रविवार, 15 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 73)

🌹 गीता के माध्यम से जन-जागरण
🔴 कथा-वाचक परायण के पश्चात् डेढ़-डेढ़ घण्टा प्रवचन किया करेंगे। प्रवचन सब श्लोकों का नहीं, वरन् जो विशेष मार्मिक होंगे, उन्हीं पर होगा। इस मार्मिक श्लोकों के सन्देश की पुष्टि तुलसीकृत रामायण की चौपाइयों से, पौराणिक धर्म-कथाओं से तथा ऐतिहासिक घटना, संस्मरणों से की जाया करेगी। इस शैली से वह कथा प्रत्येक स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध, शिक्षित-अशिक्षित के लिए बहुत ही आकर्षक एवं समझने लायक बन जायगी। गीता को अन्तःकरण में उतारने और व्यवहारिक रूप में परिणत करने के लिए कथा-वाचक मार्ग-दर्शन करेंगे। लोगों को ऐसी प्रेरणा देंगे कि वे कथा सुनने मात्र से स्वर्ग जाने की मूढ़ कल्पना त्याग कर भगवान की शिक्षा को जीवन में उतारें और अर्जुन की तरह सच्चे भक्त कहाने के अधिकारी बनें।

🔵 साथ में रचनात्मक कार्य भी— कथा-वाचक केवल कथा-वाचक न होंगे। वे एक सप्ताह तक जहां भी रहेंगे, वहां संगठन, रचनात्मक कार्यक्रमों का नियोजन, जीवन-निर्माण के लिए परामर्श सामाजिक एवं बौद्धिक क्रान्ति की पृष्ठ भूमि आदि उद्देश्यों की पूर्ति में लगे रहेंगे। कथा तो तीन घण्टे हुआ करेगी। सारा दिन जो शेष रहेगा उसका उपयोग वे जन-सम्पर्क में करेंगे और व्यक्ति निर्माण, परिवार-निर्माण, समाज-निर्माण की प्रवृत्तियों को अग्रसर करने के लिए जो सम्भव हो सकेगा, उसमें पूरी तत्परता के साथ लगे रहेंगे। यह कथा एक प्रकार से युग-निर्माण शिक्षण-शिविरों का काम करेगी। सुनने मात्र से लोगों को सन्तुष्ट न रहने दिया जायगा, वरन् उन्हें कुछ करने के लिए भी प्रेरणा मिलेगी। विवाहों में अपव्यय रोकने, आदर्श विवाहों एवं जातीय संगठनों की व्यवस्था बनाने जैसे कितने ही रचनात्मक कार्यक्रमों का ढांचा खड़ा करने का प्रयत्न किया जायगा। इस प्रकार यह कथा, ‘कथा’ मात्र न रहकर नव-युग की ऊषा उत्पन्न करने का काम करेगी। आशा यह करनी चाहिए कि वहां नव-जागरण का वातावरण उत्पन्न होगा। इनका आयोजन ही इस उद्देश्य से किया गया है तो फिर वैसा ही प्रतिफल भी क्यों न होगा?

🔴 प्रशिक्षण के लिए शिविर— कथा-वाचक श्लोक की व्याख्या करे, किस श्लोक में साथ रामायण की किन चौपाइयों, किन दृष्टान्तों, अन्तर्कथाओं का खांचा मिलावें, इसकी सांगोपांग रूप-रेखा बना ली गई है। श्लोकों का पद्यानुवाद हो गया है। यह सब साहित्य तीन बड़ी पाठ्य-पुस्तकों में छापा भी जा रहा है। इसकी व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए इस वर्ष कार्तिक, पौष, फाल्गुन और बैसाख में एक-एक महीने के चार शिविर मथुरा में रखे गये हैं। कथा का क्रम, रचनात्मक कार्यों का ढंग, प्रवचन की शैली, कथा वाचक का आदर्श एवं उद्देश्य जैसे विषयों की शिक्षा के लिए यों एक महीने का समय बहुत ही कम है, पर लोगों की व्यस्तता को देखते हुए एक ‘स्वल्प कालीन शिक्षण’ की तरह अभी वैसी ही व्यवस्था बनाई गई है। जिन्हें अवकाश होगा वे उपरोक्त अभ्यास के लिए अधिक समय भी ठहर सकेंगे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 आदेश की विचित्र पालना, एक उलझन मे एक सुलझन मे

🔷 एक बार एक महात्मा जी के दरबार मे एक राहगीर आया और उसने पुछा की हॆ महात्मन सद्गुरु की आज्ञा का पालन कैसे करना चाहिये? 🔶 महात्मा जी ने...