शनिवार, 28 जनवरी 2017

👉 तीन मछलियां

🔴 एक सरोवर मे तीन दिव्य मछलिया रहती थी। वहाँ की तमाम मछलिया उन तीनो के प्रति ही श्रध्दा मे बटी हुई थी।

🔵 एक मछली का नाम व्यावहारिक बुद्धि था, दुसरी का नाम मध्यम बुद्धि और तीसरी का नाम अति बुद्धि था।

🔴 अति बुद्धि के पास ज्ञान का असीम भंडार था। वह सभी प्रकार के शास्त्रो का ज्ञान रखती थी। मध्यम बुद्धि को उतनी ही दुर तक सोचने की आदत थी, जिससे उसका वास्ता पड़ता था। वह सोचती कम थी, परंपरागत ढंग से अपना काम किया करती थी। व्यवहारिक बुद्धि न परंपरा पर ध्यान देती थी और न ही शास्त्र पर। उसे जब जैसी आवश्यकता होती थी निर्णय लिया करती थी और आवश्यकता न पड़नेँ पर किसी शास्त्र के पन्ने तक नही उलटती थी।

🔵 एक दिन कुछ मछुआरे सरोवर के तट पर आये और मछलियो की बहुतायत देखकर बाते करनेँ लगे कि यहाँ काफी मछलियाँ है, सुबह आकर हम इसमे जाल डालेगे।

🔴 उनकी बाते मछलियो ने सुनी।

🔵 व्यवहारिक बुद्धि ने कहा-” हमे फौरन यह तालाब छोड़ देना चाहिए। पतले सोतो का मार्ग पकड़कर उधर जंगली घास से ढके हुए जंगली सरोवर मे चले जाना चाहिये।”

🔴 मध्यम बुद्धि ने कहा- ” प्राचीन काल से हमारे पूर्वज ठण्ड के दिनो मे ही वहा जाते है और अभी तो वो मौसम ही नही आया है, हम हमारे वर्षो से चली आ रही इस परंपरा को नही तोड़ सकते। मछुआरो का खतरा हो या न हो, हमे इस परंपरा का ध्यान रखना है।”

🔵 अति बुद्धि ने गर्व से हँसते हुए कहा-” तुम लोग अज्ञानी हो, तुम्हे शास्त्रो का ज्ञान नही है। जो बादल गरजते है वे बरसते नही है। फिर हम लोग एक हजार तरीको से तैरना जानते है, पानी के तल मे जाकर बैठने की सामर्थ्यता है, हमारे पूंछ मे इतनी शक्ति है कि हम जालो को फाड़ सकती है। वैसे भी कहा गया है कि सकटो से घिरे हुए हो तो भी अपने घर को छोड़कर परदेश चले जाना अच्छी बात नही है। अव्वल तो वे मछुआरे आयेगे नही, आयेगे तो हम तैरकर नीचे बैठ जायेगी उनके जाल मे आयेगे ही नही, एक दो फस भी गई तो पुँछ से जाल फाड़कर निकल जायेंगे। भाई! शास्त्रो और ज्ञानियो के वचनो के विरुद्ध मै तो नही जाऊँगी।”

🔴 व्यवहारिक बुद्धि ने कहा-” मै शास्त्रो के बारे मे नही जानती, मगर मेरी बुद्धि कहती है कि मनुष्य जैसे ताकतवर और भयानक शत्रु की आशंका सिर पर हो, तो भागकर कही छुप जाओ।” ऐसा कहते हुए वह अपने अनुयायिओं को लेकर चल पड़ी।

🔵 मध्यम बुद्धि और अति बुद्धि अपने परपरा और शास्त्र ज्ञान को लेकर वही रूक गयीं। अगले दिन मछुआरो ने पुरी तैयारी के साथ आकर वहाँ जाल डाला और उन दोनोँ की एक न चली। जब मछुआरे उनके विशाल शरीर को टांग रहे थे तब व्यवहारिक बुद्धि ने गहरी साँस लेकर कहा-” इनके शास्त्र ज्ञान ने ही धोखा दिया। काश! इनमे थोड़ी व्यवहारिक बुद्धि भी होती।”

🔴 व्यवहारिक बुद्धि से हमारा आशय है कि किस समय हमे क्या करना चाहिए और जो हम कर रहे है उस कार्य का परिणाम निकलने पर क्या समस्याये आ सकती है, यह सोचना ही व्यवहारिक बुद्धि है। बोलचाल की भाषा में हम इसे सामान्य ज्ञान (कॉमन सेंस) भी कहते हैं, और भले ही हम बड़े ज्ञानी ना हों मोटी-मोटी किताबें ना पढ़ीं हों लेकिन हम अपनी व्य्वयहारिक बुद्धि से किसी परिस्थिति का सामना आसानी से कर सकते हैं।

 

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया व प्रेरणादायक कहानी है..सवाल यह है कि..मुझे कैसे पता चलेगा कि परिस्थिति के अनुसार मेरा कौन सा निर्णय उचित है?

    उत्तर देंहटाएं