मंगलवार, 24 जनवरी 2017

👉 आप अपने आपको पहचान लीजिये (भाग 5)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी
🔴 आज हम आपको इसी तरह की बात बताने को हैं जो आपको शायद यह मालूम पड़ेगी कि हमको नुकसान की बात बताई जा रही है। लेकिन आप यकीन रखिये कि हम नुकसान की बात नहीं बताई जा रही है। आपको नफे की बात बता रहे हैं आपको नफा ही नफा है नुकसान हो जाये तो हमारी जिम्मेदारी है आप हमारे ऊपर यकीन करते हों तो कर लीजिये कि हमारे फायदे के लिए कहा जा रहा है नुकसान के लिए नहीं कहा जा रहा है। क्या कह रहे हैं हम यूँ कह रहे है कि आपकी लम्बी वाली जिंदगी है ४० की होगी, ५० की होगी १०० की होगी जो भी हो यदि उसमें यदि एक साल आप हमारे लिये निकाल दें तो इसमें नुकसान हुआ न हाँ साहब नुकसान हुआ यदि हम १०० रुपया महीना कमाते तो १२०० रुपये का हमारा नुकसान हो गया।

🔵 और समय चला गया हमारी खेती में नुकसान हो गया हमारी दुकान में नुकसान हो गया हमारा फलाना नुकसान हो गया और आप सलाह लीजिये किसी से अपनी माँ से पूछिए, धर्मपत्नी से पूछिए, भाई से पूछिए, भतीजे से पूछिए, साले से पूछिए, बहनोई से पूछिए सब यह कहेंगे कि यह बेअकली का बात है और बेवकूफी की बात है। इसमें सिवाय नुकसान के क्या फायदा है तुम्हारा। तुम पागल हो गये हो क्या। ऐसे तो सैकड़ों बाबाजी फिरते हैं, सैकड़ों पंडित फिरते हैं। किसी ने लिख दिया, छाप दिया और उन्होंने कहा तुम चल दिये। नुकसान तुम्हारी समझ में नहीं आता। नुकसान की बात है कि फायदे की बताइये मैं आपको फायदे की बता रहा हूँ। क्या फायदे की बात बता रहे हैं। हम यह फायदे की बात बता रहे हैं कि आप सो रहे हैं और आपको नींद आ गई है आप खुमारी में है। यदि आप अपनी सही स्थिति को जान लें तो आपको बड़ा मजा आ जायेगा। आप कौन है जानते हैं। हमारा नाम राम गोपाल है, मोहन लाल है गुलाब चंद है, नहीं आप न राम गोपाल हैं न गुलाब चंद हैं।

🔴  आप वो है कि हमने बड़ी मेहनत से और बड़ी मसक्कत से आपको ढूँढ़कर इकट्ठा किया है जिन लोगों के पास पूर्व जन्मों के संस्कार जमा थे और जो इस योग्य थे उनको हमने बड़ी मुश्किल से ढूँढ़ा और बड़ी मुश्किल से जमा किया है। सारी जिंदगी में हमारी एक ही सफलता है कि हमने संस्कारवान व्यक्तियों को इकट्ठा कर लिया है दूसरे लोग संस्कार वान व्यक्ति इकट्ठे नहीं कर पाये। बहुत सी कमेटियाँ हैं, संस्थायें हैं, अमुक हैं, तमुक हैं व्यक्ति तो किसी और के पास भी होंगे ये तो मैं नहीं कहता कि औरों के पास कोई व्यक्ति नहीं हैं हमारे पास हैं और हमारे पास बहुत सही आदमी हैं और हमने ढूँढ़कर निकाले हैं। मेहनत की है पानी में डुबकी लगाई है और डुबकी लगाकर के मोतियों के तरीके से आपको हमने ढूँढ़कर निकाला है और आप समझते ही नहीं। आप तो अपने को किसान समझते हैं, दुकानदार समझते हैं शिक्षक समझते हैं, विद्यार्थी समझते हैं। नौकर समझते हैं न जाने क्या समझते हैं। हम आपको समझते हैं कि आप बड़े कीमती आदमी हैं।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/lectures_gurudev/31.2

👉 होशियारी और समझदारी

🔶 होशियारी अच्छी है पर समझदारी उससे भी ज्यादा अच्छी है क्योंकि समझदारी उचित अनुचित का ध्यान रखती है! 🔷 एक नगर के बाहर एक गृहस्थ महात्म...