गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

👉 नवरात्रि साधना का तत्वदर्शन (अन्तिम भाग)



🔴 इस बीच हमने आप से नित्य अग्निहोत्र करने को कहा जप का एक अंश अग्निहोत्र कीजिए। आप अग्निहोत्र को एक कर्मकाण्ड माने बैठे हैं। अग्निहोत्र यज्ञ विज्ञान का नाम है। यह एक परम्परा ही नहीं, इसका साइंटिफिक बेस भी है। यज्ञ कहते हैं कुर्बानी को, सेवा को। भूदानयज्ञ, नेत्रदानयज्ञ, सफाईयज्ञ, ज्ञानयज्ञ हजारों तरह के यज्ञ हैं । इन सबका एक ही अर्थ होता है लोक हितार्थाय आहुति देना। यज्ञ कीजिए पूर्णाहुति दीजिए, पर जनकल्याण का ध्यान रखिए। संस्कृति की रक्षा के लिए, देश व मानवी आदर्शों को जीवन्त रखने के लिए अपने पसीने की आहुति दीजिए, उस चीज की भी आहुति दीजिए जिसे आपने दबाकर रखा है अपने बेटे के लिए।

🔵 मित्रों अगर आप अय्याशी-फिजूलखर्ची विलासिता की कुर्बानी देने की हिम्मत दिखा सके तो यज्ञ सफल है। तब आप असली अध्यात्मवादी होंगे। जिस दिन आप ऐसे बन जाएँगे तब आप देखेंगे असली चमत्कार । उस दिन आप देखेंगे असली भगवान। तब आपको सुदामा के तरीके से आप के चरणों को धोता हुआ, शबरी के तरीके से आपके दरवाजे पर झूठे बेर खाता हुआ और राजा बलि के तरीके से आपके दरवाजे पर साढ़े तीन गज जमीन माँगता हुआ, गोपियों के दरवाजे पर छाछ माँगता हुआ आपको भगवान दिखाई पड़ेगा। 

🔴 आइए! भगवान ने आपको बुलाया है। जेब खाली कीजिए। बीज के तरीके से गलिए और दरख्त की तरह फलिए मैंने यही जीवनभर सीखा व आपको भी सिखाना चाहता हूँ आपको यदि यह समझ में आस गया तो मैं पूरे मन से आशीर्वाद देता हूँ कि जो भी नवरात्रि अनुष्ठान के, गायत्री साधना के चमत्कार आपने सुने हैं वह आपके जीवन में फलित हो जायँ। आप जिस मकसद से आए थे वह पूरा हो व आप जब भी अनुष्ठान करें समूचा लाभ उठा सकें इसलिए आपको यह समझ में आए व आप लाभान्वित हों।

हमारी बात समाप्त। ॐ शाँतिः शाँतिः शाँतिः।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1992/April/v1.58

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