रविवार, 5 फ़रवरी 2017

👉 "सुनसान के सहचर" (भाग 43)

🌞  हिमालय में प्रवेश (तपोवन का मुख्य दर्शन)

🔵 यों गंगोत्री में भी गौरी कुण्ड के पास एक भागीरथ शिला है, इसके बारे में भी भागीरथ जी के तप की बात कही जाती है पर वस्तुतः यह स्थान हिमाच्छादित भागीरथ पर्वत ही है। इंजीनियर लोग इसी पर्वत में गंगा का उद्गम मानते हैं।

🔴 भागीरथ पर्वत के पीछे नीलगिरि पर्वत है जहां से नीले जल वाली नील नदी प्रवाहित होती है। यह सब रंग-बिरंगे पर्वतों का स्वर्गीय दृश्य एक ऊंचे स्थान पर से देखा जा सकता है। जब बर्फ पिघलती है तो भागीरथ पर्वत का विस्तृत फैला हुआ मैदान दुर्गम हो जाता है बर्फ फटने से बड़ी-बड़ी चौड़ी खाई जैसे दरारें पड़ती हैं उनके मुख में कोई चला जाय तो फिर उसके लौटने की आशा नहीं की जा सकती। श्रावण भाद्रपद महीने में जब बर्फ पिघल चुकी होती है तो यह प्रदेश सचमुच ही नन्दनवन जैसा लगता है। केवल नाम ही इसका नन्दनवन नहीं है वरन् वातावरण भी वैसा ही है। उन दिनों मखमल जैसी घास उगती है और दुर्लभ जड़ी बूटियों की महक से सारा प्रदेश सुगन्धित हो उठता है। फूलों से यह धरती लद सी जाती है। ऐसी सौन्दर्य स्रोत भूमि में यदि देवता निवास करते हों तो इसमें आश्चर्य ही क्या है। पाण्डव सशरीर स्वर्गारोहण के लिए यहां आये होंगे इसमें कुछ भी अत्युक्ति मालूम नहीं होती।

🔵 हिमालय का यह हृदय तपोवन जितना मनोरम है उतना ही दुर्लभ भी है। शून्य से भी नीचे जमने लायक बिन्दु पर जब यहां सर्दी पड़ती है तब इस सौंदर्य को देखने के लिए कोई विरला ही ठहरने में समर्थ हो सकता है। बद्रीनाथ, केदारनाथ तीर्थ इस तपोवन की परिधि में ही आते हैं। यों वर्तमान रास्ते से जाने पर गोमुख से बद्रीनाथ लगभग ढाई सौ मील है पर यहां तपोवन से माणा घाटी होकर केवल बीस मील ही है। इस प्रकार केदारनाथ यहां से बारह मील है पर हिमाच्छादित रास्ते सबके लिए सुगम नहीं हैं।

🔴  इस तपोवन को स्वर्ग कहा जाता है। उसमें पहुंच कर मैंने यही अनुभव किया मानो सचमुच स्वर्ग में ही खड़ा हूं। यह सब उस परम शक्ति की कृपा का ही फल है, जिनके आदेश पर यह शरीर निमित्त मात्र बनकर कठपुतली की तरह चलता चला जा रहा है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 महान कर्मयोगी स्वामी विवेकानन्द (भाग 2)

🔴 परमहंस देव के इहलीला संवरण करने के पश्चात् जब परिव्राजक बनकर उन्होंने देश भ्रमण किया तो मार्ग में अलवर, खेतड़ी, लिम्बडी, मैसूर, रामनद...