गुरुवार, 13 मई 2021

👉 तत्व दृष्टि से बन्धन मुक्ति (भाग १६)

👉 समस्त दुखों का कारण अज्ञान

पादरी ने एक युक्ति से काम लिया। उसने थैले में से एक दर्पण निकाला और उसे आदिवासियों के सरदार के सामने कर दिया उसने जैसे ही अपनी आकृति देखी वह डर गया। दर्पण उन लोगों के लिये सर्वथा नई वस्तु थी। एक-एक करके पादरी ने दर्पण सभी को दिखाया। वे सभी बहुत डरे और समझने लगे कि यह आदमी कोई जादूगर है इसे मारने से कोई विपत्ति आ सकती है। अस्तु वे अपने-अपने भाले फेंक कर उसके इर्द-गिर्द आशीर्वाद पाने के लिये सिर झुकाकर बैठ गये। पादरी ने एक और दूसरा चमत्कार प्रकट किया। उसके पोपले मुंह में दोनों जबड़े नकली दांतों के लगे थे। उन बैठे हुए दर्शकों को सम्बोधित कर अब उसने एक नया जादू दिखाया। मुंह में से दांतों की बत्तीसी निकाली, दांत उन्हें दिखाये, पोपला मुंह दिखाया और फिर दांतों को मुंह में ठूंस कर पहले जैसा मुंह बना लिया। आदिवासी इस चमत्कार को देखकर दंग रह गये और उन्होंने पूरा भरोसा कर लिया कि यह कोई जादुई पुरुष है इतनी मान्यता बना देने से पादरी का काम बहुत सरल हो गया और निश्चिंतता पूर्वक अपना काम उस क्षेत्र में करने लगे। काम चलाऊ टूटी-फूटी आदिवासी भाषा तो उन्होंने पहले ही सीख ली थी।

पादरी ने लिखा है कि न्यूगिनी के यह आदिवासी योद्धा, निर्दयी, क्रूर, कष्ट सहिष्णु और भारी अनुदार होते हैं। एक कबीले का अधिकार जिस क्षेत्र पर है, उसमें घुसकर यदि किसी दूसरे कबीले का कोई सदस्य भूल से या जान बूझकर कोई पेड़ काट ले तो इतने से ही वे लोग आग बबूला हो जाते और रात को छिप कर उस पर हमला बोल देते। एक बार के हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि कांगना मन कबीले के लोगों ने अपने पड़ौसी करारन कबीले की झोपड़ियों पर चढ़ाई करके सोते हुए लोगों को पकड़ लिया और उनमें तीस के सिर काट कर ले आये। इस विजयोपहार में से एक सिर भेंट करने के लिए वे पादरी के पास भी आये थे।

कबीले का मुखिया तथा योद्धा बनने के लिये वे लोग पूरी तैयारी करते हैं। प्रायः 16 वर्ष की आयु में उसे इसकी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये एक जीवित मनुष्य का सिर काटना पड़ता है। अक्सर इस कार्य के लिये अपने ही कबीले की या किसी अन्य कबीले से खरीदी हुई औरत प्रयुक्त की जाती है। थोड़े पालतू पशु, चमड़ा, पक्षियों के पंख आदि देकर औरतें आसानी से खरीदी भी जा सकती हैं। वध उत्सव पर उस अभागी महिला को देव ग्रह में लाया जाता है, जहां वह नव योद्धा भाले छेद-छेद कर उस स्त्री का काम तमाम कर देता है और फिर उसका सिर काटकर सरदार को भेंट करता है। इतना कर लेने पर उसकी गणना कबीले के योद्धा के रूप में होने लगती है। इन्हीं में से पीछे कोई मुखिया भी चुन लिया जाता है।

एक बार तो पादरी के यहां ठहरे हुए गोरों को घेर लिया और प्रस्ताव किया कि दल की एक गोरी महिला उन्हें वध करने के लिये दे दी जाय इसके बदले बीस आदिवासी युवतियां उन्हें दें देंगे। इस धर्म संकट को भी बड़ी चतुरता पूर्वक ही टाला जा सका।

.... क्रमशः जारी
✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 तत्व दृष्टि से बन्धन मुक्ति पृष्ठ २४
परम पूज्य गुरुदेव ने ये पुस्तक 1979 में लिखी थी

कोई टिप्पणी नहीं:

👉 गुरु कौन

बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे। उन के पास शिक्षा लेने हेतु दूर दूर से शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य न...