मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 12 April

🔴 अपने संकुचित दृष्टिकोण से जब हम संसार को देखते हैं तो वह बड़ा संकीर्ण और तुच्छ दिखाई पड़ता है। जब उसे स्वार्थ दृष्टि से देखा जाता है तब वह स्वार्थ ग्रस्त दीखता है। किन्तु जब उसे उदार और मित्रता की दृष्टि से देखा जाता है, तो संसार में हमें मित्रता उदारता और सज्जनता की भी कमी दिखाई नहीं देती ।

🔵 आज का नया जन्म अपने लिए एक अनमोल अवसर है। कहते हैं कि चौरासी लाख योनियों के बाद एक बार मनुष्य शरीर मिलता है, उसका सदुपयोग कर लेना ही शास्त्रकारों ने सबसे बड़ी बुद्धिमत्ता मानी है। अस्तु हमें प्रातःकाल चारपाई पर पड़े पड़े ही विचारना चाहिए कि आज का दिन अनमोल अवसर है, उसे अधिक से अधिक उत्कृष्टता के साथ व्यतीत करना चाहिए। कोई भूल, उपेक्षा अनीति, दुर्बुद्धि उसमें न रहे। आदर्शवादिता का सद्भावना और सदाशयता का उसमें अधिकाधिक समावेश रहे ऐसा दिन भर का कार्यक्रम बना कर तैयार किया जाय।

🔴 निरर्थक काम करते रहने वाले की भर्त्सना की जाती है- उसे मूर्ख ठहराया जाता है क्योंकि कर्तृत्व शक्ति को उपयोगी प्रयत्नों में लगाने की अपेक्षा वह उसे बर्बाद करता है। इससे समय एवं श्रम शक्ति नष्ट होती है और उससे जो लाभ उठाया जा सकता था उससे वंचित रहना पड़ता है। ठीक इसी प्रकार विचार शक्ति की बर्बादी को भी हानिकारक और अबुद्धिमत्तापूर्ण ठहराया जाना चाहिए। चिन्तन वस्तुतः अदृश्य रूप से किया जाने वाला कर्म ही है। क्रिया शक्ति को बर्बाद करना और विचार शक्ति को निरर्थक बखेरना वस्तुतः एक ही भूल के दो रूप है।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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