शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

👉 दो मुँह वाला जुलाहा

🔴 एक जुलाहा का कर्धा टूट गया और उसके लिए लकड़ी काटने वह पास के जंगल में गया। जंगल में सूखा पेड़ एक ही दीखा और वह उसे काटने लगा। उस पेड़ पर एक यक्ष रहता था । उसने कहा- '' इस पर मेरा निवास है, इसे मत काटो। अपना काम चलाने के लिए कोई वरदान माँग लो।  

🔵 जुलाहा कोई लाभदायक वरदान माँगने की बात सोचने लगा । सोचते- सोचते एक बात समझ में आयी, कि दो हाथों की जगह चार हाथ और एक सिर की जगह दो सिर माँग लिए जाँय। चार हाथों से दुगुना कपड़ा बुना जा सकेगा। दो सिरों पर लाद कर हाट तक दूने वजन की पोटली ले जाई जा सकेगी ।

🔴 यक्ष ने मनोरथ पूरा कर दिया । इस विचित्र आकृति को लेकर वह घर लौटा, तो कौतूहल देखने सारा गाँव इकट्ठा हो गया । पत्नी भयभीत होकर छिप गई । मुहल्ले वालों ने उसे भूत- प्रेत समझा और ईंट-पत्थरों से मार डाला ।साधारण स्तर बनाये रहने में ही भलाई है ।

🌹 प्रज्ञा पुराण भाग 2 पृष्ठ 9

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 मौनं सर्वार्थ साधनम (भाग 1)

🔵 मौन साधना की अध्यात्म-दर्शन में बड़ी महत्ता बतायी गयी है। कहा गया है “मौनं सर्वार्थ साधनम्।” मौन रहने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं। मह...