गुरुवार, 15 जून 2017

👉 पाप का फल भोगना पड़ता है।

🔵 प्रसिद्ध चीनी यात्री फाहियान जब बालक था तो उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए एक बौद्ध मठ में भेज दिया। मठ में धर्म-शिक्षा के साथ खेती भी की जानी थी और उसका कार्य मठ के निवासी हो करते थे।

🔴 एक दिन फाहियान अन्य बालकों के साथ एक धान के खेत को काटने के लिए भेजा गया। जब वे धान को काट रहे थे तो कुछ चोर बल पूर्वक वहाँ घुस आये और उन्होंने बालकों को डरा कर वहाँ से भगा दिया। पर फाहियान वहाँ से नहीं हटा, थोड़ी दूर पर खड़ा होकर कुछ सोचने लगा।

🔵 चोरों ने सोचा कि वह अकेला क्या कर सकता है, अतः उसकी तरफ ध्यान न देकर उन्होंने तमाम फसल काट डाली और गट्ठर बाँध कर ले जाने को तैयार हुये।

🔴 यह देखकर फाहियान बोला-भाइयों आपकी आधी से अधिक अवस्था समाप्त हो चुकी है। इस प्रकार का पाप कर्म करने से परलोक से आपको क्या गति होगी? पिछले जन्म में जो पाप किये थे उनके फल से आज दरिद्रावस्था से पड़े हो। अब फिर वैसे ही कर्म करके अपने लिए विष वृक्ष क्यों बो रहे हो?”

🔵 फाहियान इतना कह कर मठ की तरफ चल दिया, पर उस छोटे बालक की बातों का चोरों के मन पर इतना असर हुआ कि वे कटे हुए धान को वहीं छोड़ गये और सदा के लिए चोरी को त्याग दिया।

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