बुधवार, 9 नवंबर 2016

👉 प्रेरणादायक प्रसंग Prernadayak Prasang 10 Nov 2016


👉 आज का सद्चिंतन Aaj Ka Sadchintan 10 Nov 2016


👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 10 Nov 2016

🔴 आदर्शवादी जीवन जीने का-महानता के प्रगति पथ पर चलने का हर किसी को अवसर मिल सकता है, यदि वासना, तृष्णा पर अंकुश रखा जाय और श्रेष्ठता अभिवर्धन की साध को जीवन्त, ज्योतिर्मय बनाया जाय। यह अति सरल है व कठिन भी। सरल इन अर्थों में कि निर्वाह के साधन सरल हैं, वे महानता के मार्ग पर चलते हुए भी सहज ही उपलब्ध होते रह सकते हैं। कठिन इसलिए कि पशु प्रवृत्तियों से पिण्ड छुड़ाना अति साहस का काम है।

🔵 यह सोचना व्यर्थ है कि पारमार्थिक जीवन में हानि अधिक है। सच तो यह है कि पाप-पंक में फँसे रहने पर पग-पग पर, पल-पल पर जो आत्म-प्रताड़ना तथा बाहरी व्यथा-बाधाएँ सहनी पड़ती हैं। उनकी तुलना में दिव्य जीवन में आने वाली विपत्तियाँ नगण्य हैं। यदि कुछ हैं भी तो आदर्शों के लिए किये जाने वाले त्याग, बलिदान के फलस्वरूप मिलने वाले आत्म-संतोष, लोक-सम्मान एवं ईश्वरीय अनुग्रह की उपलब्धियों को देखते हुए अतीव नगण्य हैं।

🔴 यदि मनुष्यता को जीवित रहना है तो उसे एकता और आत्मीयता की दिशा में बढ़ना होगा। मतभेदों की दीवारें गिरानी पड़ेंगी तथा चिंतन और कर्तृत्व की एकरूपता प्रस्तुत कर सकने वाला राजमार्ग बनाना पड़ेगा। जीवन और मरण के बीच और कोई विकल्प नहीं। सद्भावपूर्वक निर्वाह करने या मर-कट कर नष्ट हो जाने के अतिरिक्त शान्ति का और कोई मार्ग नहीं। मतभेद जितने भी बने रहेंगे विनाश का असुर उतना ही भयावह होता चलेगा।

🌹 *पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

👉 अध्यात्म और प्रेम

🔴 “अध्यात्म में प्रेम का प्रमुख स्थान है पर यह प्रेम देश के प्रति, देश-वासियों के प्रति, देश के गौरव, उसकी महानता और जाति के सुख, दैवी आनन्द का, या अपने देशवासियों के प्रति आत्म-बलि देने, उसके कष्ट निवारण के लिए स्वयं कष्ट सहन करने, देश की स्वतन्त्रता के लिए अपना रक्त बहाने, जाति के जनकों के साथ-साथ मृत्यु का आलिंगन करने में, आनन्द की अनुभूति करने का हो।

🔵  व्यक्तिगत सुख का प्रेम नहीं। मातृ-भूमि के स्पर्श से शरीर के पुलकित होने का आनन्द हो और हिन्द महासागर से जो हवायें बहती हैं, उनके स्पर्श से भी वहीं अनुभूति हो। भारतीय पर्वत माला से बहने वाली नदियों से भी वही सुख प्राप्त हो। भारतीय भाषा, संगीत , कविता, परिचित दृश्य, स्रोत, आदतें, वेश-भूषा जीवनक्रम आदि भौतिक प्रेम के मूल हैं। अपने अतीत के प्रति गर्व, वर्तमान के प्रति दुःख और भविष्य के प्रति अनुराग उसकी शाखायें हैं।

🔴 आत्माहुति और आत्म-विस्मृति, महान सेवा, और देश के लिए महान सेवा, और देश के लिए अपार सहन शक्ति उसके फल हैं। और जो इसे जीवित रखता है, वह है देश में भगवान की, मातृ-भूमि की अनुभूति, माँ का दर्शन, माँ का ज्ञान, और उसका निरन्तर ध्यान एवं माँ की स्तुति तथा सेवा।”

🌹 -योगी अरविन्द
🌹 अखण्ड ज्योति अप्रैल 1964 पृष्ठ 1

👉 मैं क्या हूँ? What Am I? (भाग 24)

🌞 दूसरा अध्याय

🔴 अपने को प्रकाश केन्द्र अनुभव करने के लिए तर्कों से काम न चलेगा, क्योंकि हमारे तर्क बहुत ही लंगड़े और अन्धे हैं। तर्कों के सहारे यह नहीं सिद्घ हो सकता कि वास्तव में वही हमारा पिता है, जिसे पिताजी कहकर सम्बोधन करते हैं। इसलिए योगाभ्यास के दैवी अनुष्ठान में इस अपाहिज तर्क का बहिष्कार करना पड़ता है और धारणा, ध्यान एवं समाधि को अपनाना पड़ता है। आत्म-स्वरूप के अनुभव में यह तर्क-वितर्क बाधक न बनें इसलिए कुछ देर के लिए इन्हें विदा कर दो।

🔵  विश्वास रखो, इन पंक्तियों का लेखक तुम्हें भ्रम में फँसाने या कोई गलत हानिकारक साधन बताने नहीं जा रहा है। उसका निश्चित विश्वास है और वह शपथपूर्वक तुमसे कहता है कि हे मेरे ऊपर विश्वास रखने वाले साधक! यह ठीक रास्ता है। मेरा देखा हुआ है। आओ, पीछे-पीछे चले आओ, तुम्हें कहीं धकेला नहीं जायेगा, वरन् एक ठीक स्थान पर पहुँचा दिया जाएगा। साधन की विधि- बार-बार ध्यानावस्थित होकर मानस-लोक में प्रवेश करो। अपने को सूर्य समान प्रकाशवान सत्ता के रूप में देखो और अपना संसार अपने आप-पास घूमता हुआ अनुभव करो। इस अभ्यास को लगातार जारी रखो और इसे हृदय पट पर गहरा अंकित कर लो तथा इस श्रेणी पर पहुँच जाओ कि जब तुम कहो कि 'मैं' तब उसके साथ ही चित्त में चेतना, विचार, शक्ति और प्रतिभा सहित केन्द्र स्वरूप चित्र भी जाग उठे। संसार पर जब दृष्टि डालो, तो वह आत्म-सूर्य की परिक्रमा करता नजर आवे।

🔴 उपरोक्त आत्म-स्वरूप दर्शन के साधन में शीध्रता होने के लिए तुम्हें हम एक और विधि बताते हैं। ध्यान की दशा में होकर अपने ही नाम को बार-बार, धीरे-धीरे, गम्भीरता और इच्छापूर्वक जपते जाओ। इस अभ्यास से मन आत्म-स्वरूप पर एकाग्र होने लगता है। लार्ड टेनिसन ने अपनी आत्म-शक्ति को इसी उपाय से जगाया था। वे लिखते हैं-''इसी उपाय से हमने कुछ आत्म-ज्ञान प्राप्त किया है। अपनी वास्तविकता और अमरता को जाना है एवं अपनी चेतना के मूल स्रोत का अनुभव कर लिया है।''

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://literature.awgp.org/book/Main_Kya_Hun/v4.2

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 9 Nov 2016

🔴 अहंकार पर आधारित विश्वास पतन का द्वार खोलता है। भौतिकता के वशीभूत व्यक्ति संकीर्णता, स्वार्थपरता एवं अनुदारता के दलदल में फँस जाते हैं। अहंकार का आधार ही मनोविकार एवं भौतिक पदार्थ है। भोग-लिप्सा के सिवाय उसे कुछ दिखलाइ्र्र ही नहीं पड़ता। इसके अभिशाप से व्यक्ति दीन, दुःखी, असहाय तथा निष्प्राण होकर धरती पर भार स्वरूप बना रहता है। सभी अनर्थों की जड़ अहंकार जनित विश्वास ही है। अशान्ति, युद्ध, कलह और राग-द्वेष यहीं से उत्पन्न होते हैं।

🔵 गीता एक ऐसे समाज की कल्पना करती है, जिसमें प्रत्येक मानव को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार है। मनुष्य और मनुष्य के बीच धर्म, जाति, वर्ण, लिंग और धन की दीवारें नहीं हैं। प्रत्येक मानव अपने स्वभाव के अनुसार अनासक्त और निष्काम होकर मानव जाति की सेवा में लगा रहना अपना कर्त्तव्य समझता है तथा अकर्मण्यता, आलस्य और असुरता को त्याज्य मानता है। उसकी अपनी कामनाएँ नहीं हैं। समाज की प्रगति और संपन्नता ही उसकी प्रगति और संपन्नता है। इस प्रकार के समाज का निर्माण करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य है।

🔴 परिवार का संतुलन सही रखना हो तो मोह से बचते हुए कर्त्तव्य तक सीमित रहना होगा। परिवार के लोगों के प्रति असाधारण मोह ही उनका स्तर गिराने और अपने कर्त्तव्य च्युत होने का प्रधान कारण होता है। यदि परिजनों की उचित-अनुचित माँगों को, प्रसन्नता-अप्रसन्नता को महत्त्व न दिया जाय और विवेक दृष्टि रखते हुए उनके कल्याण एवं अपने कर्त्तव्य भर की बात सोची जाय तो प्रत्येक परिवार का स्तर ऊँचा रह सकता है और उसमें से नर-रत्नों के उत्पन्न होने का आधार बन सकता है।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 *हमारी युग निर्माण योजना (भाग 13)

🌹 युग-निर्माण योजना का शत-सूत्री कार्यक्रम

🔵 4. स्वाद की आदत छोड़ी जाय— अचार, मुरब्बे, सिरका, मिर्च, मसाले, खटाई, मीठा की अधिकता पेट खराब होने और रक्त को दूषित करने का कारण होती है। इन्हें छोड़ा जाय। हल्का-सा नमक और जरूरत हो तो थोड़ा धनिया, जीरा सुगन्ध के लिये लिया जा सकता है, पर अन्य मसाले तो छोड़ ही देने चाहिए। शरीर के लिये जितना नमक, शकर आवश्यक है उतना अन्न शाक आदि में पहले से ही मौजूद है।

🔴 बाहर से जो मिलावट की जाती है वह तो स्वाद के लिए है। हमें स्वाद छोड़ना चाहिये। अभ्यास के लिये कुछ दिन तो नमक मीठा बिलकुल ही छोड़ देना चाहिये और अस्वाद व्रत पालन करना चाहिये। आदत सुधर जाने पर हलका-सा नमक, नीबू, आंवला, अदरक, हरा धनिया, पोदीना आदि को भोजन में मिलाकर उसे स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। सूखे मसाले स्वास्थ्य के शत्रु ही माने जाने चाहिये। मीठा कम से कम लें। आवश्यकतानुसार गुड़ या शहद से काम चलायें।

🔵 5. शाक और फलों का अधिक प्रयोग— शाकाहार को भोजन में प्रमुख स्थान रहे। आधा या तिहाई अन्न पर्याप्त है। शेष भाग शाक, फल, दूध, छाछ आदि रहे। ऋतु-फल सस्ते भी होते हैं और अच्छे भी रहते हैं। आम, अमरूद, बेर, जामुन, शहतूत, पपीता, केला, ककड़ी, खीरा, तरबूजा आदि-आदि अपनी-अपनी फसलों पर काफी सस्ते रहते हैं। लौकी तोरई, परवल, टमाटर, पालक, मेथी आदि सुपाच्य शाकों की मात्रा सदा अधिक ही रखनी चाहिये।

🔴 गेहूं, चना आदि को अंकुरित करके खाया जाय तो उनसे बादाम जितना पोषक तत्व मिलेगा। उन्हें कच्चा हजम न किया जा सके तो उबाला, पकाया भी जा सकता है। अन्न, शाक और फलों के छिलकों में जीवन तत्व (विटामिन) बहुत रहता है, इसलिये आम, केला, पपीता आदि जिनका छिलका आवश्यक रूप से हटाना पड़े उन्हें छोड़कर शेष के छिलके खाये जाने ही ठीक हैं।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌿🌞     🌿🌞     🌿🌞

👉 युग बदल रहा है-हम भी बदलें

🔴 भगवान् की इच्छा युग परिवर्तन की व्यवस्था बना रही है। इसमें सहायक बनना ही वर्तमान युग में जीवित प्रबुद्ध आत्माओं के लिये सबसे बड़ी दूरदर्शिता है। अगले दिनों में पूँजी नामक वस्तु किसी व्यक्ति के पास नहीं रहने वाली है। धन एवं सम्पत्ति का स्वामित्व सरकार एवं समाज का होना सुनिश्चित है। हर व्यक्ति अपनी रोटी मेहनत करके कमायेगा और खायेगा। कोई चाहे तो इसे एक सुनिश्चित भविष्यवाणी की तरह नोट कर सकता है।

🔵 अगले दिनों इस तथ्य को अक्षरशः सत्य सिद्ध करेंगे। इसलिये वर्तमान युग के विचारशील लोगों से हमारा आग्रह पूर्वक निवेदन है कि वे पूँजी बढ़ाने, बेटे पोतों के लिये जायदादें इकट्ठी करने के गोरख-धंधे में न उलझें। राजा और जमींदारों को मिटते हमने अपनी आँखों देख लिया अब इन्हीं आँखों को व्यक्तिगत पूँजी को सार्वजनिक घोषित किया जाना देखने के लिए तैयार रहना चाहिए।

🔴 भले ही लोग सफल नहीं हो पा रहे हैं पर सोच और कर यही रहे हैं कि वे किसी प्रकार अपनी वर्तमान सम्पत्ति को जितना अधिक बढ़ा सकें, दिखा सकें उसकी उधेड़ बुन में जुटे रहें। यह मार्ग निरर्थक है। आज की सबसे बड़ी बुद्धिमानी यह है कि किसी प्रकार गुजारे की बात सोची जाए। परिवार के भरण-पोषण भर के साधन जुटाये जायें और जो जमा पूँजी पास है उसे लोकोपयोगी कार्य में लगा दिया जाए।

🔵 जिनके पास नहीं है वे इस तरह की निरर्थक मूर्खता में अपनी शक्ति नष्ट न करें। जिनके पास गुजारे भर के लिए पैतृक साधन मौजूद हैं, जो उसी पूँजी के बल पर अपने वर्तमान परिवार को जीवित रख सकते हैं वे वैसी व्यवस्था बना कर निश्चित हो जायें और अपना मस्तिष्क तथा समय उस कार्य में लगायें, जिसमें संलग्न होना परमात्मा को सबसे अधिक प्रिय लग सकता है।

🌹 अखण्ड ज्योति 1967 मार्च
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

घबराए नहीं, ये हैं उपाय :: 500, 1000 के नोट बंद:

काले धन पर लगाम लगाने के लिए ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सरकार ने 500 और 1000 रुपये के मौजूदा नोटों को अमान्य करार दे दिया है। अब इन नोटों के जरिए लेन-देन नहीं किया जा सकता है। काले धन वालों को झटका लेने के लिए सरकार की तरफ से अचानक इस तरह का फैसला लिया जाना जरूरी था, लेकिन इससे फौरी तौर पर आम लोगों की भी परेशानी बढ़ गई है। घबराने की जरूरत नहीं है, आम लोगों के लिए ये हैं उपाय:

1. शांत रहें, आपके पास पुराने नोटों को बैंक या पोस्ट ऑफिस में बदलने या जमा करने के लिए 50 दिन हैं। बाकी नोट और सिक्के पहले की तरह चलते रहेंगे।


2. इमरजेंसी की जरूरतों के लिए ये उपाय हो सकते हैं-

सरकार की तरफ से मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थितियों के लिए कुछ छूट दी गई है। 8 नवंबर की आधी रात से अगले 72 घंटों तक यानी 11 नवंबर की आधी रात तक सरकारी अस्पतालों में 500 और 1000 के पुराने नोट स्वीकार किए जाएंगे। इस दौरान सरकारी अस्पतालों के दवाखानों में डॉक्टरों की पर्ची पर दवा खरीदने में पुराने नोटों का इस्तेमाल हो सकता है।

रेल टिकट बुकिंग और एयर ट्रेवल बुकिंग लिए पहले 72 घंटों तक पुराने नोटों का इस्तेमाल हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेश से आने या विदेश जाने वाले यात्रियों के लिए 5 हजार रुपये मूल्य के पुराने नोटों को बदले जाने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

शुरुआती 72 घंटों के लिए सरकारी कंपनियों के अधिकृत पेट्रोल, डीजल और सीएनजी स्टेशनों, दूध के बूथों, सरकारी को-ऑपरेटिव स्टोर्स पर पुराने नोट चलेंगे।

इलेक्ट्रॉनिक फंड पेमेंट, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से लेन-देन पर कोई रोक नहीं

3. वॉलिट्स, घर की आलमारी, ड्रावर्य, बैंक के लॉकर्स समेत उन सभी जगहों पर जहां-जहां आपने करंसी रखी हो वहां से नोट इकट्ठा कर लें।

4. इन नोटों में से 500 और 1000 के नोटों को छांट लें और अच्छे से गिन लें।

5. जाहिर है, बैंकों और डाक घरों में 10 नवंबर से लंबी कतारें रहेंगी, इसलिए इसके लिए तैयार रहें। 10 नवंबर से 24 नवंबर तक 4 हजार रुपये मूल्य तक के पुराने नोट बदले जा सकेंगे। 25 नवंबर के बाद यह सीमा बढ़ाई जाएगी। अपने साथ आईडी कार्ड ले जाना न भूलें।

6. शुरुआत में हर दिन सिर्फ 10 हजार रुपये और हर सप्ताह 20 हजार रुपये ही निकाले जा सकेंगे, इसलिए जहां तक संभव हो, खरीदारी के लिए क्रेडिट/डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करें।

7. अगर 30 दिसंबर तक आप अपने सभी पुराने नोट नहीं जमा कर पाते हैं तो कोई बात नहीं। तब भी आपके पास एक रास्ता होगा। आप आरबीआई के अधिकृत कार्यालयों पर अपना आईडी कार्ड दिखाकर एक घोषणा पत्र भरकर 31 मार्च 2017 तक इन पुराने नोटों को जमा कर सकेंगे।

8. जहां तक संभव हो, जो भी नोट जमा करें या बदलें उसके सीरियल नंबर की सूची तैयार रखें। आरबीआई पहले ही ऐलान कर चुका है कि बैंक या डाक घरों में जमा या एक्सचेंज किए जा रहे नोटों पर नजर रखी जाएगी। बहुत मुमकिन है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भी इस पर नजर रखेगी कि कौन कितना धन जमा या एक्सचेंज कर रहा है, इसलिए उतना ही नोट बदलें जितने के बारे में आप टैक्स डिपार्टमेंट को एक्सप्लेन करना चाह रहे हैं।

👉 आस्था

यात्रियों से खचाखच भरी एक बस अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। अचानक मौसम बहुत खराब हो गया।तेज आंधी और बारिश से चारों ओर अँधेरा सा छा गया। ड्...