शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

👉 आराम नही काम चाहिए

🔴 एशिया के उद्योगशील और समृद्ध देशों में इन दिनों जापान की सर्वत्र चर्चा है। जानना चाहिये कि वही की समृद्धि का मूल कारण दैवी अनुकंपा नहीं वह श्रम और ईमानदारी है, जिसे जापानी नागरिक अपनी विरासत समझते है।

🔵 कुछ समय पूर्व एक अमेरिकन फर्म ने जापान में अपना व्यापार खोला। अमेरिका एक संपत्र देश है, वहाँ थोडे समय काम करके कम परिश्रम में भी लोग क्स्स्फी पैसा कमा लेते है, पर यह स्थिति जापान में कहाँ, वहाँ के लोग मेहनत-कश होते है, परिश्रम को वे शारीरिक संपत्ति मानते है। "जो मेहनत नही करता, वह अस्वस्थ होता है और समाज को विपन्न करता है" यह धारणा प्रत्येक जपानी नागरिक में पाई जाती है।

🔴 फर्म बेचारी को इसका क्या पता था? दूसरे देश में जाकर लोग आमतौर से अपने देश की उदारता ही दिखाने का प्रयास करते हैं। अमेरिका के उद्योगपति ने भी वही किया। उसने कर्मचारी जापानी ही रखने का फैसला किया, साथ ही यह भी निश्चय किया कि अमेरिकन कानून के अनुसार सप्ताह में केवल ५ दिन काम होगा। शनिवार और रविवार की छुट्टी रहेगी।

🔵 साहब बहादुर का विश्वास था कि इस उदारता से जापानियों पर बडा़ असर होगा, वे लोग प्रसन्न होकर दुआएँ देगे। पर एक दिन जब उन्होंने देखा कि फर्म के सभी कर्मचारी विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। अधिक से अधिक सहूलियतें दी गई हैं, फिर भी कर्मचारी विरोध कर रहे हैं, फर्म के मैनेजर एकाएक यह बात समझ नहीं सके।

🔴 यह तो अल्पबुद्धि के लोग होते हैं, जो अधिक आराम पाना सौभाग्य मानते हैं, पर आलस्य और अकर्मण्यता के कारण जो रोग और दारिद्रय छाए रहते हैं, उनकी ओर कदाचित् ध्यान ही नहीं जाता। यह बात समझ ली गई होती, तो आज सैकड़ों भारतवासी भी रोग, अस्वस्थता और कर्ज आदि से बच गए होते।

🔵 यह गुरु मंत्र कोई जापानी भाइयों से सीखे। आखिर विरोध का कारण जानने के लिये मैनेजर साहब ने कर्मचारियों के पास जाकर पूछा- ''आप लोगों को क्या तकलीफ है''।

🔴 तकलीफ! उन लोगों ने उत्तर दिया- 'तकलीफ यह है कि हमें दो छुट्टियाँ नही चाहिए। हमारे लिए एक ही छुट्टी पर्याप्त है।'' ऐसा क्यों ?'' पूछने पर उन्होंने आगे बताया आप जानते होंगे कि अधिक आराम देने से हमारी खुशी बढे़गी तो यह आपका भ्रम हे। अधिक छुट्टियाँ होने से हम आलसी बन जाएँगे। परिश्रम करने में हमारा मन नहीं लगेगा और उसका दुष्प्रभाव हमारे वैयक्तिक और राष्ट्रीय जीवन पर पड़ेगा। हमारा स्वास्थ्य खराब होगा। छुट्टी के कारण इधर उधर घूमने में हमारा अपव्यय बढेगा। जो छुट्टी हमारा स्वास्थ्य गिराए और हमे आर्थिक भार से दबा दे- ऐसी छुट्टी हमारे जीवन में बिलकुल नहीं खपती।

🔵 अमेरिक उद्योगपति उनकी इस दूरदर्शिता और आदर्शवाद पर मुस्कराए बिना न रह सके। उन्हें कहना ही पडा़ जापनी भाइयों! आपकी समृद्धि और शीघ्र सफलता का रहस्य हम आज समझे। सचमुच परिश्रम और पुरुषार्थ ही समृद्धि की कुंजी है। आप लोग कभी निर्धन ओर अस्वस्थ नहीं रह सकते।''

🔴 न जाने यह बात हमारे देश वाले कब तक सीख पाएँगे ?

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 21, 22

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