रविवार, 15 जनवरी 2017

👉 अध्यात्म एक प्रकार का समर (अमृतवाणी) भाग 8

वाणी का सुनियोजन करिए

🔴 मित्रो! आपकी जिह्वा इस लायक है कि इससे जो भी आप मंत्र बोलेंगे, सही होते हुए चले जाएँगे और सार्थक होते चले जाएँगे, अगर आपने जिह्वा का ठीक उपयोग किया है, तब और आपने दूसरों को बिच्छू के से डंक चुभोए नहीं हैं, दूसरों का अपमान किया नहीं हैं। दूसरों को गिराने वाली सलाह दी नहीं है, दूसरों की हिम्मत तोड़ने वाली सलाह दी नहीं है। जो यह कहते है कि हम झूठ नहीं बोलते। अरे! झूठ तो नहीं बोलता, पर दूसरों का दिल तोड़ता है दुष्ट। हमें हर आदमी की हिम्मत बढ़ानी चाहिए और ऊँचा उठाना चाहिए। आप तो हर आदमी का 'मॉरल' गिरा रहे हैं उसे 'डिमारलाइज' कर रहे हैं। आपने कभी ऐसा किया है, कि किसी को ऊँचा उठाने की बात की हैं। आपने तो हमेशा अपनी स्त्री को गाली दी कि तू बड़ी पागल है, बेवकूफ है, जाहिल है। जब से घर में आई है सत्यानाश कर दिया है। जब से वह आपके घर आई, तब से हमेशा बेचारी की हिम्मत आप गिराते हुए चले गए। उसका थोड़ा- बहुत जो हौसला था, उसे आप गिराते हुए चले गए।

🔵 महाभारत में कर्ण और अर्जुन दोनों का जब मुकाबला हुआ तो श्रीकृष्ण भगवान ने शल्य को अपने साथ मिला लिया। उससे कहा कि तुम एक काम करते रहना, कर्ण की हिम्मत कम करते जाना। कर्ण जब लड़ने के लिए खड़ा हो तो कह देना कि अरे साहब! आप उनके सामने क्या है? कहाँ भगवान और अर्जुन और कहाँ आप सूत के बेटे, दासी के बेटे? भला आप क्या कर लेते हैं? देखिए अर्जुन सहित पाँचों पाण्डव संगठित हैं। वे मालिक हैं और आप नौकर हैं। आपका और उनका क्या मुकाबला? बेचारा कर्ण जब कभी आवेश में आता, तभी वह शल्य ऐसी फुलझड़ी छोड़ देता कि उसका खून ठंडा हो जाता। आपने भी हरेक का खून ठंडा किया है।

🔴 आपने झूठ बोलने से भी ज्यादा जुर्म किया है, एक बार आप झूठ बोल सकते थे। आपके झूठ में इतनी खराबी नहीं थी, जितनी कि आपने हर आदमी को जिसमें आपके बीबी बच्चे भी शामिल हो, आपने हरेक को नीचे गिराया। आपने किसी का उत्साह बढ़ाया, हिम्मत बढ़ाई? किसी की प्रशंसा की? नहीं, आपने जीभ से प्रशंसा नहीं की, हर वक्त निंदा की, इसकी निंदा की, उसकी निंदा की। आप निंदा ही करते रहे। मित्रो! हमारी जीभ लोगों का जी दुखाने वाली, टोंचने वाली नहीं होनी चाहिए। टोंचने वाली जीभ से जब भी हम बोलते हैं, कड़ुवे वचन बोलते हैं। क्या आप मीठे वचन कहकर वह काम नहीं करा सकते, जो आप कड़ुवे वचन बोलकर या गाली देकर कराना चाहते हैं, वह प्यार भरे शब्द, सहानुभूति भरे शब्द कहकर नहीं करा सकते? करा सकते है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/Pravachaan/pravaachanpart4/aadhiyatamekprakarkasamar.3

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...