रविवार, 23 जुलाई 2017

👉 हारिय न हिम्मत दिनांक :: २३

🌹  आत्मशक्ति पर विश्वास रखो   

🔵 क्या करें, परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल नहीं हैं, कोई हमारी सहायता नहीं करता,, कोई मौका नहीं मिलता आदि शिकायतें निरर्थक हैं। अपने दोषों को दूसरों पर थोपने के लिए इस प्रकार की बातें अपनी दिल जमाई के लिए की जाती हैं। लोग कभी प्रारब्ध को मानते हैं, कभी देवी देवताओं के सामने नाक रगड़ते हैं। इन सबका कारण है अपने ऊपर विश्वास का न होना।

🔴 दूसरों को सुखी देखकर हम परमात्मा के न्याय पर उंगली उठाने लगते हैं। पर यह नहीं देखते कि जिस परिश्रम से इन सुखी लोगों ने अपने काम पूरे किये हैं, क्या वह हमारे अंदर है! ईश्वर किसी के साथ पक्षपात नहीं करता उसने वह आत्मशक्ति सबको मुक्त हाथों से प्रदान की है जिसके आधार पर उन्नति की जा सके।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Lose Not Your Heart Day 23

🌹  Believe in the Strength of Your Soul
🔵 It is useless to complain that circumstances are not favorable, or that no one helps you, or that there are no opportunities for you. People say things like this only to blame their misfortune on others or cover their own personal shortcomings. Some people even blame such things on their fate or luck, and beg for better fortune from various deities. This is all because they lack confidence in themselves.

🔴 We often fall prey to jealousy and fail to consider that others have achieved happiness because of their own hard work. God does not play, favorites. He has given everyone the opportunity and the strength of soul to make progress.

🌹 ~Pt. Shriram Sharma Acharya

👉 प्रतिष्ठित टेंपल्टन फाउंडेशन की पुरस्कार समिति के प्रथम भारतीय जज होंगे डॉ. चिन्मय पण्ड्या

🔴 आध्यात्मिक क्षेत्र के नोबल पुरस्कार माने जाने वाले टेंपल्टन पुरस्कार जांच समिति के प्रथम भारतीय जज होने का गौरव देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या को मिला है। उनके चयन होने पर अखिल विश्व गायत्री परिवार व देश-विदेश के सामाजिक व आध्यात्मिक संस्थानों के प्रमुखों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की एक बड़ी उपलब्धि बताया।

🔵 डॉ. चिन्मय को इस आशय का एक पत्र टेंपल्टन फाउण्डेशन के अध्यक्ष हिथर टेंपल्टन डिल ने भेजकर अनुरोध किया है कि वे इस पद को संभालने के साथ इस क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं एवं लोगों का मार्गदर्शन करें। पत्र में बताया गया है कि 1972 में स्थापित यह फांउडेशन प्रत्येक वर्ष विभिन्न देशों में सेउन चयनित व्यक्ति को यह पुरस्कार देता है, जिन्होंने व्यावहारिक कार्यों के माध्यम से, जीवन के आध्यात्मिक आयाम की पुष्टि करने के लिए असाधारण योगदान दिया हो। उल्लेखनीय है कि भारत के तीन व्यक्तियों को अब तक यह पुरस्कार मिला है, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन, भारतरत्न मदर टेरेसा एवं प्रख्यात दार्शनिक पांडुरंग शास्त्री आठवले हैं।

🔴 डॉ. चिन्मय पण्ड्या का कार्यकाल अक्टूबर 2017 से आगामी तीन वर्ष के लिए होगा। वे इस पद पर रहते हुए देश-विदेश में आध्यात्मिक व सामाजिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे जांच समिति द्वारा नामित व्यक्तियों में से किसी एक का चयन करेंगे। अपने चयन पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह सम्मान केवल मेरा ही नहीं है, वरन् उन प्रत्येक भारतीयों के लिए है, जो इस क्षेत्र से जुड़े हैं। डॉ. चिन्मय ने अपने चयन को युगऋषि पूज्य गुरुदेव एवं वन्दनीया माताजी की विशेष अनुकंपा मानते हुए कहा कि जज के रूप में नामित होना गायत्री परिवार व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के लिए ही नहीं, वरन् पूरे देश के लिए गौरव की बात है।

👉 निर्माण से पूर्व सुधार की सोचें (भाग १)

महत्त्व निर्माण का ही है। उपलब्धियाँ मात्र उसी पर निर्भर हैं। इतना होते हुए भी पहले से ही जड़ जमाकर बैठी हुई अवांछनीयता निरस्त करने पर सृ...