मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

👉 पूजा-उपासना के मर्म (भाग 2)

👉 युग ऋषि की अमृतवाणी

🔴 मित्रो! यह सिंहासन है और इस पर हर आदमी को बैठने का हक नहीं। उस सिंहासन पर बैठने का हक उस आदमी को है, जिसने केवल अपनी जबान से, जबान तक सीमित नहीं रखा गायत्री मंत्र को। उँगलियों तक सीमित नहीं रखा गायत्री मंत्र को, बल्कि इस अमृत को पीता हुआ चला गया और अपने हृदय के अन्तरंग से लेकर के रोम-रोम में जिसने परिप्लावित कर लिया। उसको ये चमत्कार देखने का हक है और वो आदमी ये कह सकता है कि हमने गायत्री मंत्र जपा था और हमको फायदा नहीं हुआ, ऐसा आदमी आये मेरे पास और मैं कहूँगा आपको फायदा दिलाने की मेरी जिम्मेदारी है और मैं अपना तप, अपने पुण्य के अंश काटकर के आपको दूँगा और आपको ये यकीन और ये विश्वास करा करके जाऊँगा।

🔵 गायत्री मंत्र के माने है भावनाओं का परिष्कार, भावनाओं का परिष्कार जो मुझे मेरे गुरु ने सिखाया था। मित्रो! मेरे रोम-रोम में समाया हुआ है गायत्री महामंत्र बुद्धि का संशोधन करने का मंत्र। मैंने सारा का सारा दिमाग इस मार्ग पर खर्च किया कि मेरी अकल, मेरी विचारणाएँ, मेरी इच्छाएँ, मेरी आकांक्षाएँ, मेरा दृष्टिकोण और मेरे विचार करने के ढंग, मेरी आकांक्षाएँ और मेरी ख्वाहिशें, क्या उस तरह की हैं, जैसे कि एक गायत्री भक्त की होनी चाहिए। मैं अपने आपको बराबर कसता रहा और अपने आपकी परख बराबर करता रहा। खोटे होने की परख, खरे होने की परख।

🔴 पुराने जमाने के रुपये को कसौटी लगायी जाती थी, पुराने जमाने में जो रुपये चला करते थे, कसौटी लगाई जाती थी। वो खोटा अलग फेंक देते थे, खरा अलग फेंक देते थे। मैंने अपने आपकी कसौटी लगाई और कसौटी बता देती थी कि ये खोटा पैसा है, खरा पैसा है। अपनी हर मनोवृत्ति के ऊपर कसौटी लगाता चला गया और मैं यह देखता हुआ चला गया कि मैं कहाँ खोटा सिक्का हूँ, कहाँ खरा? जहाँ खोटा था, अपने आपको सँभालता रहा; जहाँ खरापन था, वहाँ सुधारता रहा।  

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/Literature_Life_Transforming/amart_vachan_jivan_ke_sidha_sutra/pooja_upasna_ke_marn

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...