मंगलवार, 24 जनवरी 2017

👉 आप अपने आपको पहचान लीजिये (भाग 6)

 👉 युग ऋषि की अमृतवाणी
🔴 और बड़े महत्त्वपूर्ण आदमी है और ऐसे महत्त्वपूर्ण और कीमती आदमी हैं कि आप अपने महत्त्व का और आप अपने कीमत का ठीक इस्तेमाल करने में समर्थ हो सकें तो आपके लिये भी मजा जाये और हमारे लिये भी मजा आ जाये। दोनों के दोनों ही धन्य हो जायें और दोनों के दोनों ही आज का हमारा यह प्रवचन है इसको सुनकर यह कहे कि इस आदमी ने बहुत ही नेक सलाह दी थी। और अगर हमने इस सलाह को न माना होता तो हम बहुत घाटे में रहे होते। आप हमारा कहना मानिए और हमारी सलाह पर चलिये। हम भी किसी की सलाह पर चले हैं घाटा हमने भी उठाया है। जोखिम हमने भी उठाया है। जोखिम उठाना कोई बहुत बुरी बात नहीं है।

🔵 हनुमान् जी ने भी जोखिम उठाया था कुन्ती ने भी जोखिम उठाया था। कुन्ती ने कहाँ से ढूँढ़े थे पाँच बच्चे सामान्य नहीं थे उनके पति के नहीं थे पाण्डु के नहीं थे। वह किसके थे एक सूर्य का बेटा था, एक इन्द्र का बेटा था, एक वरुण का बेटा था, एक वायु का बेटा था और छः देवताओं के ही सब बेटे थे। और उन्होंने सबको भगवान् के सुपुर्द कर दिया। ले जाओ अरे बड़ी पागल थी कुन्ती अपने घर रखती अपने बच्चों की कमाई खाती और अपने घर में मकान बनाती अपनी दुकान चलाती और अपनी खेती करती और सब बच्चों को नौकरी से लगा देती तो सब लड़के बहुत सारा कमाते और मजा आता जेवर पहनते लेकिन कुन्ती कुन्ती ने मुनासिब सलाह दी कि गैरमुनासिब सलाह दी बड़ी मुनासिब सलाह दी और मुनासिब सलाह का परिणाम यह हुआ कि अर्जुन धन्य हो गया युधिष्ठिर धर्मराज हो गया। और अगर श्रीकृष्ण जी के फेर में न आये होते महाभारत में न गये होते तो न वो युधिष्ठिर रहे होते और न धर्मराज रहे होते न पार्थ हुये होते और न वह भीम हुये होते साधारण से व्यक्ति रह जाते और सामान्य स्थिति में उनको जीवन यापन करना पड़ता। लेकिन उन्होंने उनका कहना मान लिया तो बहुत ही अच्छा हुआ। क्या कह रहे हम यो कह रहे कि इस समय आपकी बहुत आवश्यकता है।

🔴 आप अपने आपको पहचान लीजिये कि सामान्य आदमी नहीं है और असामान्य हैं और आप सामान्य काम के लिये पैदा नहीं हुये हैं असामान्य काम के लिये पैदा हुये हैं। आप नौकरी करने के लिए पैदा नहीं हुये है, आप पढ़ने के लिये पैदा नहीं हुये हैं हमने भी पढ़ा नहीं है हम स्कूल नहीं गये हैं। स्कूल के अलावा हम पढ़े हैं। और नौकरी की है नौकरी भी नहीं की है लेकिन हम नफे में रहे हैं नौकरी करते तो क्या मिल जाता और हम पड़कर के बी.ए हो जाते तो क्या मिल जाता। लेकिन हमने जो किया है जो हमको मिला है वह बहुत फायदे का मिला है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/lectures_gurudev/31.2

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