शुक्रवार, 28 जुलाई 2023

👉 प्रेम ही सर्वोपरि है

ईश्वरीय ज्ञान और नि:स्वार्थ प्रेम के अनुभव से घृणा का भाव नष्ट हो जाता है, तमाम बुराइयाँ रफूचक्कर हो जाती हैं और वह मनुष्य उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त कर लेता है, जिसमें प्रेम, न्याय और उपकार ही सर्वोपरि दिखाई पड़ती हैं।

अपने मस्तिष्क को दृढ़ निश्चय तथा उदार भावों की खान बनाइए, अपने हृदय में पवित्रता और उदारता की योग्यता लाइए, अपनी जीभ को चुप रहने तथा सत्य और पवित्र भाषण के लिए तैयार कीजिए। पवित्रता और शक्ति प्राप्त करने का यही मार्ग है और अंत में अनंत प्रेम भी इसी तरह प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार जीवन बिताने से आप दूसरों पर विश्वास जमा सकेंगे, उनको अपने अनुकूल बनाने की आवश्यकता न होगी। बिना विवाद के आप उनको सिखा सकेंगे, बिना अभिलाषा तथा चेष्टा के ही बुद्धिमान लोग आपके पास पहुँच जाएँगे, लोगों के हृदय को अनायास ही आप अपने वश में कर लेंगे। प्रेम के सबल विचार, कार्य और भाषण व्यर्थ नहीं जाते।

इस बात को भलीप्रकार जान लीजिए कि प्रेम विश्वव्यापी है, सर्वप्रधान है और हमारी हरएक जरूरत को पूरा करने की शक्ति रखता है। बुराईयों को छोड़ना, अंत:करण की अशांति को दूर भगाता है। नि:स्वार्थ प्रेम में ही शांति है, प्रसन्नता है, अमरता है और पवित्रता है।

📖 अखण्ड ज्योति -अक्टूबर 1943

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