शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

👉 साधक कैसे बनें? (भाग 1)


👉 युग ऋषि की अमृतवाणी
 
🔴 साधकों में से कई व्यक्ति हमसे ये पूछते रहते हैं-क्या करें? क्या करें? मैं उनमें से हरेक से ये कहता हूँ, ये मत पूछो, बल्कि ये पूछो कि क्या बनें? क्या बनें? अगर आप कुछ बन जाते हैं तो करने से भी ज्यादा कीमती है, पर जो कुछ भी आप कर रहे होंगे, वो सब सही हो रहा होगा। आप साँचा बनने की कोशिश करें। अगर आप साँचा बनेंगे, तो जो भी गीली मिट्टी आपके सम्पर्क में आयेगी, आपके तरीके से आपके ढंग की शकल के खिलौने बनते हुए चले जायेंगे। आप सूरज बनें। आप चमकेंगे और चलेंगे। उसका परिणाम क्या होगा? जिन लोगों के लिये आप करना चाहते हैं वो आपके साथ-साथ चलेंगे और चमकेंगे। सूरज के साथ में नवग्रह और बत्तीस उपग्रह हैं, ये सबके सब लोग चमकते हैं और साथ-साथ चलते हैं, क्योंकि सूरज चलता है। हम चलें।

🔵  हम प्रकाशवान् हों। हम देखेंगे, जिस जनता के लिये हम चाहते थे कि ये हमारा अनुगामी बने और हमारी ये नकल करे, आप देखेंगे कि आप चलते हैं तो दूसरे लोग भी चलते हैं। आप स्वयं भी नहीं चलेंगे और ये अपेक्षा करेंगे कि दूसरे आदमी हमारा कहना मानें, ये मुश्किल बात है। आप गलें और वृक्ष बनें और वृक्ष बनकर के अपने जैसे असंख्य बीज आप पायें, अपने भीतर से आप पैदा कर डालें। हमको बीज की जरूरत है, बीज लाइये, बीज बनिए, कहाँ से बीज लायेंगे? आप गलिए, वृक्ष बनिए और अपने भीतर से ही फल पैदा कीजिए और प्रत्येक फल में से ढेरों के ढेरों बीज पैदा कीजिए, लीजिए बन गये तैयार। अपने भीतर से ही क्यों न बीज बनायें?

🔴 मित्रो! जिन लोगों ने अपने आपको बनाया है, उनको ये पूछने की जरूरत न पड़ी ‘क्या करेंगे?’, उनकी प्रत्येक क्रिया इस लायक बन गई, कि वो सब कुछ कर सकने में समर्थ हो गई। उनका व्यक्तित्व ही इतना आकर्षक रहा कि प्रत्येक सफलता को और प्रत्येक महानता को सम्पन्न करने के लिये काफी था। अर्जुनदेव जी थाली, बरतन साफ करते थे। उन्होंने अपने आपको गुरु के अनुशासन में ढालने का प्रयत्न किया था और जब उनके गुरु तलाश करने लगे कि कौन-से शिष्य को उत्तराधिकारी बनाया जाय? सारे विद्वानों की अपेक्षा, सारे नेता और दूसरे गुण वालों की अपेक्षा उन्होंने अर्जुनदेव को चुना। उनके गुरु रामदास जी ने ये कहा, कि अर्जुनदेव ने अपने आपको बनाया है और बाकी आदमी इस कोशिश में लगे रहे कि हम दूसरों से क्या करायें और स्वयं क्या करें, बल्कि होना ये चाहिए था कि अपने आपको बनाना चाहिए था।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/amart_vachan_jivan_ke_sidha_sutra/sadhak_kese_bane

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