शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

👉 आप अपने आपको पहचान लीजिये (भाग 2)

🔴 इसी प्रकार से ढेरों की ढेरों बातें ऐसी होती है जिसमें गलती होती है विश्वामित्र आये और कहने लगे अपने दोनों बच्चों को हमारे सुपुर्द कर दीजिये हमको यज्ञ की रक्षा के लिये इनकी जरूरत है सारे घर में कुहराम मच गया मंत्रियों ने विरोध किया नौकरों ने विरोध किया हर एक ने विरोध किया अरे जरा- जरा से बच्चे हो इनको कहाँ ले जाते हो राक्षसों से लड़ाने ले जा रहे हो अरे यह राक्षसों से लड़ेंगे क्या। अरे यह तो मारे जायेंगे बेचारे अरे यह कैसा विश्वामित्र आ गया और कैसे इनके गुरु हैं सब लोगों ने एकदम शुरू से आखिरी तक निंदा की। लेकिन वास्तव में वह नफे की बात थी।

🔵 विश्वामित्र आये थे उस समय तो नहीं बताया था उन्होंने लेकिन पीछे बताया कि हमने तुम्हें बला विद्या और अतिबला विद्या दोनों को सिखाने के लिये हम लाये हैं गायत्री और सावित्री का रहस्य सिखाने के लिए लाये हैं इससे आपको दोनों फायदे होंगे। रामचंद्र जी को ढेरों के ढेरों फायदे हुए शंकर जी का धनुष बहुत भारी था उसको कोई उठा तक नहीं सकता था कितने राजा लगे थे लेकिन उठाने में समर्थ नहीं हो सके लेकिन रामचंद्र जी ने उठाया और उठाया ही नहीं तोड़कर फेंक दिया। और सीता जी से ब्याह हो गया। सीता जी से ब्याह करने के लिए रावण से लेकर कितने राजा महाराजा बैठे हुए थे सबके पल्ले नहीं पड़ी लेकिन रामचंद्र जी के पल्ले पड़ गई।

🔴 रावण जो न जाने कितने को तंग कर रहा था जिसकी सोने की लंका थी उस सारी की सारी को रामचंद्र जी ने तोड़ मरोड़कर फेंक दिया। और रामराज्य की स्थापना करने में समर्थ हो गये, कितने फायदे हुए। फायदा करना आये थे कि नुकसान करने आये थे। बताइये आप। मेरे ख्याल से अगर आपको दूर को देखना नहीं आता है तुरन्त का देखना आता है तो आप भी उन्हीं नौकरों की तरह से कहेंगे जो दशरथ जी के यहाँ नौकरी करते थे और उन सबने कहा था भेजना ठीक नहीं है रानियों ने मना किया था बच्चों को भेजना ठीक नहीं है। लेकिन वो तो नहीं माने और ले गये और ले गये तो नफा हुआ नुकसान नहीं हुआ। रामचंद्र जी की बात मालूम है न आपको मालूम है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/lectures_gurudev/31

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