शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 94)

🌹 आदर्श विवाहों के लिए 24 सूत्री योजना

🔴 (5) प्रचार की आवश्यकता— आदर्श विवाहों की ख्याति दूर-दूर तक फैलानी चाहिए ताकि वैसा करने का उत्साह दूसरे लोगों में भी उत्पन्न हो। हमारे देश में अभी विवेकशीलता जागृत नहीं हुई है। हर बात ‘भेड़ियाधसान’ की तरह एक दूसरे की देखा-देखी होती है। लोग चाहते हुए भी किसी सुधार को साहस के अभाव में अपना नहीं पाते, पर जब उन्हें पता लगता है कि ऐसा तो अन्य कितने ही लोग कर रहे हैं तब उनकी हिम्मत बढ़ जाती है और वे भी वैसा ही करने उद्यत हो जाते हैं। इसलिए प्रत्येक शुभ कर्म का अधिकाधिक प्रचार होना चाहिए। विशेषतः आदर्श विवाहों की ख्याति को दूर-दूर तक अवश्य ही फैलाई जानी चाहिए।

🔵 समाचार पत्रों में ऐसे समाचार अवश्य भेजे जांय। युग-निर्माण योजना पत्रिका में ऐसे समाचार बहुत प्रेम और उत्साहपूर्वक छापे जाते हैं। जिन अभिभावकों या लड़की-लड़के के विशेष साहस से वह शुभ कार्य सम्पन्न हुआ हो उनके फोटो भी छापे जाते हैं। मथुरा केन्द्रीय कार्यालय से ऐसे समाचार भारत भर में अनेक भाषाओं में छपने वाले पत्रों में छपने भेज दिये जाते हैं।

🔴 जहां समाचार पत्र नहीं पहुंचते वहां पच, विज्ञप्ति आदि छाप कर वह समाचार घर-घर पहुंचाया जा सकता है और उनके पोस्टर दीवारों खम्भों आदि पर चिपकाये जा सकते हैं। और भी जो तरीके ऐसे समाचार दूर प्रदेशों तक अधिक जनता तक पहुंचाये जाने के लिए सम्भव हों वे सभी करने का प्रयत्न करना चाहिए। ताकि बढ़ती हुई सुधारात्मक प्रवृत्तियों का परिचय अधिकाधिक जनता को हो सके और सर्व साधारण के मन में उसी तरह के अनुकरण की आकांक्षा जागृत हो सके।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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