शनिवार, 28 जनवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 29 Jan 2017

🔴 परिवार परमात्मा की ओर से स्थापित एक ऐसा साधन  है, जिसके द्वारा हम अपना आत्म-विकास सहज ही में कर सकते हैं और आत्मा में सतोगुण को परिपुष्ट कर सुखी, समृद्ध जीवन व्यतीत कर सकते हैं। मानव जीवन की सर्वांगपूर्ण सुव्यवस्था के लिए पारिवारिक जीवन प्रथम सोपान है, क्योंकि मनुष्य केवल कर्म, सेवा-साधना द्वारा ही अपना पूर्ण विकास कर सकता है।

🔵 मातृत्व पर-नारीत्व पर सर्वाधिक लानत फेंकने का काम दहेज के राक्षस ने किया है। इसे समझा भी गया तथा उसके निवारण के प्रयास भी बहुत हुए,सामाजिक भर्त्सनाएँ की गई, कानून भी बना। दहेज के प्रतिरोध में सैकड़ों विचारशील व्यक्तियों ने लिखा, भाषण किया, पर पुरानी पीढ़ी अपने स्थान से तिल भर हटने की तैयारी नहीं। दहेज के दानव ने हर किसी का अहित किया है, पर अपनी बाजी से कोई नहीं चूकता। जब कोई साहसपूर्वक प्रतिरोध, संघर्ष एवं आदर्श उपस्थित करने को तैयार होगा, तभी कुछ समस्या हल होगी। यह आशा अब नये रक्त से हीस शेष है।

🔴 शिक्षित नारी को छिछली चमक-दमक की नई पराधीनता से स्वयं मुक्त होकर देवी-देवताओं, भूत-पलीतों, महन्तों, मठाधीशों, रूढ़ियों-कुरीतियों, अंध परम्पराओं, पूर्वाग्रहों-दुराग्रहों की पुरानी पराधीनता से जकड़ी नारी के उद्धार के लिए आगे आना ही चाहिए। यह उसकी सामाजिक, नैतिक तथा मानवीय जिम्मेदारी है। अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने की इच्छा तथा संकल्प जिस शिक्षित नारी में जाग्रत् हो उठे वह नई तथा पुरानी दोनों पराधीनताओं से सामूहिक मुक्ति के लिए सक्रिय हो उठेगी।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 हमारा युग निर्माण सत्संकल्प (भाग 45)

🌹  मनुष्य के मूल्यांकन की कसौटी उसकी सफलताओं, योग्यताओं एवं विभूतियों को नहीं, उसके सद्विचारों और सत्कर्मों को मानेंगे। 🔴 दूसरों को सन...