मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

👉 व्यवस्थित जीवन की कुंजी- समय की पाबंदी

🔴 नियमपूर्वक तथा समय पर काम करने से सब काम भली प्रकार हो जाते हैं। जो लोग समय के पाबंद नही होते, उनके आधे काम अधूरे और हमेशा धमा-चौकडी़ मची रहती है। कम अच्छी तरह समाप्त हो जाता है तो उत्साह भी मिलता है और प्रसन्नता भी होती है। काम पूरा न होने से असंतोष और अप्रसत्रता होती है। विचारवान् व्यक्ति सदैव समय का पालन करते है। इस तरह दूसरी व्यवस्थाओं और प्रबंध के लिये भी समय बचाए रखते है।

🔵 अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन के जीवन की एक घटना से समय की पाबंदी की उपयोगिता का प्रकाश मिलता है। एक बार उन्होंने कुछ मेहमानों को तीन बजे भोजन के लिए आमंत्रित किया। साढे़ तीन बजे सैनिक कमांडरो की एक आवश्यक बैठक मे भाग लेना था।

🔴 नौकर जानता था कि जार्ज साहब समय की नियमितता को कितनी दृढता से निबाहते है ? ३ बजे ठीक मेज तैयार हो गई सूचना दी गई तीन बज गये अभी तक मेहमान नहीं आए।

🔵 एकबारगी वाशिंगटन के मस्तिष्क मे एक चित्र उभरा मेहमानों की प्रतीक्षा न की गई तो वे अप्रसन्न हो जायेंगे तो फिर क्या बैठक स्थगित करें। यह समय सारे राष्ट्र के जीवन से संबधित है। क्या अपनी सुविधा के लिये राष्ट्र का अहित करना उचित है, क्या राष्ट्रहित को दो-तीन व्यक्तियों की प्रसन्नता के लिए उत्सर्ग करना बुद्धिमानी होगी।

🔴 हृदय ने दृढतापूर्वक कहा नहीं, नहीं जब परमात्मा अपने नियम से एक सेकण्ड आगे-पीछे नही होता, जिस दिन जितने बजे सूरज को निकलना होता है, बिना किसी की परवाह किये वह उतने ही समय उग आता है तो मुझे ही ईश्वरीय आदेश का पालन करने मे संकोच या भय क्यों होना चाहिये।

🔵 ठीक है नौकर को संबिधित कर उन्होंने कहा- शेष प्लेटें उठा लो, हम अकेले ही भोजन करेंगे। मेहमानो की प्रतीक्षा नहीं की गई।

🔴 आधा भोजन समाप्त हो गया तब मेहमान पहुँचे। उन्हें बहुत दुःख हुआ देर से आने का कुछ अप्रसन्नता भी हुई, वे भोजन में बैठ गये, तब तक बाशिगटन ने अपना भोजन समाप्त किया और निश्चित समय विदा लेकर उस बैठक में भाग लिया।

🔵 मेहमान इसी बात पर रुष्ट थे कि उनकी १५ मिनट प्रतीक्षा नहीं की गई अब और भी कष्ट हुआ क्योकि मेहमान से पहले वे भोजन समाप्त कर वहाँ से चले भी गये। किसी तरह भोजन करके वे लोग भी अपने घर लौट गये।

🔴 सैनिक कमांडरो की बैठक में पहुँचने पर उन्हे पता चला कि यदि वे नियत समय पर नही पहुँचते तो अमेरिका के एक भाग से भयंकर विद्रोह हो जाता। समय पर पहुँच जाने के कारण स्थिति संभाल ली गई और एक बहुत बड़ी जन-धन की हानि को बचा लिया गया।

🔵 इस बात का पता कुछ समय बाद उन मेहमानों को भी चला तो उन्हें समय की नियमित्त्ता का महत्व मालूम पडा। उन्होंने अनुभव किया कि प्रत्येक काम निश्चित समय पर करने, उसमें आलस्य प्रमाद या डील न देने से भयंकर हानियों को रोका जा सकता है और जीवन को सुचारु ढंग से जिया जा सकता है।

🔴 वे फिर से राष्ट्रपति के घर गये और उनसे उस दिन हुई भूल की क्षमा माँगी। राष्ट्रपति ने कहा- 'इसमें क्षमा जैसी तो कोई बात नहीं है पर हाँ, जिन्हें अपने जीवन की व्यवस्था, परिवार, समाज और देश की उन्नति का ध्यान हो, उन्हें समय का कडाई से पालन करना चाहिए।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 40, 31

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