मंगलवार, 24 जनवरी 2017

👉 पराक्रम और पुरुषार्थ (भाग 27) 24 Jan

🌹 उत्साह एवं सक्रियता चिरयौवन के मूल आधार

🔵 जॉर्ज बर्नार्ड शॉ 93 वर्ष की आयु तक इतना अधिक लिखते थे कि वे स्वयं 40 वर्ष की आयु में भी इतना नहीं लिख पाते थे। दार्शनिक वैनदित्तो क्रोचे 80 वर्ष की अवस्था में भी नियमित रूप से दस घण्टे काम करते थे। 85 वर्ष की आयु में उन्होंने दो महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं जिनकी चर्चा विश्व साहित्य में होती है। बट्रेण्ड रसेल को 78 वर्ष की आयु में उस कृति पर पुरस्कार मिला जो उन्होंने 77 वर्ष की अवस्था में पूरी की थी। माटिस मैटर लिंक का देहान्त 88 वर्ष की आयु में हुआ। जिन दिनों वे मरे, उसके कुछ दिन पूर्व ही उन्होंने अपनी अन्तिम पुस्तक पूरी की थी। इस पुस्तक का नाम था ‘द एवार्ट ऑफ से टू ऑल’ यह पुस्तक उनकी सर्वोत्कृष्ट रचना समझी जाती है।

🔴 ब्रिटेन के सुप्रसिद्ध अखबार ‘डेली एक्सप्रेस’ के संचालक लॉर्ड वीवनवर्क 80 वर्ष की अवस्था में भी दफ्तर में जमकर बैठते और काम करते थे। दार्शनिक काण्ट को 74 वर्ष की अवस्था में उनकी एक रचना के आधार पर दर्शन क्षेत्र में प्रतिष्ठा मिली। 60 वर्ष की आयु के बाद चार वर्षों में उन्होंने ‘एन्थ्रोपोलॉजी’, ‘मेटा फिजिक्स ऑफ ईथिक्स’ और ‘स्ट्राइफ ऑफ फैकल्टीज’ ये तीन पुस्तकें लिखी थीं, जिनने उन्हें दार्शनिक जगत में प्रतिष्ठित किया। टैनीसन ने अपना प्रख्यात ग्रन्थ ‘क्रासिंग द बार’ 83 वर्ष की आयु में पूरा किया। होब्स ने 88 वर्ष की आयु में ‘इलियड’ अनुवाद प्रकाशित कराया था। चित्रकार टीटान ने विश्व प्रसिद्ध कलाकृति ‘वैटल ऑफ लिमाटो’ 98 वर्ष की आयु में पूरी की।

🔵 इंग्लैण्ड का इतिहास जिनने पढ़ा है, वे ग्लैडस्टन के नाम से अवश्य ही परिचित होंगे। ग्लैडस्टन ने 40 वर्ष की आयु में ब्रिटेन की राजनीति में प्रवेश किया और 70 वर्ष की आयु में राज्य का उत्तरदायित्व सम्हाला। ऑक्सफोर्ड यूनवर्सिटी में ‘होमर’ पर उनने जो भाषण दिया वह अत्यन्त शोध पूर्ण माना जाता है। पर जब प्रधानमन्त्री बने तब उनकी आयु 79 वर्ष थी। 85 वर्ष की आयु में उन्होंने ‘ओडेमी ऑफ हाटस्’ नामक ग्रन्थ की रचना की। वृद्धावस्था में भी वे चैन से नहीं बैठे रहे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌿🌞     🌿🌞     🌿🌞

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 Sowing and Reaping (Investment & its Returns) (Part 2)

🔵 Just begin to spend all you have of these two things to receive back 100 times of the same, number ONE. Number TWO, your mind is one ...