गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 7 April

🔴 इस समय सारे विश्व की व्यवस्था नये सिरे से बनने वाली है। उस समय आप कितने महान् बनेंगे इसका जवाब समय देगा। हनुमान ने कितनी उपासना की थी, नल-नील, जामवन्त, अर्जुन ने कितनी पूजा-तीर्थयात्रा की थी? यह हम कह नहीं सकते; परन्तु उन्होंने भगवान् का काम किया था। भगवान् ने भी उनके कार्यों में कंधा से कंधा मिलाया था। विभीषण, केवट ने भगवान् का काम किया था—ये लोग घाटे में नहीं रहे। भगवान् का काम करने वाले ही भगवान् के वास्तविक भक्त होते हैं।

🔵 इस समय जो भगवान के भक्त हैं, जिन्हें इस संसार के प्रति दर्द है; उनके नाम पर विशेष सन्देश भेजा गया है कि वे अपने व्यक्तिगत लाभ के कार्यों में कटौती करें एवं भगवान् का काम करने के लिए आगे आएं। हमारा भी यही सन्देश है। अगर आप सुन-समझ सकेंगे तो आपके लिए अच्छा होगा। अगर आप इस परिवर्तन की वेला में भी अपना मतलब सिद्ध करते रहे और मालदार बनते रहे तो पीछे आपको पछताना पड़ेगा तथा आप हाथ मलते रह जायेंगे।

🔴 पीला कपड़ा आप उतारना मत। यह हमारी शान है, हमारी इज्जत है। यह हमारी हर तरह की साधु और ब्राह्मण की परम्परा का उस समय की निशानी है, कुल की निशानी है। पीले कपड़े पहनकर जहां भी जायेंगे लोगों को मालूम पड़ेगा कि ये मिशन के आदमी हैं, जो सन्तों की परम्परा को जिन्दा रखने के लिए कमर बांधकर खड़े हो गये। जो ब्राह्मण की परम्परा को जिन्दा रखने के लिए कमर कसकर खड़े हो गये हैं। ऋषियों की निष्ठा को ऊंचा उठाने के लिए आप पीला कपड़ा जरूर पहनना।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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