गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 6 April

🔴 जीवनोद्देश्य की प्राप्ति के लिये भजन ही नहीं व्यक्तित्व की उत्कृष्टता का अभिवर्धन भी आवश्यक है। ओछे और कमीने व्यक्तित्व दिन रात भजन करने पर भी रतीभर आत्मिक प्राप्ति नहीं कर सकते। इसके विपरीत जिनने अपना अन्तःकरण पवित्र और व्यक्तित्व समुन्नत बनाया है उनका दस-बीस मिनट भजन भी ईश्वर की उपलब्धि और आत्म-साक्षात्कार का लाभ दे सकता है। इस तथ्य को ‘अखण्ड-ज्योति’ परिजनों को हृदयंगम कराते हुये उन्हें आत्म-निरीक्षण, आत्म-शोधन और आत्म-निर्माण की दिशा में अग्रसर होने के लिए प्रोत्साहित, प्रेरित किया जा रहा है।

🔵 उपासना जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। इसके अनेक विधान हैं। इन सब विधानों में हमें गायत्री महामंत्र का जप और ध्यान सर्वोत्तम प्रतीत हुआ है। शास्त्र, पूर्वजों के निर्देश और हमारे व्यक्तिगत अनुभव तीनों का सम्मिलित निष्कर्ष गायत्री उपासना के पक्ष में ही जाता है। जो अन्य उपासना करते हैं वह भले ही उसे भी करते रहें पर हमारा अनुरोध है कि उसके साथ गायत्री उपासना अवश्य जोड़ दें। उचित तो यही है कि नियत समय पर, नियत विधि-विधान के साथ उपासना की जाय।

🔴 दवा थोड़ी होती है जरा-सी देर में खा ली जाती है पर उसका परहेज उपचार सारे दिन निबाहना पड़ता है। भजन थोड़ा रहे तो हर्ज नहीं पर उसके साथ जुड़े हुए आत्म-शोधन और परमार्थ प्रयोजन के दो महत्वपूर्ण आधार निश्चित रूप से जुड़े रहने चाहिये। इस प्रकार की साधना में असफलता की कोई सम्भावना नहीं वह लक्ष्य तक पहुँचा देने में निश्चित रूप से समर्थ होगी।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 ईश्वर क्या है?

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