गुरुवार, 15 जून 2017

👉 कायाकल्प का मर्म और दर्शन (भाग 1)

🌹 गायत्री मंत्र हमारे साथ-साथ,
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

देवियो! भाइयो!! 

🔴 बात कल्प-साधना की बात चल रही थी। आप कल्प की इच्छा के लिए आये हैं न। कल्प में आपके सारे शरीर को बदलना तो मुमकिन नहीं है; पर आपका मन बदल सकता है। आपका स्तर बदल सकता है, आपका भविष्य बदल सकता है। आपका भूतकाल जो कि घिनौना भूतकाल, खाली हाथ वाला भूतकाल, चिंताजनक वाला भूतकाल रहा है, वह ऐसे उज्ज्वल भविष्य में बदल सकता है, जिसकी कि आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। भूतकाल कैसा रहा है? आपको अपनी आँख से कैसा दीखता है? क्या कहूँ मैं आपसे!आपने अपना मकान बना लिया, लड़कों के लिए धन इकट्ठे कर दिये, लड़के को वकील बना दिया, लड़कियों की शादी में ढेरों पैसा खर्च कर दिया। आप अगर इन्हीं बातों को अपनी सफलता की निशानी मानते हैं; तो मानते रहिए, मैं कब कहता हूँ कि यह आपकी सफलताएँ नहीं है; लेकिन मेरी दृष्टि में यह सफलताएँ नहीं हैं।

🔵 आपकी सफलता रही होती तब, जब आप दूसरे नानक रहे होते, कबीर रहे होते, रैदास रहे होते, विवेकानन्द रहे होते, गाँधी हो गए होते, तो मैं आपके भूतकाल को शानदार मानता; लेकिन भूतकाल कैसा था? जानवरों का जैसा होता है; पेट भरते रहते हैं, बच्चे पैदा करते रहते हैं। वह भी तो आपको इतिहास है। पिछले दिनों आपने क्या किया? बताइए? एक तो आपने पेट भरा और दूसरे औलाद पैदा की है। औलाद की जिम्मेदारियाँ सिर पर आएँगी ही और आपको वहन करना ही पड़ेगा। क्यों करना पड़ेगा? जब आपने गुनाह किया है, तो उसकी सजा तो आपको ही भुगतनी पड़ेगी। आपने बच्चे पैदा किए हैं न, तब सजा भी भुगतिए।

🔴 सारी जिंदगी भर उनके लिए कमाइए, कोल्हू के बैल की तरह चलिए, पीसिए अपने आपको, निचोड़िए अपने आपको, निचोड़ करके उनके खिलाइए; क्योंकि आपने गुनाह तो किया ही है। एक औरत को हैरान किया है न, बेचारी ने आपकी वजह से नौ महीने पेट में वजन रखा, कष्ट उठाया, छाती का दूध पिलाया, फिर आप क्यों कष्ट नहीं उठायेंगे? आप भी कोल्हू में चलिए, आप भी मुसीबत उठाइए। आपको भी बीस साल की कैद होती है। बीस साल का बच्चा जब तक न हो जाए, तब तक आप कैसे पीछा छुड़ा पायेंगे। यही तो भूतकाल है आपका! यही तो आपकी परिणति है। यही तो आपने पुरुषार्थ किया है। कोई ऊँचे स्तर से विचार करेंगे, तो आपके भूतकाल को कैसे प्रोत्साहित करेगा?

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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