शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

👉 सद्विचारों की सृजनात्मक शक्ति (भाग 13)

🌹 अद्भुत उपलब्धियों का आधार
🔴 मनुष्य की विचार पुटी में संसार के सारे श्रेय एवं प्रेय सन्निहित रहते हैं। यही कारण है कि मनुष्य ने न केवल एक अपितु असंख्यों क्षेत्रों में चमत्कार कर दिखाये हैं। जिन विचारों के बल पर मनुष्य साहित्य का सृजन करता है उन्हीं विचारों के बल पर कल-कारखाने चलाता है। जिन विचारों के बल पर आत्मा और परमात्मा की खोज कर लेता है उन्हीं विचारों के बल पर खेती करता और विविध प्रकार के धन-धान्य उत्पन्न करता है, व्यापार और व्यवसाय करता है। यही नहीं जिन विचारों की प्रेरणा से वह निर्दय अपराधी भी बन जाता है। इस प्रकार सहज ही समझा जा सकता है कि मनुष्य के सम्पूर्ण व्यक्तित्व तथा कर्तृत्व में उसकी विचार शक्ति ही काम कर रही है।

🔵 एक दिन पशुओं की भांति सारी क्रियाओं में पूर्ण पशु मनुष्य आज इस सभ्यता के उन्नति शिखर पर किस प्रकार पहुंच गया? अपनी विचार-शक्ति की सहायता से विचार शक्ति  की अद्भुत उपलब्धि इस सृष्टि में केवल मानव प्राणी को ही प्राप्त हुई है। यही कारण हैं कि किसी दिन का पशुओं के समकक्ष मनुष्य आज महान उन्नत दशा में पहुंच गया है और अन्य सारे पशु-पक्षी आज भी अपनी आदि स्थिति में उसी प्रकार रह रहे हैं। पशु-पक्षी नीड़ों और निविड़ों में पूर्ववत ही निवास कर रहे हैं किन्तु मनुष्य बड़े-बड़े नगर बनाकर अनन्त सुविधाओं के साथ रह रहा है। यह सब विचार-कला का ही विस्मय है।

🔴 विचारों के बल पर मनुष्य न केवल पशु से मनुष्य बना है वह मनुष्य से देवता भी बन सकता है। और विचार प्रधान ऋषि, मुनि महात्मा और सन्त मनुष्य से देवकोटि में पहुंचे हैं पहुंचते रहेंगे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 आपसी मतभेद से विनाश :-

🔵 एक बहेलिए ने एक ही तरह के पक्षियों के एक छोटे से झुंड़ को खूब मौज-मस्ती करते देखा तो उन्हें फंसाने की सोची. उसने पास के घने पेड़ के नीच...