सोमवार, 30 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 90)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

🔴 22. बारात कम समय ठहरे:-- समीप की बारात का एक दिन और दूर की बारात का दो दिन ठहरना पर्याप्त है।

🔵 अधिक दिनों बारात रुकने से सभी की असुविधा होती है और तरह-तरह के खर्च बढ़ते हैं। समय और पैसे की बर्बादी होती है इसलिये कम समय ही बारात का रुकना उचित है।

🔴 23. नेग अपने-अपने चुकायें:-- कहीं-कहीं ऐसे रिवाज अभी भी हैं कि लड़की वाले के ‘काम वालों’ के नेग बेटे वाले को चुकाने पड़ते हैं। कुछ नेग बेटी वाले को बेटे वाले के कर्मचारियों के चुकाने पड़ते हैं। यह झंझट बन्द करके दोनों अपने-अपने कर्मचारियों के खर्चे चुकावें।

🔵 उपरोक्त प्रकार के हेर-फेर से ‘काम वाले’ या तो असन्तुष्ट रहते हैं या अनुचित लाभ लेते हैं। मनोमालिन्य भी बढ़ता है और देखने में भी यह बात भद्दी लगती हैं। उचित यही है कि उनके परिश्रम का ध्यान रखते नेग या वेतन अपने आप ही चुकाया जाय। दूसरे पक्ष पर उसका भार न डाला जाय।

🔴 24. छुट-पुट रस्म रिवाजें संक्षिप्त की जायें:- बार-बार छुट-पुट रस्म रिवाजें चलाने में समय और धन की बर्बादी न की जाय।

🔵 विवाह पक्का होने से लेकर बारात विदाई होने तक ही नहीं वरन् एक साल तक और रिवाज चलाने पड़ते हैं और उनमें बेकार की चीजें खरीद कर इधर से उधर भेजनी पड़ती हैं। इनका खर्च कई बार विवाह जितना ही आ पहुंचता है। इन बेकार बातों को जितना घटाया जा सकता हो तो अवश्य घटाना चाहिये। विवाह के अवसर पर देन-दहेज देने लेने के अनेक ‘ठिक’ बने हुये हैं। इन्हें कम करके (1) पक्की (वर के घर पर) (2) द्वार स्वागत (लड़की के घर) यह दो ही प्रमुख रखें। विदाई, गोद भरना जैसी शुभ समझे जाने वाले रस्म भी स्थानीय लोकाचार के अनुसार की जा सकती हैं।

🔴 हर प्रान्त के सब क्षेत्रों में अपने-अपने ढंग की अगणित प्रकार के अनेकों छुट-पुट रस्म रिवाज हैं। उनमें से कौन-कौन पूरी तरह तुरन्त ही छोड़ देने चाहिये और कौन-कौन किस तरह घटाई जानी चाहिये यह स्थानीय परिस्थितियों को देखकर किया जाय। दृष्टिकोण यही रहे कि जो रूढ़ियां अनावश्यक है उन्हें घटाकर समय और धन की बर्बादी रोकी जाय।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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