐसा था कि हमारा कारोबार जोरों से चलता था। लाखों रुपयों की आय थी। हजारों आदमी अधीनता में काम करते थे। बड़ी−सी कोठी और कई हवेलियाँ थीं। मोटर कार पर चलते थे। मन−माने ढँग से रहते और व्यय करते थे। लेकिन आज यह हाल है कि कारोबार बन्द हो गया है। आय का मार्ग नहीं रह गया। दूसरों की मातहती की नौबत आ गई है। कोठियाँ और हवेलियाँ बिक गईं। मोटर कार चली गई। हम एक गरीब आदमी बन गए। अब तो यह जीवन ही बेकार है। इस प्रकार का चिन्तन करना अपने जीवन में निराशा और दुःख को पाल लेना है।

🔴 यदि अतीत का चिन्तन ही करना है तो इस प्रकार करना चाहिए। हमने इस−इस प्रकार से अमुक−अमुक काम किए थे। जिससे इस−इस तरह की उन्नति हुई थी। उन्नति के इस मार्ग में इस−इस तरह के विघ्न आए थे। जिनको हमने इस नीति द्वारा दूर किया था। इस प्रकार का चिन्तन करने से मनुष्य का सफल स्वरूप ही सामने आता है और वह आगे उन्नति करने के लिए प्रेरणा पाता है। विचारों का प्रभाव मनुष्य के जीवन पर बड़ा गहरा पड़ता है। जो व्यक्ति अपनी अवनति और अनिश्चित भविष्य के विषय में ही सोचता रहता है, उसका जीवन चक्र प्रायः उसी प्रकार से घूमने लगता है। इसके विपरीत जो अपनी उन्नति और विकास का चिन्तन किया करता है, उसका भविष्य उज्ज्वल और भाग्य अनुकूलतापूर्वक निर्मित होता है।

🔵 मनुष्य की चिन्तन क्रिया बड़ी महत्वपूर्ण होती है। चिन्तन को यदि उपासना की संज्ञा दे दी जाए, तब भी अनुचित न होगा। जो लोग उपासना करते हैं, उन्हें अनुभव होगा कि जब वे अपना ध्यान परमात्मा में लगाते हैं तो अपने अन्दर एक विशेष प्रकार का प्रकाश और पुलक पाते हैं। उन्हें ऐसा लगता है, मानो परमात्मा की करुणा उनकी ओर आकर्षित हो रही है। यह कल्याणकारी अनुभव उस उपासना, उस चिन्तन अथवा उन विचारों का ही फल होता है, जिनके अन्तर्गत कल्याण का विश्वास प्रवाहित होता रहता है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 अखण्ड ज्योति जनवरी 1970 पृष्ठ 57
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1970/January/v1.57

👉 आत्मचिंतन के क्षण 7 Sep 2017

🔵 आत्म-निर्माण के कार्य में सत्संग निःसन्देह सहायक होता है किन्तु आज की परिस्थितियों में इस क्षेत्र में जो विडंबना फैली है, उससे लाभ के स्थान पर हानि अधिक है। सड़े-गले, औंधे-सीधे, रूढ़िवादी, भाग्यवादी, पलायनवादी विचार इन सत्संगों में मिलते हैं। फालतू लोग अपना समुदाय बढ़ाने के लिए सस्ते नुस्खे बताते रहते हैं या किसी देवी देवता के कौतूहल भरे चरित्र सुनाकर उनके सुनने मात्र से स्वर्ग, मुक्ति आदि मिलने की आशा बँधाते रहते हैं। ऐसा विडम्बनापूर्ण सत्संग किसी का क्या हित साधेगा?

🔴 आज सत्संग की आवश्यकता स्वाध्याय से ही पूरी करनी पड़ती है। जहाँ जीवन को प्रेरणाप्रद मार्गदर्शन कर सकने की दृष्टि से उपयुक्त सत्संग मिल सके, वहाँ जाने और लाभ उठाने का प्रयत्न अवश्य करना चाहिए। पर जहाँ व्यर्थ की विडम्बनाओं में समय बर्बाद किया जाता हो, वहाँ जाने में कुछ लाभ नहीं। आज की स्थिति में सरल सत्संग स्वाध्याय ही हो सकता है। आत्मबल बढ़ाने वाला, चरित्र को उज्ज्वल करने वाला, गुणकर्म, स्वभाव में प्रौढ़ता उत्पन्न करने वाला साहित्य उपलब्ध करके नियमित रूप से उसे पढ़ते रहने से भी घर बैठे सत्पुरुषों के साथ सत्संग का लाभ लेने की सुविधा मिल सकती है।

🔵  स्वाध्याय केवल पुस्तकें पढ़ने को ही नहीं कहते। उसका वास्तविक उद्देश्य आत्म-निरीक्षण के लिए प्रेरणा प्राप्त करना है। प्रत्येक मनुष्य को हर घड़ी अपने स्वयं के चरित्र का निरीक्षण करते रहना चाहिए कि उसका चरित्र पशु तुल्य है या सत्पुरुषों जैसा। आत्म-निरीक्षण की प्रणाली का नाम ही स्वाध्याय है। पूर्ण मानव बनने के सद् उद्देश्य से जिनने भी स्वाध्याय का अनुसरण किया है उनकी आत्मा अवश्यमेव परिष्कृत हुई है, उनकी महानता जागृत हुये बिना नहीं रही।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य