बुधवार, 12 जुलाई 2017

👉 विश्वासघात से प्राण जाना अच्छा।

🔴 महाराणा प्रताप के सदस्यों में एक बड़ा पराक्रमी योद्धा रघुपति सिंह था। वह छिपकर छापे मारने में बड़ा कुशल था। अकबर उससे बड़ा परेशान रहता। उसे पकड़ने के लिए एक बड़े इनाम की घोषणा की हुई थी।

🔵 एक बार रघुपति सिंह का लड़का बीमार पड़ा। वह उसे देखने के लिए वेष बदल कर घर को चला। चित्तौड़ के सभी दरवाजों पर पहरेदार बैठे थे। घर पहुँचने का कोई रास्ता न था। आखिर उसने पकड़े जाने का खतरा उठा कर भी मरणासन्न लड़के का मुँह देखने की ठानी। रघुपति सिंह ने एक पहरेदार के पास जाकर कहा-मेरा नाम रघुपति सिंह है। मैं अपने मरणासन्न बेटे को देखने आया हूँ। इस समय तुम मुझे पकड़ो मत, मैं घर जाकर वापिस तुम्हारे पास आ जाऊँगा तब तुम गिरफ्तार कर लेना। पहरेदार उसकी सच्चाई से बड़ा प्रभावित हुआ। उसने घर जाने की इजाजत दे दी। अपने वचनानुसार रघुपति सिंह लौटा और उसी पहरेदार के पास आकर अपने को गिरफ्तार करा दिया।

🔴 पहरेदार उसे अकबर के पास ले गया। जिस खूँखार योद्धा को पकड़ने के लिए इतने दिन से इतने प्रयत्न हो रहे थे और इतना इनाम घोषित था उसे हाथ पकड़कर एक साधारण पहरेदार लिए आ रहा है और वह चुपचाप चला आ रहा है, इस दृश्य को देखकर अकबर स्तब्ध रह गये। उन्हें अपनी आँखों पर विश्वास न हुआ। उन्होंने पहरेदार से इस अनहोनी बात का कारण पूछा तो उसने सच-सच सब बात कह सुनाई।

अकबर ने पूछा-तुम जब घर चले गये थे तो फिर छिपकर क्यों न भाग गये। पहरेदार के पास आकर अपनी जान जोखिम में क्यों डाली?

🔴 रघुपति सिंह ने कहा-राजपूत अपने वचन पर दृढ़ रहते हैं, वे किसी के साथ विश्वासघात करने की अपेक्षा मरना अधिक अच्छा समझते हैं।

🔵 विश्वासघात मनुष्य का सबसे बड़ा अपराध है। सच्चे लोग कितनी ही बड़ी यहाँ तक कि प्राणों की हानि उठाकर भी शत्रु तक के साथ विश्वासघात नहीं करते।

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