रविवार, 15 जनवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 16 Jan 2017

🔴 स्वजनों के प्रति हमारी शुभाकाँक्षा कोई कल्पना, शुभकामना या आशीर्वाद मात्र नहीं है, वरन् यह एक तथ्य है जिसे हर किसी के लिए प्राप्त कर लेना संभव है। हमारा निज का जीवन इस बात का साक्षी है कि अपने आपको बदल लेने पर बाहर के दृश्य भी बदल जाते हैं। यो बाहर के सारे लोग सेवा में उपस्थित रहें और सारी विभूतियाँ चरणों में प्रस्तुत कर दें तो भी वासना और तृष्णा का बीमार माया के सन्निपात ज्वर में ग्रस्त व्यक्ति संतुष्ट नहीं हो सकता, पर जिसने अपनी समस्याओं का सही रूप समझ लिया उसके लिए हँसने, उल्लसित एवं संतुष्ट रहने के अतिरिक्त और कोई हड़बड़ी जैसी बात नहीं है।

🔵 अखण्ड ज्योति के प्रत्येक पाठक को प्रातःकाल का समय ईश्वर चिन्तन के लिए और सायंकाल का समय आत्म-निरीक्षण के लिए नियत करना चाहिए। असुविधा और परिस्थितियों के कारण इसमें कुछ व्यतिरेक होना क्षम्य भी कहा जा सकता है, पर शैय्या पर नींद खुलने से लेकर जमीन पर पैर रखने के बीच का जो थोड़ा सासमय रहता है वह अनिवार्य रूप से हममें से हर एक को ईश्वर चिंतन में लगाना चाहिए।

🔴 लेखों और भाषणों का युग अब बीत गया। गाल बजाकर लम्बी-चौड़ी डींग हाँक कर या बड़े-बड़े कागज काले करके संसार के सुधार की आशा करना व्यर्थ है। इन साधनों से थोड़ी मदद मिल सकती है, पर उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। युग निर्माण जैसे महान् कार्य के लिए तो यह साधन सर्वथा अपर्याप्त और अपूर्ण हैं। इसका प्रधान साधन यही हो सकता है कि हम अपना मानसिक स्तर ऊँचा उठाएँ, चरित्र की दृष्टि से उत्कृष्ट बनें।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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