गुरुवार, 15 जून 2017

👉 नारी जागरण की दूरगामी सम्भावनाएँ (भाग 4)

🔵 कहा गया है कि “अखण्ड ज्योति” परिजन स्वयं पाँच-पाँच के मण्डलों में गठित हों और पाँच से पच्चीस बन कर मण्डल को पूर्णता तक पहुँचाएँ। साथ ही कहा गया है कि वे अपने परिवार तथा संपर्क क्षेत्र में से ढूंढ़ खोज कर पाँच प्रतिभाशाली महिलाओं की एक मण्डली बनाएँ। वे भी परस्पर संपर्क साधते हुए पाँच से पच्चीस बनने का लक्ष्य प्राप्त करें। साप्ताहिक सत्संग उनके लिए भी उसी प्रकार अनिवार्य किया गया है जैसा कि पुरुषों द्वारा सम्पन्न किया जाता है। इतना बन पड़ने पर ही यह माना जाएगा कि पुरुषों का एवं नारियों का सतयुग की वापसी के लिए खड़ा किया जाने वाला प्रथम प्रयास जड़ पकड़ गया।

🔴 पुरुषों को नैतिक, बौद्धिक, सामाजिक क्रान्ति की तैयारी करनी है। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज की संरचना की भी। व्यक्ति, परिवार और समाज के तीनों ही क्षेत्रों में सत्प्रवृत्ति संवर्धन और कुरीति उन्मूलन की बहुमुखी प्रवृत्तियों को जन्म देना और मार्गदर्शन करना है। इसके लिए कार्यकर्ताओं की योग्यता और परिस्थितियों की आवश्यकता से तालमेल बिठाते हुए अनेक प्रकार के छोटे-बड़े कार्यक्रम हाथ में लिए जाने है, जिनके लिए आवश्यकता हो तो शांतिकुंज के साथ विचार विनिमय भी करते रहा जा सकता है।

🔵 महिलाओं के लिए सामूहिक सत्संगों को सुनिश्चित बनाने के उपरांत शिक्षा संवर्धन, आर्थिक स्वावलम्बन सम्बन्धित गृह उद्योग, संगीत अभ्यास से मुखर होने और अभिव्यक्तियों को प्रकट कर सकने का अभ्यास, कुरीति उन्मूलन के लिए छोटे-बड़े आयोजन तथा परिवार निर्माण की समुचित योग्यता प्राप्त करना सभी महिला मण्डलों के लिए समान कार्यक्रम बना है। इससे आगे उन्हें भी ऐसा कुछ कर दिखाना है जिससे मात्र व्यक्तिगत स्थिति ही न सुधरे वरन् व्यापक नारी समस्याओं के समाधान के लिए अभीष्ट तंत्र खड़े करने का सरंजाम जुट सकें। असहाय महिलाओं को समर्थ बनाना और उन्हें लोक सेविका बनाने का कार्यक्रम भी इसी योजना को निकट भविष्य में कार्यान्वित किया जाने वाला बड़ा कदम है, जो अपने समय पर अपने ढंग से निरंतर उठते रहेंगे, गति पकड़ते रहेंगे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1988 पृष्ठ 60

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