शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 77)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

आदर्श विवाहों की एक रूपरेखा नीचे प्रस्तुत की जा रही है—इसके जितने अंश जहां पूरे किये जा सकें वहां उसके लिये पूरा-पूरा प्रयत्न होना चाहिए।

🔴 1— वर-कन्या की आयु:- कन्या की आयु 14 और वर की 18 से कम न हो।
इससे कम आयु के विवाह कानून में भी ‘‘बाल विवाह-विरोधी एक्ट’’ के अनुसार दण्डनीय है और वर-कन्या के स्वास्थ को दुर्बल बनाने वाले हैं। इससे कम आयु के बच्चों का विवाह करना उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करना है। इसलिए बाल विवाहों से सर्वथा बचा जाय। उत्तम विवाह तो 20 वर्ष की कन्या तथा 25 वर्ष के लड़कों का है। विवाह की जल्दी न करके बच्चों को शिक्षा तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से विकसित होने देना चाहिये और परिपक्व आयु के होने पर ही उनका विवाह करना चाहिए।

🔵 2— अनमेल विवाह न हो:- कन्या वर में आयु शिक्षा, स्वभाव आदि की दृष्टि से उपयुक्तता का ध्यान रखा जाय। विवाह दोनों की सहमति से हो।
कन्या से वर की आयु 10 वर्ष से अधिक बड़ी न हो। जिनमें इससे अधिक अन्तर होता है वे अनमेल विवाह कहे जाते हैं। अनमेल विवाहों से दाम्पत्ति जीवन में गड़बड़ी उत्पन्न होती है। लड़की-लड़कों को एक दूसरे की स्थिति से भली प्रकार परिचित करा दिया जाय और वे बिना दबाव के उसे स्वीकार करते हों तो ही उसे पक्का किया जाय। अभिभावक यथा सम्भव उपयुक्त जोड़ा मिलाने का अधिक से अधिक ध्यान रखें।

🔴 3— दो परिवारों की सांस्कृतिक समानता:- वर-पक्ष और कन्या-पक्ष के परिवारों में विचार, आदर्श आहार-विहार, व्यवसाय आदि की समानता रहे।
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य आदि वर्णों के अन्तर्गत जो उपजातियां हैं, उनमें विवाह की रोक न हो। इससे उपयुक्त लड़की-लड़के ढूंढ़ने का क्षेत्र अधिक व्यापक हो जायगा। आजकल एक-एक वर्ण के अन्तर्गत दसियों उपजातियां हैं और वे परस्पर रोटी बेटी व्यवहार नहीं करतीं। कोई-कोई तो अपने को ऊंच और दूसरी समान उपजाति वाले को नीच मानते हैं। इस तरह की रूढ़िवादिता अब समाप्त करने की आवश्यकता है। हिन्दू समाज का चार भागों में बंटा रहना भी कम नहीं है, इससे अधिक खण्डों में उसे बांटने से हर दृष्टि से हम कमजोर होते चले जायेंगे। विवाह सम्बन्धी अनेक समस्याएं तो इसी प्रतिबन्ध के कारण उपजी हैं।

🔵 यह समानता वर-कन्या को एक दूसरे के लिये अनुकूल रखने में सहायक होती है। शाकाहारी, मांसाहारी, बहुत दूर, ठण्डे प्रान्त, गरम प्रान्त, आस्तिक, नास्तिक, भिन्न भाषा-भाषी, भिन्न धर्मावलंबी, भारतीय ढंग, पश्चिमी ढंग, सुधारवादी, अमीर-गरीब जैसी भिन्नताएं परिवारों में रहेंगी तो उनमें पले हुये लड़की-लड़के आपस में ठीक तरह घुल-मिल न सकेंगे। इसलिये समान स्थिति के सम्बन्ध करने में ही ध्यान रखा जाय। लोग अपने से बहुत अधिक ऊंचे स्तर के घर या लड़के न ढूंढ़ें।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 आपसी मतभेद से विनाश :-

🔵 एक बहेलिए ने एक ही तरह के पक्षियों के एक छोटे से झुंड़ को खूब मौज-मस्ती करते देखा तो उन्हें फंसाने की सोची. उसने पास के घने पेड़ के नीच...