रविवार, 15 जनवरी 2017

👉 गायत्री विषयक शंका समाधान (भाग 25) 16 Jan

🌹 अनुष्ठान के नियमोपनियम

🔴 साधारण स्तर का जीवनक्रम अपनाकर की गई उपासना नित्य नियम है। अनुष्ठान का स्तर विशेष है—उसके साथ अनेकों प्रतिबन्ध, नियम, विधान जुड़े रहते हैं। अतएव उसका प्रतिफल भी विशेष होता है। पुरश्चरण का विशेष विधि-विधान है। उसमें अनेक प्रयोजनों के लिए अनेक मन्त्रों एवं कृत्यों का प्रयोग करना पड़ता है। वह कर सकना उसे प्रयोजन के लिए, प्रशिक्षित संस्कृतज्ञों के लिए ही सम्भव है। साधारणतया अनुष्ठानों का ही प्रचलन है सर्वसाधारण के लिए वे ही सरल है।

🔵 अनुष्ठान तीन स्तर के हैं। लघु, चौबीस हजार जप का 9 दिन में सम्पन्न होने वाला। मध्यम, सवालक्ष जप का 40 दिन में होने वाला। उच्च, 24 लाख जप का—1 वर्ष में होने वाला। लघु में 27 माला, मध्यम में 33 और उच्च में 66 माला नित्य जपनी होती हैं। औसत एक घंटे में 10-11 माला जप होता है। इस हिसाब से लघु और मध्यम में प्रायः तीन घंटे और उच्च में छह घंटे नित्य लगते हैं। यह क्रम दो या तीन बार में भी थोड़ा-थोड़ा करके पूरा हो सकता है। यों प्रातःकाल का ही समय सर्वोत्तम है। शरीर, वस्त्र, तथा उपकरणों की शुद्धता, षट्कर्म, पंचोपचार, जप, ध्यान, सूर्यार्घदान—यही उपक्रम है। पूजा वेदी पर छोटा जलकलश और अगरबत्ती रखकर (जल, अग्नि की साक्षी मानी जाती है), चित्र, प्रतिमा का पूजन, जल, अक्षत, चन्दन, पुष्प, नैवेद्य से किया जाता है। आवाहन, विसर्जन के लिए आरम्भ और अन्त में गायत्री मंत्र सहित नमस्कार किया जाता है।

🔴 जप के साथ हवन जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में जब हर प्रकार की सुविधा थी तब जप का दशांश हवन किया जाता था। आज की स्थिति में शतांश पर्याप्त है। चौबीस हजार के लिए 240, सवा लक्ष के लिए 1250, चौबीस लक्ष के लिए 24 हजार आहुतियां देनी चाहिए, यह एक परम्परा है। स्थिति के अनुरूप आहुतियों की संख्या न्यूनाधिक भी हो सकती हैं। पर होनी अवश्य चाहिए। अनुष्ठान में जप और हवन दोनों का ही समन्वय है। गायत्री माता और यज्ञ पिता का अविच्छिन्न युग्म है। दो विशिष्ट साधनाओं में दोनों को साथ रखकर मिलाना होता है। हवन हर दिन भी हो सकता है और अन्तिम दिन भी। हर दिन न करना हो तो जितनी माला हों उतनी आहुतियां। अन्तिम दिन करना हो तो समूचे जप का शतांश। यज्ञवेदी पर कई व्यक्ति बैठते हैं तो सम्मिलित आहुतियों की गणना होती है। जैसे हवन पर 5 व्यक्ति बैठे हों तो उनके द्वारा दी गई 100 आहुतियां 500 मानी जायेंगी। 240 आहुतियों के लिए 6 व्यक्ति एक साथ बैठकर हवन करें तो 40 बार आहुतियां प्रदान से ही वह संख्या पूरी हो जायगी।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...