सोमवार, 30 जनवरी 2017

👉 आप अपने आपको पहचान लीजिये (भाग 10)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी

🔴 विश्वामित्र को जरूरत पड़ी थी तो उन्होंने दशरथ जी के बच्चे थोड़े समय के लिए माँगे थे कि भाई थोड़े समय के लिए दे दो हमें क्यों? क्योंकि हमें यज्ञ की रक्षा करनी है। कितने दिन में कर दोगे वापिस अरे यही कोई साल छ: महीने में आ जायेंगे। लेकिन साल छ: महीने में कहाँ आये वह तो भगवान् हो गये। घर- घर में पहुँच गये। जन- जन की जिव्हा पर पहुँच गये। तुलसीदास के राम बन गये। बाल्मीकि के राम बन गये और सारे संसार के राम बन गये। कहाँ आये। खैर ठीक है अभी तो हम आपसे कोई बात नहीं कहते थोड़े समय की बात कहते हैं कि आप एक साल का समय निकाल सके तो अच्छी बात है।

🔵 किसके लिए हमने भी विश्वामित्र की तरीके से यज्ञ किये हैं और हमारे यज्ञ सामान्य नहीं होते हमने असामान्य काम किये हैं हमें आप सामान्य आदमियों में गिनना और सामान्य आदमी एक दूसरे से जैसे माँगते जाँचते रहते हैं और सलाह देते रहते हैं आप सामान्य मत मानना हमारी सलाह को भी असामान्य मानना और हमारा जो कहना है उसको भी असामान्य मानना। असामान्य बात कह रहे हैं। असामान्य बात कैसे कह रहे हैं हमारी पिछली जिंदगी पर निगाह डाल लीजिये यह सारी की सारी बातें असामान्य हैं। और इससे आगे जिस काम के लिए हमको आपकी जरूरत पड़ी है वह काम भी बहुत असामान्य है।

🔴 उससे भी बड़ा असामान्य है। पहले की बातें मालूम हैं आपको अरे दो पाँच बातें तो मालूम हुई है आपको सारे के सारे ग्रंथ जो ऋषियों के थे वह कहीं दिखाई भी नहीं पड़ते थे। किसी को मालूम भी नहीं था। हमने काश्मीर लाइब्रेरी में से ढूँढ़ कर मंगाये कहीं कोई से मंगाया पता भी नहीं था गायब हो गये थे। लायब्रेरियों में जला दिये गये अरे वेद तो है ही नहीं वेद तो वह उठा ले गया रावण यहाँ है नहीं वह ।। सारी की सारी बातें सामान्य बात थी कि असामान्य बात थी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/lectures_gurudev/31.4

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