🔴 कितने काम हो गए, तीन— एक और काम कहता हूँ, उसे ध्यान से सुनना। हमने जो लड़ाई छेड़ी है वह दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध छेड़ी है और सत्प्रवृत्तियों के संवर्द्धन की छेड़ी है। रामराज्य की स्थापना की छेड़ी है और लंका-दमन की छेड़ी है। यह काम बहुत बड़ा है और इसमें कुछ मुसीबतें भी आएँगी, पर उन मुसीबतों को आप तक नहीं पहुँचने देंगे। उन मुसीबतों को अपने ऊपर लेते रहेंगे। राणा सांगा जो था, उसे जहाँ कहीं भी दीखता कि उसके साथियों पर गाज गिरी, उनके ऊपर की तलवार अपने शरीर पर झेल जाता था। उसने ढेरों आदमी इस तरह बचा दिए थे। जब उसके शरीर पर अस्सी घाव हो गए तब वह बेहोश हो गया और अपना काम बन्द कर दिया।
🔵 अस्सी घाव खाने तक तो कोई मुसीबत आपके ऊपर नहीं आवेगी। मुसीबत आएगी तो हमारे ऊपर आएगी। पहले भी आई थी। श्रीकृष्ण भगवान् के पास आई थी। रामचन्द्र जी पर भी मुसीबत आई थी। सीता हरण हो गया था। किसी का क्या हो गया? लेकिन हमारे ऊपर एक और तरह की मुसीबत आएगी, जिसकी जानकारी आपको देना चाहता हूँ। वह मुसीबत इस तरह की है जैसे कि कालनेमि ने पैदा की थी। कालनेमि रावण का कुटुम्बी था। स्कन्द पुराण में कथा आती है कि वह सबकी बुद्धि बिगाड़ देता था। छोटा भाई कुम्भकरण था। उसने योगाभ्यास किया, तप किया।
🔴 वह चाहता था कि ६ महीने जगा करूँ और एक दिन सोया करूँ, लेकिन कालनेमि ने उसकी ऐसी बुद्धि बिगाड़ दी, भ्रष्ट कर दी कि कुम्भकरण यह माँगने लगा कि ६ महीने सोया करूँ और एक दिन जगा करूँ। अगर वह ६ महीने जगा होता तो रावण का ढेर हो गया होता। इसी तरह मारीच ने भी तप किया था। वह स्वर्ग चाहता था, पर कालनेमि ने उसकी ऐसी बुद्धि भ्रष्ट की और कहा कि तू यह मत, माँग कि मैं स्वर्ग जाऊँ, वरन् यह माँग कि सोने का हिरण बन जाऊँ। कारण, चमड़े वाले को तो मारता है एक आदमी, पर सोने वाले को मारेंगे सौ आदमी। बेचारा छिपा-छिपा बैठा रहता था अपने वेष को बनाए एक बार सोने का वेष बनाया, सो सीता जी के कहने पर रामचन्द्र जी ने उसे मार डाला।
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)
🔵 अस्सी घाव खाने तक तो कोई मुसीबत आपके ऊपर नहीं आवेगी। मुसीबत आएगी तो हमारे ऊपर आएगी। पहले भी आई थी। श्रीकृष्ण भगवान् के पास आई थी। रामचन्द्र जी पर भी मुसीबत आई थी। सीता हरण हो गया था। किसी का क्या हो गया? लेकिन हमारे ऊपर एक और तरह की मुसीबत आएगी, जिसकी जानकारी आपको देना चाहता हूँ। वह मुसीबत इस तरह की है जैसे कि कालनेमि ने पैदा की थी। कालनेमि रावण का कुटुम्बी था। स्कन्द पुराण में कथा आती है कि वह सबकी बुद्धि बिगाड़ देता था। छोटा भाई कुम्भकरण था। उसने योगाभ्यास किया, तप किया।
🔴 वह चाहता था कि ६ महीने जगा करूँ और एक दिन सोया करूँ, लेकिन कालनेमि ने उसकी ऐसी बुद्धि बिगाड़ दी, भ्रष्ट कर दी कि कुम्भकरण यह माँगने लगा कि ६ महीने सोया करूँ और एक दिन जगा करूँ। अगर वह ६ महीने जगा होता तो रावण का ढेर हो गया होता। इसी तरह मारीच ने भी तप किया था। वह स्वर्ग चाहता था, पर कालनेमि ने उसकी ऐसी बुद्धि भ्रष्ट की और कहा कि तू यह मत, माँग कि मैं स्वर्ग जाऊँ, वरन् यह माँग कि सोने का हिरण बन जाऊँ। कारण, चमड़े वाले को तो मारता है एक आदमी, पर सोने वाले को मारेंगे सौ आदमी। बेचारा छिपा-छिपा बैठा रहता था अपने वेष को बनाए एक बार सोने का वेष बनाया, सो सीता जी के कहने पर रामचन्द्र जी ने उसे मार डाला।
🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य (अमृतवाणी)















































