मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 5 April

🔴 जीवन का अर्थ है- एक ऐसी तत्परता जो निरन्तर यह खोजती रहे कि कहाँ पर कुछ भलाई की जा सकती है। प्रतिक्षण और अधिक उद्दात्त व्यक्ति बनने और अपनी आत्मा की पवित्रता विकसित करने के लिये यदि प्रयत्नशील हैं, तब यह कहा जा सकता है कि आपके जीवन की दिशा सही है। अपने परमात्मा को केवल हृदय से ही प्रेम नहीं करना वरन् सारी आत्मा, सारी बुद्धि और हाथों से भी करनी चाहिये, तभी जीवन को परिपूर्ण बना सकते हैं।

🔵 श्रेष्ठ साधक अपनी साधना में अपने मार्गदर्शक को प्रधानता देकर चलते हैं। मार्ग-दर्शक सन्तोष को ही अपनी प्रगति का चिन्ह मानते हैं। एक बार लक्ष्य निर्धारण करके फिर कितनी सीढ़ियाँ किस प्रकार चढ़ना है, यह मार्ग-दर्शक के ऊपर छोड़कर साधक लग जाते हैं, अपनी पूरी शक्ति के साथ निर्देश पूरा करने में। इस स्थिति में हर कदम पर उन्हें निर्देशक के सन्तोष का ही ध्यान रहता है। मानो वही मूल लक्ष्य हो।

🔴 संसार के समस्त अग्रणी लोग आत्म-विश्वासी वर्ग के होते हैं। वे अपनी आत्मा में, अपनी शक्तियों में आस्थावान रहकर कोई भी कार्य कर सकने का साहस रखते हैं और जब भी जो काम अपने लिए चुनते हैं, पूरे संकल्प और पूरी लगन से उसे पूरा करके छोड़ते हैं। वे मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा अथवा अवरोध से विचलित नहीं होते हैं। आशा, साहस और उद्योग उनके स्थायी साथी होते हैं। किसी भी परिस्थिति में वे इनको अपने पास से जाने नहीं देते।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 ईश्वर क्या है?

🔶 टेहरी राजवंश के 15-16 वर्षीय राजकुमार के हृदय में एक  प्रश्न उठा  ईश्वर क्या है? 🔷 वह स्वामी रामतीर्थ के चरणों में पहुँचा और प्रणाम ...