मंगलवार, 24 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 81)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

🔴 11. विवाह के लिए नियत पर्व:-- सालग सोधने के झंझट में यदि उपयुक्त समय पर विवाह न बनता हो तो शुभ देव-पर्वों पर उन्हें निस्संकोच कर लिया जाये।

🔵 कई बार अभिभावकों की सुविधा के विपरीत पण्डित लोग विवाह न बनने का अड़ंगा लगाकर एक बड़ी कठिनाई उत्पन्न कर देते हैं। यों मासिक होने पर ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार सूर्य, गुरु, चन्द्र आदि के देखने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है और उसका विवाह किसी भी शुभ दिन किया जा सकता है। फिर भी अनाड़ी पण्डित कुछ न कुछ अड़ंगे खड़े करते रहते हैं। ऐसी उलझनों से बचने के लिए देव पर्वों पर पहले भी बिना पण्डित से पूछे विवाह होते थे। (1) कार्तिक में देवोत्थान, (2) माघ में बसन्त-पंचमी, (3) बैसाख में अक्षय तृतीया, (4) आषाढ़ में शुक्ल-पक्ष की नवमी इन चार अवसरों पर अभी भी विवाह किए जाते हैं। अब इनके अतिरिक्त छह नए और बढ़ा दिए जांय (1) कार्तिकी (कार्तिक सुदी 15) (2) गीता जयन्ती (मार्गशीर्ष सुदी 11) (3) शिवरात्रि (फाल्गुन वदी 13) (4) राम नवमी (चैत्र सुदी 9) (5) हनुमान जयन्ती (चैत्र सुदी 15) (6) गायत्री जयन्ती गंगा दशहरा (ज्येष्ठ सुदी 10)।

🔴 12. विवाह का शुभ समय गोधूलि बेला:-- सायंकाल सूर्य अस्त होते समय विवाह संस्कार के लिए सर्वोत्तम समय माना जाय।

🔵 बहुत रात गए विवाह संस्कार होने में, (1) बारात रात में चढ़ती है और रोशनी सजावट का बेकार खर्च बढ़ता है, (2) भोजन कराने में अनावश्यक विलम्ब होता है, (3) सारी रात बेकार जगते जाती है। (4) संस्कार के धर्मानुष्ठान देखने एवं शिक्षाओं को सुनने कम लोग वहां बैठते हैं अधिकांश तो थके मांदे सो ही जाते हैं। (5) अधिक रात विवाह का यज्ञ करने से उसमें कीड़े-मकोड़े गिरने का डर रहता है। (6) वर कन्या अलसाये व उनींदे रहते हैं। इन सब अड़चनों को हटाने के लिए गोधूलि हर विवाह के लिए उपयुक्त मानी जाय। सूर्य अस्त होने से एक घण्टे पूर्व कार्य आरम्भ करके एक दो घण्टे रात गये तक सब कार्य समाप्त हो सकता है। और उस समय सब लोग उस आनन्द समारोह में उत्साहपूर्वक भाग लेने का लाभ उठा सकते हैं।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 जो सर्वश्रेष्ठ हो वही अपने ईश्वर को समर्पित हो

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