बुधवार, 12 जुलाई 2017

👉 हमारा युग निर्माण सत्संकल्प (भाग 26)

🌹  मर्यादाओं को पालेंगे, वर्जनाओं से बचेंगे, नागरिक कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाजनिष्ठ बने रहेंगे।

🔴 समाज में स्वस्थ परम्परा कायम रहें, उसी से अपनी और सबकी सुविधा बनी रहेगी। यह ध्यान में रखते हुए हम में से प्रत्येक को अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करने में भावनापूर्वक दत्तचित्त होना चाहिए। समाज सबका है। सब लोग थोड़ा-थोड़ा बिगाड़ करें तो सब मिलाकर बिगाड़ की मात्रा बहुत बड़ी हो जाएगी, किंतु यदि थोड़े-थोड़े प्रयत्न सुधार भी बहुत हो सकता है। उचित यही है कि हम सब मिलकर अपने समाज को सुधारने, संचालित करने और स्वस्थ परम्पराएँ प्रचलित करने का प्रयत्न करें और सभ्य, सुविकसित लोगों की तरह भौतिक एवं आत्मिक प्रगति कर सुख-संतोष प्राप्त कर सकें।

🔵 दूसरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अपनी सुविधा और स्वतंत्रता को स्वेच्छापूर्वक सीमित करना, सभ्य देश के सभ्य नागरिकों का कर्तव्य है। स्वच्छता को ही लीजिए, कहीं भी नाक, थूक साफ करना, पान-तम्बाकू की पीक डाल देना, अपने लिए कुछ दूर जाने का कष्ट भले ही बचाए, पर दूसरों को घृणा, असुविधा होगी और यदि अपने को कोई रोग है तो उसका आक्रमण उस गंदगी में आने-जाने वाले पर होगा। भले ही कोई रोके नहीं, पर हमारा नागरिक कर्तव्य है कि दूसरों की असुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वयं उस गंदगी को डालने के योग्य उपयुक्त स्थान तक जाकर उसे साफ करें।

🔴 बीड़ी-सिगरेट हम पीते हैं तो ध्यान रखें कि अस्वच्छ धुँआ छोड़ने से पास में बैठे हुए दूसरे लोगों की तबियत खराब तो नहीं होती, स्वयं ही पता लगाएँ कि किसी को असुविधा तो नहीं होती। यदि हमारी उस क्रिया से दूसरों को तकलीफ होती है, तो सभ्यता का तकाजा यही है कि कहीं अन्यत्र जाकर बीड़ी पिए और धुँआ छोड़ें। सबसे आग्रह यह है कि इस बुरी आदत को छोड़ ही दें।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://literature.awgp.org/book/ikkeesaveen_sadee_ka_sanvidhan/v1.38

http://literature.awgp.org/book/ikkeesaveen_sadee_ka_sanvidhan/v2.6

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 मौनं सर्वार्थ साधनम (भाग 1)

🔵 मौन साधना की अध्यात्म-दर्शन में बड़ी महत्ता बतायी गयी है। कहा गया है “मौनं सर्वार्थ साधनम्।” मौन रहने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं। मह...